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दो-दो साल के दो बच्चों ने एमआईएस-सी को दी मात
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दो-दो साल के दो बच्चों ने
एमआईएस-सी को दी मात
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में दो-दो साल के दो बच्चों ने मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी) को शिकस्त दे दी है। बुधवार को दोनों बच्चों की अस्पताल से छुट्टी की कर दी गई है।
बिल्कुल अलग किस्म का यह सिंड्रोम कोरोना से उबरे बच्चों को तब प्रभावित करता है, जब उनमें एंटीबॉडी विकसित हो जाती हैं। इससे डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय जायसवाल ने बताया कि एमआईएस-सी का खतरा उन बच्चों में होता है, जो कोरोना से उबरे होते हैं। इसे कई सप्ताह बाद बच्चों में देखा गया है।
मेडिकल कॉलेज की बाल ह्रदय रोग विशेषज्ञ मुनेश तोमर ने बताया कि यह सिंड्रोम बच्चों के हृदय, गुर्दे और लिवर को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। इन दो बच्चों समेत कोरोना से ठीक हुए पांच और बच्चों में इसके लक्षण देखे गए थे। इनकी उम्र 21 माह, दो साल, पांच साल, सात साल और 14 साल थी।
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लक्षणों से चलता है पता
डॉक्टरों के मुताबिक मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम कोई बीमारी नहीं है। ये लक्षणों पर आधारित सिंड्रोम है। इसमें बच्चों के फेफड़ों, दिल, पाचन तंत्र, गुर्दे, त्वचा, मस्तिष्क और आंखों में इंफेक्शन और सूजन देखी गई है।
अभिभावक रहें सावधान
कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद बच्चों को बुखार आने, सूजन होने, सांस लेने में तकलीफ, पेट में दर्द हो, त्वचा और नाखून नीले पड़ें या इसके लक्षण दिखें तो अभिभावकों को तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए।
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दो-दो साल के दो बच्चों ने
एमआईएस-सी को दी मात
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में दो-दो साल के दो बच्चों ने मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी) को शिकस्त दे दी है। बुधवार को दोनों बच्चों की अस्पताल से छुट्टी की कर दी गई है।
बिल्कुल अलग किस्म का यह सिंड्रोम कोरोना से उबरे बच्चों को तब प्रभावित करता है, जब उनमें एंटीबॉडी विकसित हो जाती हैं। इससे डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय जायसवाल ने बताया कि एमआईएस-सी का खतरा उन बच्चों में होता है, जो कोरोना से उबरे होते हैं। इसे कई सप्ताह बाद बच्चों में देखा गया है।
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मेडिकल कॉलेज की बाल ह्रदय रोग विशेषज्ञ मुनेश तोमर ने बताया कि यह सिंड्रोम बच्चों के हृदय, गुर्दे और लिवर को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। इन दो बच्चों समेत कोरोना से ठीक हुए पांच और बच्चों में इसके लक्षण देखे गए थे। इनकी उम्र 21 माह, दो साल, पांच साल, सात साल और 14 साल थी।
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लक्षणों से चलता है पता
डॉक्टरों के मुताबिक मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम कोई बीमारी नहीं है। ये लक्षणों पर आधारित सिंड्रोम है। इसमें बच्चों के फेफड़ों, दिल, पाचन तंत्र, गुर्दे, त्वचा, मस्तिष्क और आंखों में इंफेक्शन और सूजन देखी गई है।
अभिभावक रहें सावधान
कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद बच्चों को बुखार आने, सूजन होने, सांस लेने में तकलीफ, पेट में दर्द हो, त्वचा और नाखून नीले पड़ें या इसके लक्षण दिखें तो अभिभावकों को तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए।