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यूपी: चेसिस गैंग ने एक नंबर के बना डाले चोरी के तीन हजार वाहन, काला ने खोला राज 

Sun, 17 Feb 2019 01:06 PM IST
Dimple Sirohi गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 17 Feb 2019 01:06 PM IST
सार

  • चेसिस नंबर बदलने वाला गिरोह सोतीगंज में है
  • 1 साल में जोन में लूट के 80 हजार के करीब वाहन होते हैं चोरी
  • जोन के 09 जिलों के थानों में पकड़े गए ऐसे दो नंबर के वाहन
  • पुलिस ने आरटीओ से मांगा इन वाहनों का रिकॉर्ड 

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UP: Chassis gang created a single number for three thousand stolen vehicles
सोतीगंज में दुकानों में जांच करती पुलिस

विस्तार

उत्तर प्रदेश के सोतीगंज के गिरोह ने चेसिस नंबर बदलकर चोरी और लूट के तीन हजार वाहनों को एक नंबर का बना डाला। इसका खुलासा पुलिस जांच में हुआ है। ये सभी वाहन मेरठ जोन के नौ जिलों के थानों में खड़े हैं। पुलिस ने आरटीओ विभाग से इनका रिकॉर्ड मांगा है।

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इस गैंग के बदमाश चोरी या लूट के वाहन के चेसिस नंबर को घिसकर किसी पुराने वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर लगा देते हैं। एक वाहन का प्रॉपर वेरीफिकेशन फोरेंसिक लैब आगरा से होता है। खर्चा भी करीब 20-25 हजार रुपये आता है। पुलिस इसे कराने से बचती है।
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केवल गंभीर मामलों में ही सत्यापन होता है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक जोन में एक साल में करीब 80 हजार वाहन (कार व बाइक) चोरी व लूट के होते हैं, जिनमें करीब तीन हजार वाहन एक नंबर के बनाकर दौड़ाए जा रहे हैं। 

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काला ने खोला राज
पुलिस के मुताबिक चोरी-लूट के वाहनों का चेसिस नंबर बदलने वाले गैंग के माफिया राहुल काला ने पूछताछ में सदर पुलिस के सामने इसका खुलासा किया। काला ने बताया कि खराद की मशीन से चोरी के वाहन का चेसिस नंबर घिसते हैं। पुरानी बाइक सोतीगंज में काट देते हैं। सोतीगंज में ऐसे करीब 15 कारीगर बताए जाते हैं। 

चेकिंग से बच जाते हैं वाहन 
पुलिस चेसिस नंबर बदले हुए वाहन को चेकिंग में आसानी से नहीं पकड़ पाती। वाहनों की डुप्लीकेट आरसी और चेसिस नंबर का मिलान देखकर पता नहीं चलता। पुलिस सिर्फ आरसी, डीएल और प्रदूषण प्रमाणपत्र देखती है। इनमें से कोई कागज कम मिलने पर चालान काट देती है या वाहन सीज कर देती है। 

ई-चालान में भी खुली पोल 
ट्रैफिक पुलिस जब संबंधित आरसी के आधार पर वाहन मालिक के पते पर ई-चालान भेजती है तो वाहन मालिक ट्रैफिक कार्यालय पहुंचकर शिकायत करते हैं कि उनका वाहन तो उस समय घर पर खड़ा था और उसका चालान हो गया। दरअसल अधिकांश मामलों में कई शातिर अपने वाहनों पर दूसरे के वाहनों का नंबर लगाकर घूमते हैं। कई वाहन तो दूसरे जिलों या राज्य  के होते हैं।

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