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धन नहीं, संतोष से मिलता है सच्चा सुख : भाव भूषण महाराज

Mon, 16 Mar 2026 07:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2026 07:51 PM IST
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True happiness comes from contentment, not wealth: Bhav Bhushan Maharaj
दिगंबर जैन कैलाश पर्वत मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का 37वां दिन
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संवाद न्यूज एजेंसी

हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति और समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 37वें दिन श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों के साथ विधिविधान से कराई।
मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि वास्तविक सुख धन-संपत्ति, वैभव और भौतिक साधनों से नहीं, बल्कि मन के संतोष से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य अधिक से अधिक पाने की इच्छा में उलझा हुआ है। इस कारण उसके जीवन में अशांति और असंतोष बढ़ता जा रहा है। जो व्यक्ति हर परिस्थिति में संतुष्ट रहकर जीवन जीना सीख लेता है वहीं वास्तव में सुखी होता है। संतोष ही मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करता है और उसे जीवन की कठिनाइयों में भी स्थिर बनाए रखता है। उन्होंने बताया कि लोभ और अपेक्षाएं जितनी बढ़ती हैं, उतना ही मनुष्य का सुख कम होता जाता है। उन्होंने सभी से संयम, संतोष और सदाचार को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यही गुण मनुष्य को सच्चे सुख और शांति की ओर ले जाते हैं।
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विधान के दौरान स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य कैलाशचंद जैन, हिमांशु जैन को प्राप्त हुआ। शांति धारा का पुण्य विपिन जैन, सुशील जैन और अरिहंत जैन ने प्राप्त किया। दीप प्रज्ज्वलन वर्षा जैन, शुचि जैन, कविता जैन, निर्मल जैन और मेघा जैन ने किया। ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने शांति धारा का उच्चारण कराया।
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इससे पूर्व देव-शास्त्र-गुरु और आदिनाथ भगवान की पूजा और तीर्थंकरों को अर्घ्य अर्पित कर भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। 48 अर्घ्य चढ़ाए गए और 86 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। इस मौके पर पंच परमेष्ठी, आदिनाथ भगवान और चौबीस तीर्थंकरों की आरती हुई। कार्यक्रम को सफल बनाने में जैन समाज के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहा।
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