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यूपी एमएलसी चुनाव: मेरठ की दोनों सीटें जीतने का भाजपा को मिलेगा लाभ! शर्मा और पुंडीर की हार के बाद बदला इतिहास

Wed, 28 Oct 2026 11:37 AM IST
Sharukh Khan कुलदीप त्यागी, अमर उजाला, मेरठ
कुलदीप त्यागी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 28 Oct 2026 11:37 AM IST
सार

यूपी एमएलसी चुनाव में मेरठ से दोनों सीटें जीतने का भाजपा को लाभ मिल सकता है। मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक सीट पर लगातार दूसरी बार भाजपा विजयी हुई है।

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UP MLC Elections: BJP Wins Both Meerut Seats Again as Sharma and Pundir Lose
UP MLC Election - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माने जा रहे मेरठ-सहारनपुर खंड शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर बाजी मार ली है। लगातार दूसरी बार दोनों सीटों पर मिली इस ऐतिहासिक जीत से भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए मजबूत संकेत दे दिए हैं।
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वहीं दूसरी ओर, वर्ष 2020 के बाद अब 2026 के इन चुनावों में भी करारी शिकस्त झेलने के बाद पारंपरिक शिक्षक संगठनों की राजनीति पूरी तरह रसातल पर चली गई है। 
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इस हार से जहां शिक्षक नेता बेहद हताश हैं, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता चुनाव में दूसरे स्थान पर आने से ही उत्साहित नजर आ रहे हैं। हालांकि विपक्ष और शिक्षक गुटों ने प्रशासन पर मतदाता सूची बनाने में भारी मनमानी और धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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शर्मा और पुंडीर की हार के बाद बदला इतिहास
एक समय था जब उत्तर प्रदेश की शिक्षक और स्नातक एमएलसी सीटों पर गैर-राजनीतिक शिक्षक संगठनों का एकछत्र राज हुआ करता था। माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के संस्थापक रहे दिवंगत ओमप्रकाश शर्मा ने मेरठ-सहारनपुर खंड शिक्षक सीट पर लगातार 50 वर्षों तक प्रतिनिधित्व करते हुए रिकॉर्ड आठ बार जीत हासिल की थी।

इसी तरह स्नातक सीट पर शर्मा गुट के हेम सिंह पुंडीर चार बार और बलबीर सिंह दबथुआ विजयी रहे थे। लेकिन वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने ओमप्रकाश शर्मा को और भाजपा के दिनेश गोयल ने हेम सिंह पुंडीर को हराकर इस वर्चस्व को तोड़ा था, जो इस बार भी बरकरार रहा।
 

बिखरने से पूरी तरह साफ हुए शिक्षक संगठन
इस चुनाव में शिक्षक संगठनों को अपनी हार का अंदेशा पहले से ही था। चुनाव के दौरान शर्मा और ठकुराई गुट दोनों के पदाधिकारी लगातार वोटर लिस्ट में अनियमितताओं के आरोप लगाते रहे।
 

हार के डर से दोनों गुटों के बीच चुनावी गठबंधन की कवायद भी शुरू हुई थी, लेकिन ऐन वक्त पर शर्मा गुट के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रमोद मिश्रा के भाजपा में शामिल हो जाने से यह योजना धरी की धरी रह गई। परिणाम स्वरूप दोनों गुट अलग-अलग होकर चुनाव लड़े और करारी हार के साथ शिक्षक राजनीति रसातल में पहुंच गई।

प्रशासन ने नहीं बनने दी हमारी वोट : सपा
प्रशासन ने जानबूझकर शिक्षक और स्नातक दोनों ही सीटों पर समाजवादी पार्टी के समर्थकों की वोट नहीं बनने दी। इसके बावजूद पार्टी कार्यकर्ताओं के कड़े प्रयास से हम पिछले चुनाव के मुकाबले (जब 1 से 1.5 हजार वोट मिले थे) इस बार दूसरे स्थान पर आए हैं। आने वाले समय में हमारा यह संघर्ष जरूर रंग लाएगा। -कर्मवीर सिंह गुमी, जिलाध्यक्ष (सपा)
 

गैर-शिक्षकों से भी कराया गया मतदान: ठकुराई गुट
वोट बनवाने से लेकर मतदान संपन्न होने तक इस चुनाव में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। हमने इसकी लिखित शिकायत मंडलायुक्त, यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और दिल्ली में केंद्रीय चुनाव आयोग से भी की, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। मतदाता सूची बनाने में लोकतांत्रिक व संवैधानिक व्यवस्था को ताक पर रखकर इस बार खुलेआम वोट चोरी की गई और गैर-शिक्षकों से भी मतदान कराया गया। - डॉ. उमेश चंद त्यागी, प्रदेश अध्यक्ष (माध्यमिक शिक्षक संघ, ठकुराई गुट)
 
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