अनोखी दोस्ती: चेतन के कंधे पर रहती हैं ‘लड्डू’ और ‘बर्फी’, हस्तिनापुर मेले में आकर्षण का केंद्र बनीं गिलहरी
हस्तिनापुर गंगा मेले में मवाना निवासी चेतन सिंह सैनी और दो गिलहरियों की अनोखी दोस्ती ध्यान का केंद्र बनी रही। चेतन ने छह महीने पहले इन बच्चों को बचाया था, तब से वे उनके साथ ही रहते हैं। उनकी यह दोस्ती मेले में चर्चा का विषय बन गई।
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कहते हैं प्रेम सीमाएं नहीं देखता। वह इंसान और जानवर के बीच भी वैसा ही हो सकता है जैसा इंसान अपने परिवार के साथ महसूस करता है। इसका सुंदर उदाहरण हस्तिनापुर के मखदूमपुर गंगा मेले में देखने को मिला, जहां मवाना निवासी चेतन सिंह सैनी अपने कंधों पर दो नन्हीं गिलहरियों को लेकर पहुंचे। ये दोनों गिलहरियां पिछले छह महीनों से चेतन के साथ ही रहती हैं और उनसे एक पल के लिए भी अलग नहीं होतीं।
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चेतन बताते हैं कि छह महीने पहले उन्होंने अपने घर में भूसे की कोठरी को हटाया, जहां उन्हें गिलहरी के दो छोटे बच्चे मिले। मां के ना लौटने पर उन्होंने इन बच्चों को घर ले जाकर दूध पिलाया और उनकी देखभाल शुरू की। धीरे-धीरे इन गिलहरियों ने चेतन को ही अपना सहारा और परिवार मान लिया। वे दिन हो या रात, घर हो या बाहर-हर समय उनके कंधे, बांह या गर्दन पर ही लिपटी रहती हैं।
मेले में चेतन ने इन दोनों गिलहरियों ‘लड्डू’ और ‘बर्फी’ को गंगा स्नान भी कराया। उन्होंने बताया कि एक को लड्डू खाना पसंद है और दूसरी को बर्फी। इसी वजह से उन्होंने यही नाम रख दिए। उनके बुलाने पर दोनों तुरंत उनके पास आ जाती हैं, जैसे परिवार का कोई सदस्य पुकार रहा हो।
पहले गिलहरी खाती हैं, फिर घर के लोग
चेतन बताते हैं कि उनके घर में खाने की शुरुआत भी इन्हीं गिलहरियों से होती है। जब तक इन्हें खाना नहीं खिलाते, घर में कोई भी खाना नहीं खाता, उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
परिवार के सभी सदस्य इन दोनों को अपने बच्चे जैसा प्यार देते हैं। वहीं मेले में लोग यह दृश्य देखकर हैरान रह गए।