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बजट 2020: मेरठ के कारोबारियों की पुकार, कजाकिस्तान से केन्या तक मशहूर कैंची को मिले धार

Thu, 30 Jan 2020 01:34 PM IST
Dimple Sirohi शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 30 Jan 2020 01:34 PM IST
सार

  • आम बजट से कैंची कारोबारियों को उम्मीदें
  • जीएसटी की दरें घटें, कैंची क्लस्टर और निशुल्क प्रशिक्षण पर हो काम

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Union Budget 2020: Meerut businessmen hopes that scissors get edge
scissors - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कजाकिस्तान से केन्या तक मजबूती और गुणवत्ता के लिए मशहूर मेरठी कैंची की धार अब जीएसटी और चाइनीज कैंचियों के सामने कुंद पड़ने लगी हैं। कैंची का सालाना कारोबार 60 करोड़ रुपये से घटकर 50 करोड़ पर आ चुका है।

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सस्ती चाइनीज कैंची ने हिंदुस्तानी कैंचियों के कारोबार पर कैंची चलाना शुरू कर दिया है। उस पर सरकार द्वारा लगाया गया 18 प्रतिशत जीएसटी इस कारोबार की पकड़ बाजार में कमजोर कर रहा है। एक फरवरी को पेश होने वाले आम बजट से कैंची कारोबारियों को तमाम उम्मीदें हैं। शहर के कैंची कारोबारी आम बजट में जीएसटी की दरों में कटौती, एक  कैंची क्लस्टर, निशुल्क प्रशिक्षण केंद्र, टूल किट, सस्ता ऋण जैसी सुविधाएं चाहते हैं। 

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जीएसटी दरों में हो कटौती
सरकार कैंची पर 18 प्रतिशत जीएसटी वसूलती है। एक ओर चाइना से कैंचियां आने से कैंची कारोबार में सुस्ती है, वहीं सरकार की ओर से 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी वसूलने से कारोबार घाटे में जा रहा है। जीएसटी को घटाकर पांच प्रतिशत करना चाहिए। -शरीफ अहमद, उपाध्यक्ष कैंची क्लस्टर मेरठ

चाइना की कैंची हो बंद
चाइना से आ रही कैंचियों ने पूरा भारतीय बाजार बिगाड़ दिया है। खराब गुणवत्ता के बावजूद वह बिक रही हैं। कीमतें कम होने की वजह से चाइनीज कैंची ने भारतीय कैंची बाजार को कैप्चर कर लिया है। चाइनीज कैंची पर रोक लगनी चाहिए। -हाजी मोइन, कैंची कारोबारी

कैंची कारोबार को मिले बाजार
अगर सरकार कैंची कारीगरों को पोर्टल की सुविधा दे, उन्हें अपना उत्पाद बेचने के लिए मार्केटिंग की सुविधा दे तो कैंची बेचना और सुलभ होगा। सरकार को बजट में कैंची कारोबारियों के लिए बाजार की सुविधा पर ध्यान देना होगा। -आबिद हुसैन

जल्द बने कैंची क्लस्टर 
20 साल से ज्यादा समय से कारोबारी क्लस्टर की मांग कर रहे हैं। जहां कैंची बनाने के साथ प्रशिक्षण भी दिया जा सके। आज तक सरकार ने क्लस्टर के लिए जगह चिह्नित नहीं की। मेरठ की कैंची विश्वप्रसिद्ध है, लेकिन उसे बनाने वालों के लिए कुछ नहीं हो रहा। -हाजी समुद्दीन

सब्सिडी पर मिलें मशीनें
कैंची कारीगरों को कटर व मशीनें खरीदने के लिए कोई छूट नहीं मिलती। कैंची बनाने की मशीनें जापान, चाइना से मंगानी पड़ती है, जो बहुत महंगी हैं। इसके लिए जिला उद्योग केंद्र से ऋण या सब्सिडी मिलनी चाहिए। -शोएब सैफी

ये भी जानें

  • शहर में कैंची कारोबार 350 साल पुराना है।
  • शहर में कैंची कारोबार का सालाना टर्नओवर 50 करोड़ रुपये का है
  • 15हजार कैंची कारीगर इस काम से जुड़े हैं।
  • मेरठ में 25 प्रकार की छोटी-बड़ी कैंचियां बनाई जाती हैं
  • केन्या, कजाकिस्तान, ईरान, इराक, श्रीलंका, अफगानिस्तान, बंाग्लादेश में होती हैं निर्यात।
  • 1956 के उप्र गजट में ब्लैक स्मिथ मो. आखून फर्स्ट सीजरमैन के नाम से दर्ज हैं।
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