फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   UP Election 2027 BJP-RLD May Adopt SP-RLD Alliance Formula for Seat Sharing in Western Uttar Pradesh

UP: भाजपा में भी लागू हो सकता है सपा-रालोद गठबंधन वाला फार्मूला; सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों में बातचीत

Tue, 21 Jul 2026 10:16 AM IST
Sharukh Khan कुलदीप त्यागी, अमर उजाला, मेरठ
कुलदीप त्यागी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 21 Jul 2026 10:16 AM IST
सार

यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर पश्चिमी यूपी में भाजपा में भी सपा-रालोद गठबंधन वाला फार्मूला लागू हो सकता है। सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों में वार्ता शुरू हो गई है। एक-दूसरे दलों में भाजपा-रालोद के नेता अपने संबंध मजबूत करने में लगे हैं।

विज्ञापन
UP Election 2027 BJP-RLD May Adopt SP-RLD Alliance Formula for Seat Sharing in Western Uttar Pradesh
UP Election 2027 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मिशन- 2027 को फतह करने के लिए भाजपा अपने गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे का तालमेल बनाने में जुट गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के बीच सीट बंटवारे पर सपा वाला फॉर्मूला लागू हो सकता है। 
विज्ञापन


इसमें सिंबल रालोद का और चेहरा भाजपा का होगा। दोनों दलों के नेता एक-दूसरे दलों में अपने संबंध मजबूत करने में लगे हैं। सीट बंटवारे को फाइनल करने के लिए दोनों दलों के बीच लंबी सियासी खींचतान भी चलेगी।
विज्ञापन

प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। पश्चिम के सियासी गलियारों में भाजपा-रालोद गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान भी होनी शुरू हो गई है। भाजपा-रालोद के बीच सीट बंटवाने में चौंकाने वाला फॉर्मूला लागू हो सकता है। 

 

यह फॉर्मूला कोई नया नहीं, बल्कि 2022 के विधानसभा चुनाव में आजमाया गया सपा-रालोद गठबंधन वाला मॉडल है। इस नए समीकरण के तहत पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर ''सिम्बल रालोद का और नेता भाजपा का''दांव खेला जा सकता है।
 
विज्ञापन

यह है ''सपा-रालोद''वाला पुराना फॉर्मूला
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में जब सपा- रालोद में गठबंधन था, तब कई सीटों पर सपा के कद्दावर नेताओं ने रालोद में शामिल होकर उसके सिंबल पर चुनाव लड़ा था। इनमें मेरठ की सिवालखास सीट से उस समय सपा नेता रहे गुलाम मोहम्मद रालोद में शामिल होकर हैंडपंप सिंबल पर चुनाव जीतकर विधायक बने थे। 

 

इसी तरह से सपा के राजपाल सैनी ने भी रालोद सिंबल पर खतौली से चुनाव लड़ा था, लेकिन तब उनको हार का सामना करना पड़ा। बाद में खतौली में हुए उप चुनाव में रालोद के मदन भैया चुनाव जीते थे। मीरापुर विधानसभा सीट पर भी सपा नेता चंदन चौहान ने रालोद में शामिल होकर उसके सिंबल पर चुनाव जीता था। 

 

सपा नेता रहे अनिल कुमार ने भी पुरकाजी सीट पर रालोद में शामिल होकर चुनाव जीता। इसी तरह से चंदन चौहान के बिजनौर से सांसद बनने के बाद मीरापुर सीट पर उप चुनाव हुआ तो भाजपा नेत्री मिथिलेश पाल ने रालोद में शामिल होकर उसके सिंबल पर चुनाव लड़ा और विधायक बनी।

इस समीकरण का मुख्य कारण
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई ऐसी सीटें हैं, जो पारंपरिक रूप से जाट बाहुल्य हैं, लेकिन वहां भाजपा के पास मजबूत और जिताऊ चेहरे हैं। ऐसे में गठबंधन धर्म को निभाते हुए और सीट रालोद के खाते में जाने की स्थिति में भाजपा के नेता रालोद के सिम्बल पर चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।

नेताओं ने शुरू कर दिया इधर-उधर होने का खेल
इस फॉर्मूले की भनक लगते ही दोनों दलों के नेताओं में अभी से बेचैनी बढ़ गई है। भाजपा और रालोद दोनों ही दलों के टिकटार्थी और वर्तमान विधायक एक-दूसरे के शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय संगठन के साथ अपने संबंध मजबूत करने में जुट गए हैं।

कुछ ऐसे नेता जो वर्तमान में भाजपा में हैं लेकिन संभावित सीट बंटवारे में अपनी सीट रालोद के खाते में जाने की संभावना देख रहे हैं, वे जयंत चौधरी के दरबार में हाजिरी लगाने लगे हैं। वहीं रालोद के कुछ नेता भी भगवा खेमे के संपर्क में हैं।

इस फॉर्मूले की सियासी वजह
रालोद ने जिन 33-35 सीटों पर दावा ठोका है, उनमें से कई पर वर्तमान में भाजपा के विधायक हैं। विधायकों का टिकट कटने से रोकने के लिए यह सिम्बल ट्रांसफर सबसे मुफीद रास्ता है।

रालोद के सिम्बल पर भाजपा का चेहरा होने से जाट-मुस्लिम-मजदूर समीकरण के साथ-साथ भाजपा का पारंपरिक गैर-जाट ओबीसी और सवर्ण वोट बैंक भी आसानी से ट्रांसफर होने की उम्मीद है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed