तीन तलाक बिल: 14 साल के अंधेरे के बाद अफरोज की जिंदगी में आया नया सवेरा
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मेरठ निवासी अफरोज को 10 रुपये के स्टांप पर लिखवाकर पति से अलग कर दिया गया था। शोर मचा दिया कि तलाक हो गया। गोद में नन्हा बेटा लिए अफरोज के दुखों की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। इसके बाद पति की दूसरी शादी करा दी गई। दूसरी शादी करने के बाद भी पति उसे अपने साथ ले गया।
14 साल से अफरोज लोगों को यह यकीन दिला रही थी कि उसका तलाक नहीं हुआ था, बल्कि ससुराल के कुछ लोगों ने स्टांप पर उसके साइन कराए थे। लेकिन उसे ताने देने वालों की कमी नहीं थी।
मंगलवार को अफरोज की जिंदगी बदल सी गई। तीन तलाक पर बिल पास होने पर अब उसे किसी के सामने कुछ साबित करने की जरूरत नहीं रह गई है। अफरोज जैसी कितनी ही महिलाओं के लिए यह एक नया सवेरा है।
बड़ा मवाना निवासी अफरोज जैदी की शादी 2003 में मेरठ के कोतवाली क्षेत्र के इस्माईल नगर में हुई थी। दो साल के भीतर ही रिश्तों में ऐसी दरार आई कि अफरोज को पति से अलग करा दिया गया। जबकि अफरोज पति के साथ रहना चाहती थी। 2005 में ससुराल के लोगों ने 10 रुपये के स्टांप पर समझौतानामा लिखकर पति-पत्नी में अलगाव करा दिया।
एक नन्हा बेटा गोद में लेकर अफरोज मायके नहीं गई, वो गाजियाबाद में छोटी बहन के साथ रहने लगी। वहां एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगी। इसी बीच उसके पति की दूसरी शादी करा दी गई। दूसरी शादी होने के बाद भी वह 2005 में ही अफरोज को लेने गाजियाबाद तक पहुंचा।
अफरोज भी पति और बेटे के साथ मेरठ आ गई। लेकिन यहां ससुराल वालों और दूसरी पत्नी ने ताने मारने शुरू कर दिए कि तलाक के बाद भी वह पति के साथ क्यों रह रही है। जबकि तलाक तो हुआ ही नहीं था, केवल समझौतानामा लिखा गया था।
आज अफरोज को दो बेटे और एक बेटी है। आसपास के लोग आज भी उसे ताना दे देते हैं कि उसका पति के साथ रहना जायज नहीं है, जबकि वह आज भी लोगों को यकीन दिलाने की कोशिश करती है कि उसका तलाक नहीं हुआ है।
अब तीन तलाक पर बिल पास होने पर अफरोज खुश है। उसका कहना है कि यह बिल उन लोगों के मुंह पर एक तमाचा है, जो तीन तलाक की पैरवी कर रहे थे। केंद्र सरकार ने उसके साथ उसके बच्चों को भी हक दिलाने का काम किया है।
अब मुझे कोई सफाई देने की जरूरत नहीं
अफरोज जैदी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार का बहुत-बहुत शुक्रिया, अब मुझे किसी को यह सफाई देने की जरूरत नहीं है कि मेरा कभी तलाक हुआ ही नहीं। साथ ही यह उन बहनों के लिए भी एक रोशनी की तरह है, जो तीन तलाक की मार झेल रही थीं। तीन तलाक ने महिलाओं की जिंदगी को जहन्नुम बना दिया था।