उलमा बोले- मदरसों के खिलाफ जारी शरीयत विरोधी पॉलिसी पर रोक लगाई जाए
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दारुल उलूम में चल रहे दो दिवसीय राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया के इजलास के अंतिम दिन मदरसों को सरकारी अनुदान से दूर रखने और इनको कानूनी पहलू से मजबूत बनाने समेत आठ महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। देश के कोने कोने से आए प्रमुख उलमा ने इजलास में यह भी कहा कि मदरसों के खिलाफ जारी शरीयत विरोधी पॉलिसियों पर रोक लगाई जाए।
एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया में आयोजित हुई राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया के अंतिम चरण की बैठक में दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि तमाम मदरसों के जिम्मेदार वर्तमान हालात में इदारों की हिफाजत और सुधार के लिए इंकलाबी कदम उठाएं।
उन्होंने कहा कि इस वक्त पूरे मुल्क में जो हालात पैदा हो गए हैं उसके मद्देनजर मदरसा संचालकों की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। मदरसों के खिलाफ किए जाने वाले दुष्प्रचार पर सख्त नजर रखने के साथ ही सरकारी अनुदान न लें। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने मदरसों के पाठ्यक्रम और उसमें बदलाव को लेकर कहा कि मदरसों का पाठ्यक्रम जिस बुनियाद कायम है उसको इसी तरह बाकी रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मदारिस-ए-इस्लामिया का बुनियादी मकसद शरीयत के इल्मी व दीनी विरासत को उसी शक्ल में महफूज रखना जरूरी है। जिसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं होना चाहिए। इस्लामिक फिकह एकेडमी के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि शिक्षा के साथ साथ मदरसा छात्रों की तरबियत पर भी अधिक ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि यहां से निकलने वाले छात्र ही दूसरों के सामने इस्लाम की सही तस्वीर पेश करते हैं। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने मदरसों के अंदरूनी हालात व आर्थिक व्यवस्था को दुरुस्त बनाने पर जोर दिया। इस दौरान प्रमुख उलमा की मौजूदगी में आठ प्रस्ताव पेश किए गए। जिस पर संगठन से जुड़े सभी सदस्यों ने हाथ उठाकर सहमति जताई।
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अध्यक्षता मौलान अबुल कासिम नोमानी व संचालन मौलाना शौकत अली ने किया। इस मौके पर मुफ्ती सईद अहमद पालनपुरी, मौलाना बदरुद्दीन अजमल, मौलाना हबीबुर्रहमान आजमी, मुफ्ती हबीबुर्रहमान खैराबादी, मौलाना सुफियान कासमी, मौलाना कमरुद्दीन, मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी, मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, मौलाना नेमतुल्ला आजमी, मौलाना अब्दुल खालिक संभली, मौलाना रहमतुल्लाह कश्मीरी, मौलाना मुफ्ती इस्माईल मालेगांव, मौलाना इब्राहीम मलिक, मुफ्ती अहमद गुजराती, मौलाना नूरुल रहमान बिजनौरी, मौलाना महमूद खीरी, मौलाना निजामुद्दीन खामोश, मौलाना अशफाक सराय मीर, मौलाना मतीनुलहक उसामा कासमी कानपुरी, मौलाना अब्दुल कवी हैदराबाद, मौलाना सिद्दीक उल्लाह चौधरी कोलकाता आदि मौजूद रहे।
इजलास में यह प्रस्ताव हुए पारित
1. मदरसों के अंदरूनी निजाम को बेहतर से बेहतर बनाने, शूरा की व्यवस्था को सुदृढ़ करने, मदरसे के आय व्यय का ऑडिट कराने।
2. मदरसों को कानूनी पहलू से मजबूत बनाया जाने, मदरसों की संपत्ति के कागजात दरुस्त रखे जाएं, रजिस्ट्रेशन अवश्य कराएं और कोई ऐसी कमी न छोड़े जिससे सरकार को हस्तक्षेप का मौका मिले।
3. संस्था में आने वालों पर सख्ती से निगाह रखने, मदरसे की मद्द करने वाले व्यक्ति के बारे में जानकारी हासिल किए जाने।
4. मदरसों को हर प्रकार की सरकारी मदद से दूर रखा जाए।
5. मदरसों के समस्त कार्यों में शरई उसूलों को बरकरार रखना।
6. दूसरे धर्म के लोगों से करीबियां बढ़ाने और उनको दीनी इदारों के साफ सुथरे किरदार से रुबरु कराएं।
7. मदरसे एक दूसरे की मदद करें और प्रतिस्पर्धा न रखें।
8. समाज सुधार के लिए लगातार कार्य किए जाएं।
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