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अकादमी ऑफ पब्लिक ऑर्डर में प्रशिक्षण का समापन, यह बोले आईजी आरएएफ
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मेरठ। आरएएफ की 108 बटालियन स्थित अकादमी ऑफ पब्लिक ऑर्डर (रैपो) में मंगलवार को जम्मू कश्मीर के 300 जवानों के प्रशिक्षण पूरा किया। समापन कार्यक्रम में आरएएफ के आईजी अरुण कुमार भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम किसी को मारने की ट्रेनिंग नहीं देते, आरएएफ सिर्फ भीड़ को नियंत्रित करने की ट्रेनिंग देती है। इस दौरान जान, माल का जितना कम नुकसान हो, वही हमारी सफलता है।
रैपो को दो माह पहले ही देश के एक मात्र दंगा नियंत्रण प्रबंधन संस्थान का दर्जा मिला है। म्यांमार पुलिस ऑफिसर्स के बाद जम्मू कश्मीर पुलिस प्रशिक्षण लेने वाली पहली राज्य पुलिस बनी है। आईजी अरुण कुमार ने बताया कि जम्मू कश्मीर पुलिस के अन्य बैच और आफिसर्स के अलावा दूसरे राज्यों की पुलिस भी यहां प्रशिक्षण लेगी। उन्होंने कहा कि आरएएफ सीआरपीएफ की विंग है। भीड़ नियंत्रण में आरएएफ की अलग पहचान है। उसने जनता में अलग विश्वास जगाया है। आरएएफ विदेश में सेवा देती रही है। यह इंस्टीट्यूट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान स्थापित करेगा। रेपो में भीड़ नियंत्रण पर 12 दिवसीय इंटरनेशनल कोर्स 8 जनवरी से शुरू हुआ था। इस दौरान आरएएफ कमांडेंट शैलेंद्र कुमार, डिप्टी कमाडेंट शिल्पा कुमार, डिप्टी कमांडेंट संजय कुमार मौजूद रहे। वहीं प्रशिक्षण देने वालों में डिप्टी कमांडेंट पवन देव गौड़, असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सिंह, सलमान, कौशल चौधरी, पवन अखौजी, दिनेशपाल सिंह, डॉ. दीपिका व अन्य रहे।
आरएएफ अफसरों ने जवानों में भरा जोश
मेरठ। प्रशिक्षण समापन समारोह में जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों में आरएएफ के अधिकारियों ने जोश भर दिया। कमांडेंट शैलेंद्र कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर में पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। वहां पुलिस और सीआरपीएफ मिलकर काम करती हैं। 370 हटने के बाद वहां का माहौल सुधरा है। आईजी आरएएफ अरुण कुमार ने बताया कि 1990 में मेरी पोस्टिंग कश्मीर में थी। उस समय के हालात आज भी मेरे जहन में हैं। कश्मीर 24 घंटे में कई रंग बदलता है। वहां कानून व्यवस्था अलग अलग रंगों में दिखाई देती है। 370 खत्म होने पर सुरक्षा के लिए वहां हमारी 14 कंपनी तैनात की गईं। आर्मी की कुछ यूनिट भी वहां तैनात हैं। अरुण कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर में दंगों की अलग स्थिति है। वहां अपने ही भटके हुए लोग हैं, जो कानून व्यवस्था हाथ में लेने की कोशिश करते हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस की एक बटालियन दंगों से निपटने के लिए तैयार की जाए। जम्मू कश्मीर पुलिस के अधिकारी इम्तियाज अहमद ने कहा कि भीड़ नियंत्रण का यह कोर्स बहुत पहले शुरू होना चाहिए था। यह हर राज्य की पुलिस के लिए जरूरी है।
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रैपो को दो माह पहले ही देश के एक मात्र दंगा नियंत्रण प्रबंधन संस्थान का दर्जा मिला है। म्यांमार पुलिस ऑफिसर्स के बाद जम्मू कश्मीर पुलिस प्रशिक्षण लेने वाली पहली राज्य पुलिस बनी है। आईजी अरुण कुमार ने बताया कि जम्मू कश्मीर पुलिस के अन्य बैच और आफिसर्स के अलावा दूसरे राज्यों की पुलिस भी यहां प्रशिक्षण लेगी। उन्होंने कहा कि आरएएफ सीआरपीएफ की विंग है। भीड़ नियंत्रण में आरएएफ की अलग पहचान है। उसने जनता में अलग विश्वास जगाया है। आरएएफ विदेश में सेवा देती रही है। यह इंस्टीट्यूट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान स्थापित करेगा। रेपो में भीड़ नियंत्रण पर 12 दिवसीय इंटरनेशनल कोर्स 8 जनवरी से शुरू हुआ था। इस दौरान आरएएफ कमांडेंट शैलेंद्र कुमार, डिप्टी कमाडेंट शिल्पा कुमार, डिप्टी कमांडेंट संजय कुमार मौजूद रहे। वहीं प्रशिक्षण देने वालों में डिप्टी कमांडेंट पवन देव गौड़, असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सिंह, सलमान, कौशल चौधरी, पवन अखौजी, दिनेशपाल सिंह, डॉ. दीपिका व अन्य रहे।
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आरएएफ अफसरों ने जवानों में भरा जोश
मेरठ। प्रशिक्षण समापन समारोह में जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों में आरएएफ के अधिकारियों ने जोश भर दिया। कमांडेंट शैलेंद्र कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर में पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। वहां पुलिस और सीआरपीएफ मिलकर काम करती हैं। 370 हटने के बाद वहां का माहौल सुधरा है। आईजी आरएएफ अरुण कुमार ने बताया कि 1990 में मेरी पोस्टिंग कश्मीर में थी। उस समय के हालात आज भी मेरे जहन में हैं। कश्मीर 24 घंटे में कई रंग बदलता है। वहां कानून व्यवस्था अलग अलग रंगों में दिखाई देती है। 370 खत्म होने पर सुरक्षा के लिए वहां हमारी 14 कंपनी तैनात की गईं। आर्मी की कुछ यूनिट भी वहां तैनात हैं। अरुण कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर में दंगों की अलग स्थिति है। वहां अपने ही भटके हुए लोग हैं, जो कानून व्यवस्था हाथ में लेने की कोशिश करते हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस की एक बटालियन दंगों से निपटने के लिए तैयार की जाए। जम्मू कश्मीर पुलिस के अधिकारी इम्तियाज अहमद ने कहा कि भीड़ नियंत्रण का यह कोर्स बहुत पहले शुरू होना चाहिए था। यह हर राज्य की पुलिस के लिए जरूरी है।
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