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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   UP News: 800 shops of Nagar Nigam were sold in Meerut but officials are not taking any action

यूपी में बड़ा खेल: बेच डाली नगर निगम की 800 दुकानें, जिम्मेदार अफसरों को नहीं परवाह, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

Sun, 17 Jul 2022 04:16 PM IST
कपिल kapil राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ
राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sun, 17 Jul 2022 04:16 PM IST
सार

यूपी के मेरठ शहर में एक बड़ा खेल सामने आया है। यहां नगर निगम की 800 दुकानें बेच दी गईं। वहीं इसके बावजूद भी नगर निगम के अधिकारी बेपरवाह बैठे हैं।

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UP News: 800 shops of Nagar Nigam were sold in Meerut but officials are not taking any action
नगर निगम मेरठ - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ में नगर निगम की संपत्ति बेची जा रही है और जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। शहर में नगर निगम की 974 दुकानों में से करीब 800 दुकानें मिलीभगत कर बेच दी गई हैं। जिन लोगों को दुकानें बेची गई हैं उनको 100 रुपये के स्टांप पेपर पर पार्टनर दर्शाकर 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक किराएदारों ने कमा लिए हैं। संपत्ति का स्वरूप भी बदल दिया गया है। होटल में कई दुकानें बनाकर उन्हें भी मोटे मुनाफे में बेच दिया है। 

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पिछले दस साल से नगर निगम की संपत्तियों के स्वरूप बदलकर बेचने और खरीदने का खेल चल रहा है। घंटाघर पर पाल होटल में अंदर ही दुकानें बना दी गई हैं, जिनको प्राइवेट लोगों द्वारा करोड़ों रुपये में बेचा गया। अब पाल होटल एक बड़ी मार्केट में बदल गया है। निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से भूमाफिया ने सरकारी संपत्ति से करोड़ों रुपये कमा लिए। यह मामला नगर निगम की बोर्ड बैठकों में भी कई बार उठा, शासन तक भी शिकायत पहुंची, लेकिन अधिकारियों ने फाइलें दबा दीं।   
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46 लाख की हो रही है निगम को किराए से आय 
महानगर में निगम की 974 दुकानें और दो होटल हैं। निगम के रिकार्ड के मुताबिक अभी तक निगम की सभी दुकानों से प्रतिवर्ष लगभग 46 लाख रुपये की आय हो रही है। अगर नगर निगम प्रशासन अपनी संपत्ति पर उचित दरों के साथ किराया निर्धारित करे और मूल आवंटी का सत्यापन कराए तो किराए से निगम की आय तीन से चार गुना बढ़ जाएगी। इतना ही नहीं, सरकारी संपत्तियों में कारोबार करने वालों की भी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।  
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निगम की दुकानें 
घंटाघर पालिका मार्केट, पाल होटल मार्केट, सिटी होटल मार्केट, मेट्रो प्लाजा चौराहा मार्केट, भगत सिंह मार्केट, देहली गेट सरदार पटेल स्कूल मार्केट, पूर्वा अहिरान, कचहरी पूर्वी गेट, जेल चुंगी चौराहा, घंटाघर मीना बाजार आदि। 

2012 में हुआ था किराया निर्धारण 
नगर निगम की दुकान, होटल आदि का किराया प्रत्येक दस साल में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी करके निर्धारित किया जाना चाहिए। 2012 में नगर निगम प्रशासन ने महानगर में निगम की दुकान व होटलों का किराया निर्धारित किया था। नियम के अनुसार अप्रैल 2022 से नई दरों के साथ दुकानों का किराया निर्धारित होना चाहिए था, जो अभी तक नहीं हुआ है। निगम को राजस्व हानि पहुंचाने का कार्य किराया विभाग से चल रहा है। उच्चाधिकारियों तक न तो बात पहुंचाई जाती है और पूरे मामले को दबाने का ही प्रयास जारी रहता है। 

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दुकान का दोबारा आवंटन होने पर निगम को होगा दोगुना लाभ 
निगम एक्ट के मुताबिक अगर मूल आवंटी सरकारी दुकान को छोड़ता है, या किसी अन्य कारण वश सरेंडर करता है तो नगर निगम प्रशासन नए सिरे से दुकान की नीलामी यानी लॉटरी करेगा, जिसके लिए नगर निगम नए किराएदार से जहां एक लाख रुपये प्रीमियम के रूप में जमा कराएगा और पूर्व किराएदार पर लागू किराया राशि की डबल राशि निर्धारित करेगा। सीधे सीधे नगर निगम को एक लाख रुपये के साथ-साथ डबल किराया मिलना शुरू हो जाएगा।

जांच कराई जाएगी 
यह मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की जांच कराई जाएगी। जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। - अमित पाल शर्मा, नगरायुक्त 

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