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यूपी विधान परिषद चुनाव: सरकार का वैश्य और गुर्जर कार्ड, वाजपेयी दरकिनार

Mon, 16 Apr 2018 11:34 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Mon, 16 Apr 2018 11:34 AM IST
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UP legislative council elections: Government Vaishya and Gujjar card, bypassing Vajpayee
पूर्व एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह

भाजपा ने विधान परिषद में जाने वाले प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए जारी 10 प्रत्याशियों की सूची में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्व एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल और भाजपा के प्रदेश महामंत्री अशोक कटारिया को स्थान दिया गया है। जबकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को इस बार भी दरकिनार कर दिया गया। 

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डॉ. सरोजनी अग्रवाल समाजवादी पार्टी में रहते हुए दो बार एमएलसी रह चुकी हैं। लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने सपा को अलविदा करते हुए विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन की थी। तभी से उनका दोबारा एमएलसी बनना तय माना जा रहा था। जिस शीर्ष नेतृत्व के माध्यम से डॉ. सरोजनी भाजपा में आयी थीं, उन्होंने अपना वादा पूरा कराते हुए एक फिर से विधान परिषद में भेजने का रास्ता तय कर दिया। 
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एक तीर से तीन निशाने
डॉ. सरोजनी अग्रवाल को एमएलसी पद का दावेदार बनाकर भाजपा ने वैश्य समाज को साधने का प्रयास किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वैश्य वर्ग भाजपा का वोट बैंक है। लेकिन उसे इतना प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जितना वैश्य समाज उम्मीद करता है। ऐसे में डॉ. सरोजनी के माध्यम से भाजपा ने तीन निशाने साधे हैं। एक तरफ जहां उनसे किया वादा पूरा किया, तो दूसरी तरफ वैश्य समाज को भी प्रतिनिधित्व दिया। जबकि महिला कोटे को भी पूरा कर दिया। 
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मंत्री बन सकते हैं कटारिया 
अशोक कटारिया भाजपा में तेजतर्रार युवा नेताओं में गिने जाते हैं। मूल रुप से बिजनौर जनपद के निवासी अशोक कटारिया ने एबीवीपी से राजनैतिक जीवन शुरू किया। इसके बाद युवा मोर्चा में भी राष्ट्रीय स्तर तक काम करते हुए वर्ष 2014 में भाजपा की प्रांतीय कार्यकारिणी में चुने गए। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में बिजनौर सीट से प्रमुख दावेदार रहे अशोक इस समय वह प्रदेश महामंत्री हैं।

विधायक सोमेंद्र के लिए झटका

UP legislative council elections: Government Vaishya and Gujjar card, bypassing Vajpayee
भाजपा के प्रदेश महामंत्री अशोक कटारिया

गुर्जर बिरादरी के अशोक कटारिया को एमएलसी बनाकर भाजपा ने पश्चिमी क्षेत्र में गुर्जर मतों को साधने के लिए बेहतर कार्ड खेला है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि एमएलसी चुनाव के बाद होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें जगह मिल सकती है। अशोक कटारिया का एमएलसी बनना दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर के लिए झटका माना जा रहा है। क्योंकि डॉ. सोमेंद्र गुर्जर प्रतिनिधित्व के तहत मंत्री पद की दावेदारी पेश कर रहे हैं। लेकिन अशोक कटारिया के कद के आगे अब उनकी पैरवी कमजोर पड़ सकती है। 

डॉ. वाजपेयी की फिर हुई उपेक्षा 
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी अब पार्टी में लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। वर्ष 2014 में उनके ही नेतृत्व में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 72 सीटें जीतकर इतिहास रचा था। लेकिन इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से हुई अदावत के चलते पैदा हुई गुटबाजी से उन्हें किनारे करना शुरू कर दिया। विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद पर नहीं दोहराया गया। शहर विधानसभा से वह चुनाव लड़े। लेकिन हार गए। इसके बाद उम्मीद थी कि एमएलसी या राज्यसभा में उन्हें भेजा जाएगा। वहीं राष्ट्रीय संगठन में भी किसी अहम दायित्व देने के कयास पार्टी के तमाम पुराने नेता लगा रहे थे। लेकिन डॉ. वाजपेयी को अभी तक पूरी तरह उपेक्षित रखा गया है।

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