UP: उत्तराखंड तक पहुंची नोएडा में भूमि घोटाले की जांच की आंच, हरिद्वार में तैनात रहे हैं तीनों नौकरशाह
चिटहेरा गांव में यशपाल ने वर्ष 2012 में अनुसूचित और अन्य समाज के लोगों के पट्टों की जमीन का अनुबंध जबरन परिचितों के नाम करा लिया था। इस मामले में भूमाफिया यशपाल तोमर के खिलाफ जांच चल रही है। यह जांच अब उत्तराखंड पहुंच गई है।
विस्तार
नोएडा के दादरी थाने में रविवार को मुख्य आरोपी यशपाल तोमर और एक महिला समेत नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। बताया गया कि इनमें एक आरोपी उत्तराखंड में तैनात वरिष्ठ आईएएस के ससुर और दूसरे एक वरिष्ठ आईएएस के पिता हैं। एक अन्य आरोपी आईपीएस अधिकारी की संबंधी है।
साथ ही मुकदमे में शामिल एक कंपनी उत्तराखंड के पूर्व सीएम के रिश्तेदार की बताई जा रही है, जिसके नाम 100 बीघा जमीन दर्ज है। गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे के चलते यशपाल की 153 करोड़ की भूमि एसटीएफ कुर्क कर चुकी है। मेरठ प्रशासन ने उसे भूमाफिया घोषित किया था।
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यह है मामला
चिटहेरा गांव में यशपाल ने वर्ष 2012 में अनुसूचित और अन्य समाज के लोगों के पट्टों की जमीन का अनुबंध जबरन परिचितों के नाम करा लिया था। वर्ष 2016 में यशपाल ने पट्टे की जमीन का बैनामा कराने की तैयारी की थी। जब अनुबंधित जमीन का सामान्य वर्ग के लिए बैनामा नहीं हो सका तो उसे गांव के दलित समाज के कृष्णपाल, बैलू और कर्मवीर के नाम से साठगांठ कर फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनवा लिए। इसके बाद पट्टे की जमीन का बैनामा यशपाल तोमर, कर्मवीर, बैलू, कृष्णपाल, एम भास्करण, केएम संत उर्फ खचरेमल, गिरीश वर्मा, सरस्वती देवी और त्रिदेव प्राइवेट लिमिटेड के नरेंद्र कुमार के नाम करा लिया।
हरिद्वार में तैनात रहे हैं तीनों नौकरशाह
जिन तीनों नौकरशाहों के परिजनों के खिलाफ ग्रेटर नोएडा पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है, वे अलग-अलग समय में हरिद्वार में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं। गैंगस्टर यशपाल तोमर का धंधा भी उस वक्त हरिद्वार में जमीनों की खरीद-फरोख्त का धंधा था। वह लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाकर उनकी जमीनें हड़प लेता था। माना जा रहा है कि इस दौरान ही यशपाल ने इन नौकरशाहों के परिवारजनों के लिए जमीनों की खरीद-फरोख्त का काम किया।
हरिद्वार में हुआ था यशपाल पर पहला मुकदमा
यशपाल तोमर के खिलाफ हरिद्वार कोतवाली पुलिस ने वर्ष 2002 में मुठभेड़ के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद उसने तमाम लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाया और उनकी जमीनों को अपने व रिश्तेदारों के नाम कराया।