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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   UP: 129 crores loss of transport department in one year because of unauthorized buses in West UP

एक्सक्लूसिव: रोडवेज पर भारी पड़ रहा डग्गामार सिस्टम, विभाग को हर साल 129 करोड़ का घाटा

Fri, 09 Aug 2019 06:26 PM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 09 Aug 2019 06:26 PM IST
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UP: 129 crores loss of transport department in one year because of unauthorized buses in West UP
डग्गामार बसें - फोटो : अमर उजाला

सरकार के तमाम दावों को धता बताकर रोडवेज के समानांतर रूटों पर दौड़ रहीं डग्गामार बसें विभाग को हर साल 129 करोड़ की चोट पहुंचा रही हैं। मेरठ से दिल्ली, मुरादाबाद और मुजफ्फरनगर रूट पर 179 डग्गामार बसें अवैध रूप से बेधड़क दौड़ रही हैं। रोडवेज ने तीनों रूटों पर दौड़ रहीं बसों का सर्वे कराकर इन सभी 179 बसों की नंबर सहित सूची शासन को भेज दी है। साथ ही मंडलायुक्त, एसएसपी और आरटीओ को भी सूची भेजी है। लेकिन इस सूची पर अभी तक किसी भी अधिकारी ने संज्ञान नहीं लिया है। यही नहीं ये बसें आरटीओ के राजस्व पर भी डाका डाल रही हैं। 

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प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) राज में फली फूलीं डग्गामार बसें समाजवादी पार्टी (सपा) के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज में भी न केवल धड़ल्ले से दौड़ रही हैं बल्कि इनकी संख्या भी तेजी से बढ़ती जा रही हैं। दो से तीन दर्जन की संख्या में दौड़ने वाली बसों की संख्या अब 179 तक पहुंच गई है। मेरठ रोडवेज रीजन के बस बेड़े का करीब 25 फीसदी है। पिछले कई वर्षों से राजस्व को चोट पहुंचा रहीं डग्गामार बसों के संचालन के सुबूत के तौर पर रोडवेज ने अपने कर्मचारियों से लगाकर रिपोर्ट तैयार कराई है।
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इसके लिए विभाग ने मेरठ से वाया गढ़-गजरौला मुरादाबाद दौड़ रही बसों का सर्वे मऊ खास पुलिस चौकी पर कराया। मेरठ से मुजफ्फरनगर रूट की बसों का सर्वे सिवाया टोल पर कराया और मेरठ से कौशांबी तक दौड़ रही बसों का सर्वे मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल पर कराया। इस सर्वे में कुल 179 डग्गामार बसे दौड़ती मिलीं। इसमें मेरठ-मुरादाबाद रूट पर 63 बसें, मेरठ-मुजफ्फरनगर रूट पर 26 बसें और मेरठ-कौशांबी रूट पर 90 बसें दौड़ती मिलीं।

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ये है डग्गामार बसों का हाल 
रूट                                            बसों की संख्या 
मेरठ-गढ़-गजरौला-मुरादाबाद           63 
मेरठ-मुजफ्फरनगर                        26
मेरठ-कौशांबी                                90
कुल बस                                       179

हर माह खुली लूट
आमतौर पर एक बस रोजाना औसतन 20 हजार रुपये की कमाई करती है। 179 डग्गामार बसों की कमाई पर नजर डालें तो यह कमाई 35.80 लाख रुपये रोजाना बैठती है। यानी महीने में कमाई का आंकड़ा 10 करोड़ 74 लाख तो सालाना करीब 129 करोड़ रुपये बैठता है। किसी विभाग की इतनी बड़ी कमाई लुट जाए तो उसका घाटे में जाना लाजिमी है।

रोडवेज रंग में रंगी डग्गामार
डग्गामार बस ऑपरेटरों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्होंने अपनी बसों को रोडवेज बसों के रंग में रंगवा दिया है। यही नहीं रोडवेज बसों पर लिखे स्लोगन से मिलते जुलते स्लोगन भी लिखवा रखे हैं, लेकिन तंत्र खामोश है। न तो इस पर परिवहन विभाग लगाम लगा रहा है और न ही पुलिस। 

हमने रिपोर्ट भेज दी है
तीन रूटों पर दौड़ रही 179 बसों की उनके नंबर के साथ सर्वे लिस्ट तैयार कर परिवहन आयुक्त के अलावा जिला प्रशासन और आरटीओ को कार्रवाई करने की मांग के साथ भिजवा दी है। रोडवेज के साथ राष्ट्रीयकृत रूटों पर दौड़ रही ये बसे विभाग के राजस्व को चोट पहुंचा रही हैं। - नीरज सक्सेना, आरएम मेरठ रोडवेज रीजन

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