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दांव पर भविष्य: कर्ज लिया तो किसी ने प्लॉट बेचा, पूरी जमा पूंजी लगाई, डॉक्टर बनने के ख्वाब पर बरस रहे बम 

Mon, 14 Mar 2022 11:47 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 14 Mar 2022 11:47 AM IST
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ukraine russia war: students invested their deposit by taking loan and solding the plots, now dream of becoming a doctor at risk
यूक्रेन से लौटे भारतीय छात्र - फोटो : अमर उजाला
यूक्रेन में युद्ध से उपजे दर्द का एहसास वहां से लौटे मेरठ के लाडलों से जानिए। इन्हें डॉक्टर बनाने के लिए किसी के माता-पिता ने कर्ज लिया तो किसी ने प्लॉट बेच दिया। कई ने जिंदगी भर की जमा पूंजी ही खर्च कर दी। सकुशल लौट तो आए पर अब डॉक्टर बनने के ख्वाब का क्या होगा। यूक्रेन में कई कॉलेजों पर भी बम गिरे हैं। इसके बाद ऑनलाइन क्लॉस भी बंद हो गई हैं।
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वाहिद अली 

मेरठ के गंगानगर निवासी श्वेता सैनी यूक्रेन की खारकीव मेडिकल यूनिवर्सिटी एमबीबीएस में तीसरे वर्ष की छात्रा हैं। श्वेता के पिता डा. रमेश सैनी बताते हैं कि 15 मार्च से परीक्षा होनी थी। खारकीव तो पूरी तरह तबाह हो गया है। ऐसे में यह समझ नहीं आ रहा कि वहां हालात कब तक  सामान्य होंगे।
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वह चाहते हैं कि भारत सरकार इन बच्चों के दाखिले देश में ही कराए ताकि वह पढ़ाई पूरी कर सकें। वह कहते हैं कि देश में बीयूएमएस, बीएएमएस, डेंटल, एमबीबीएस की एक लाख ही सीटें हैं। यूक्रेन में 25 से 30 लाख रुपये में एमबीबीएस हो जाता है जबकि भारत में निजी कॉलेज एक करोड़ से ज्यादा वसूलते हैं।  
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लोन लिया, प्लॉट बेचा... अब क्या करें 
गढ़ रोड गोकलपुर निवासी मोहम्मद अरहान कीव मेडिकल यूनिवर्सिटी से तीसरे वर्ष के छात्र हैं। पिता मोहम्मद असगर ने बताया बैंक से पहले साल पांच लाख का लिया और प्लॉट भी बेचा। यूक्रेन की राजधानी कीव में हालात बेहद खराब हैं, ऐसे में कुछ समाधान नजर नहीं आ रहा है। 21 मार्च से आनलाइन कक्षा चलने का मेल आया है। युद्ध थमे तो बच्चों की पढ़ाई फिर से शुरू हो।   

पहली बार देखा ऐसा मंजर 
कंकरखेड़ा की मानसी ने बताया कि छात्र-छात्राएं मानइस छह डिग्री तापमान में खुले आसमान तले इंतजार में बैठे रहे। ऐसा मंजर पहली बार देखा। 

जिंदगी भर की कमाई लगाई अब दांव पर बेटे का भविष्य
रोहटा रोड सरस्वती विहार निवासी स्नेहाशीष मालाकर के पिता संतु मालाकर ने बताया सेना में नौकरी पूरी करते हुए जमा पूंजी लगाकर बेटे को यूक्रेन भेजा। लेकिन युद्ध ने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य दांव पर लगा दिया। इवानो फ्रेंकिवस्क मेडिकल यूनिवर्सिटी में प्रथम वर्ष के छात्र स्नेहाशीष ने बताया सोमवार आज से आनलाइन कक्षाएं तो शुरू हो रहीं हैं। लेकिन अभी यूक्रेन जाने के लिए कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है। 

घर वापसी से तसल्ली पर पढ़ाई कैसे होगी पूरी
केसरगंज निवासी मुस्कान सिद्दीकी यूक्रेन में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। वह कहती हैं कि सोमवार से आनलाइन कक्षाएं शुरू होंगी। पिता मो. अयाज ने बताया यूक्रेन ने पांच साल की नागरिकता दे रखी है। वो फैक्टरी चलाते हैं और पत्नी सहबा जमाल शिक्षिका हैं। अपनी कमाई से खर्च निकाल कर पढ़ाई करा रहे हैं। ये तो तसल्ली है कि बच्चे घर आ गए, लेकिन पढ़ाई पूरी करने को लेकर मन में दुविधा है।   

प्रमाणपत्र भी यूक्रेन में ही रह गए 
मलियाना निवासी प्रियांशु प्रभाकर मोकोलिव सिटी के पेट्रो मोयेला ब्लैक सी मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस के चौथे वर्ष के छात्र हैं। पिता विनोद प्रभाकर उपन्यासकार हैं, उन्होंने बताया बेटे ने यूक्रेन में क्राक परीक्षा पास कर ली है। 21 फरवरी में परिणाम आया था। प्रियांशु के प्रमाणपत्र वहीं हैं, दूतावास पोलैंड ट्रांसफर हो गया है। ऐसे में थोड़ी चिंता जरूर सता रही है।

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