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डिवाइडरों पर खड़े ‘मौत’ के यूनिपोल, निगम अधिकारियों ने बेच दिए स्वागत द्वार

Sun, 22 Sep 2019 02:27 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sun, 22 Sep 2019 02:27 AM IST
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Unipole of 'death' standing on dividers
मेरठ..........दिल्ली रोड पर लगे यूनीपोल
मेरठ शहर अवैध यूनिपोल से पटा पड़ा है। इससे नगर निगम को हर माह लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। वहीं जनता की जान भी जोखिम में है। होर्डिंग ठेकेदार और नगर निगम अधिकारियों ने न्यायालय के आदेशों को ताक पर रखकर डिवाइडरों पर यूनिपोल खड़े करा दिए हैं।
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शहरभर की सड़कों पर 400 से अधिक ऐसे यूनिपोल खड़े हैं। इसके बाद भी निगम अधिकारी कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं है। महानगर के मुख्य मार्गों के डिवाइडरों पर हर 20 कदम पर यूनिपोल खड़ा है। सबसे अधिक होर्डिंग भूमाफिया एवं होर्डिंग कारोबारी ज्ञानेंद्र चौधरी के बताए जा रहे हैं। नगर निगम अधिकारी और होर्डिंग कारोबारी की मिलीभगत से आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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कार्रवाई तो दूर निगम अधिकारी उल्टे होर्डिंग ठेकेदारों का सहयोग कर रहे हैं। अपने बचाव के लिए निगम अधिकारी शासन में बैठे कुछ अधिकारियों की सिफारिश का हवाला देते रहे हैं। यही कारण है कि पर्याप्त राजस्व न मिलने के कारण निगम का खजाना खाली पड़ा है। न्यायालय ने भले ही डिवाइडरों पर यूनिपोल लगाने को प्रतिबंधित किया हुआ है, लेकिन शहर में इसका पालन नहीं किया जा रहा है।
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निगम अधिकारियों ने बेच दिए स्वागत द्वार
शहर में दिल्ली रोड, हापुड़ रोड, गढ़ रोड, रुड़की रोड, मवाना रोड़, किला रोड, विवि रोड, बागपत रोड, सरधना रोड, आदि मुख्य मार्गों पर सरकारी खजाने से लगाए गए स्वागत द्वार पर भी प्रचार सामग्री लगाई जा रही है। स्वागत द्वार वाले मार्गों से कमिश्नर, डीएम, आईजी, डीआईजी, एसएसपी, नगरायुक्त, एमडीए वीसी आदि अधिकारी गुजरते हैं, लेकिन किसी ने भी आज तक संज्ञान नहीं लिया।

2013 में हुई यूनिपोल की भरमार
30 मई 2013 को नगर निगम प्रशासन और अभिनव एडवरटाइजिंग कंपनी के बीच बीओटी का अनुबंध हुआ था। इसके अगले महीने ही शहर की सड़कों पर अवैध यूनिपोल खड़े हो गए थे। कई बार निगम के पार्षद और तत्कालीन महापौर हरिकांत अहलुवालिया ने लड़ाई लड़ी।

ठेकेदार ज्ञानेंद्र चौधरी व उसके साथियों ने पार्षदों के साथ जहां मारपीट की थी वहीं संगीन धाराओं में मुकदमा भी दर्ज करा दिया था। यह मामला पिछले साल मौजूदा बोर्ड पार्षदों ने तत्कालीन नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना के सामने भी उठाया था, लेकिन ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई थी।

बीओटी ठेकेदार नहीं करते निगम की शर्त पर काम
नगर निगम ने शहर के छह मार्गों के डिवाइडरों की रंगाई पुताई, स्ट्रीट लाइट जलाने बुझाने और रखरखाव का बीओटी पर ठेका दिया था। इसकी एवज में ठेकेदार को डायरेक्शन बोर्ड लगाने थे न की यूनिपोल। इसी तर्ज पर शहर के 17 चौराहों पर ट्रैफिक लाइट लगाने और चौराहे से निर्धारित दूरी पर डायरेक्शन बोर्ड और कुछ स्थान पर प्रचार करने का ठेका दिया गया था।

कई बार गिर चुके हैं यूनिपोल
जब भी आंधी आती है यूनिपोल गिर जाते हैं। बेगमपुल, ईव्ज चौराहा, गढ़ रोड, दिल्ली रोड आदि मार्गों पर कई बार यूनिपोल गिरने से लोग बाल-बाल बचे हैं। यूनिपोल गिरने से यातायात भी बेपटरी हो जाता है। इसके बाद भी अधिकारी ध्यान नहीं देते।

बीओटी का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। न्यायालय में निगम पैरवी कर रहा है। वाद अभी नंबर पर नहीं आया है। शुक्रवार को बोर्ड ने भी बीओटी ठेके के निरस्तीकरण का प्रस्ताव पास किया। अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी। -राजेश कुमार, होर्डिंग प्रभारी

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