ट्रैक्टर मार्च से खुलेगा किसानों की आजादी का रास्ता: राकेश टिकैत
- भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत का जिले में किया गया स्वागत
- सहारनपुर की जनसभा में शामिल होने के लिए जिले से गुजरे टिकैत
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विस्तार
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से मवी कलां होते हुए चौधरी राकेश टिकैत सहारनपुर के लिए रवाना हुए। किशनपुर बिराल बस स्टैंड पर किसानों ने फूलमालाओं से जोरदार स्वागत किया। उन्होंने कहा कि किसानों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ सबको एक साथ मिलकर आवाज बुलंद करनी होगी। यदि किसान अब भी नहीं जागे तो देर हो जाएगी। आने वाले तीस साल में किसान के पास जमीन नहीं बचेगी।
किसानों से आह्वान किया कि खेतों के साथ-साथ दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे धरने पर भी समय दिया जाना जरूरी है। इस बार कमजोर पड़े तो हमेशा के लिए पछतावा करना पड़ेगा।
स्थानीय लोगों ने टोल का मुद्दा उठाया
भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के सामने कुछ लोगों ने जिवाना टोल प्लाजा पर लोकल को छूट के दायरे से बहार रखे जाने की बात रखी। राकेश टिकैत ने कहा कि यदि संघर्ष नहीं करोगे तो ऐसे ही सरकार के अत्याचार झेलते रहोगे। संगठित होकर अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी।
देश में किसानों की हालत बहुत खराब, आंदोलन लंबा चलेगा
सहारनपुर से उत्तराखंड रूद्रपुर जाते वक्त धामपुर में भाकियू कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का फूल मालाओं के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया। इस मोके पर राकेश टिकैत ने कहा कि देश में किसानों की हालत बहुत खराब है। आंदोलन लंबा चलेगा। सरकार को तीनों कृषि कानूनों को खत्म कर एमएसपी पर कानून बनना होगा। जब तक सरकार ऐसा नहीं करती है।आंदोलन चलेगा।
रविवार को राकेश टिकैत ने धामपुर पहुंचने पर वार्ता में कहा कि सोमवार को उत्तराखंड रूद्रपुर में किसान महापंचायत है। उन्हें वहां पहुंचना है। रविवार को सहारनपुर में महापंचायत थी। जब वे काफिले के साथ सहारनपुर से रूद्रपुर जाने का प्रयास कर रहे थे तो धामपुर में कार्यकर्ता ने उन्हें रोक लिया और उनका स्वागत किया। वह करीब 15 मिनट के लिए आरएसएम कालेज के तिराहे पर रूके और कार्यकर्ताओं से वार्ता की। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
वार्ता में टिकैत ने कहा कि भाकियू का 24 मार्च तक लगातार अलग प्रदेशों में किसान महापंचायतों का प्रोग्राम है।देश के किसानों की हालत बदहाल है। सरकार मनमानी कर रही है। जब किसान कृषि कानूनों को नकार रहा है तो सरकार जबरन उन पर इन्हें क्यों थोपना चाहती है। इससे सरकार की मंशा साफ जाहिर हो रही है कि वह किसानों को नहीं बल्कि कानून बनाकर पूंजीपतियों को लाभ देना चाहती है। जो किसानों को मंजूर नहीं है।
किसानों का तीन माह से लगातार आंदोलन चल रहा है। सरकार के पास किसानों से वार्ता का समय नहीं है तो किसानों के पास भी टाइम नहीं है। सरकार के पास जब टाइम होगा, तभी वार्ता होगी।सरकार ऐसे मानने वाली नहीं है। अभी आंदोलन लंबा चलेगा।
आरोप लगाया कि अभी भी एमएसपी पर फसलों की खरीद नहीं हो रही है। किसानों को 14 दिन में गन्ने का भुगतान नहीं मिल रहा है। आलू की फसल खेतों में है तो बड़े बड़े गोदाम बन गए है। पर इन गोदामों पर किसानों की ध्यान है। किसानों को भंडार को रोकने को गोदामों के बाहर बैठना पडेगा। काम तो सब होगा। पर टाइम लगेगा।
एक प्रश्न के जबाव में राकेश टिकैत ने कहा कि जब नहटौर थाने के ग्रामीण भाजपा जनप्रतिनिधियों को गांव में आने से नो एंट्री का बोर्ड लगा रहे है । ग्रामीण उन्हें आने गांवों में नहीं आने देना चाहते तो वह इसमें क्या कर सकते है। यह तो ग्रामीणों और भाजपा के जनप्रतिनिधियों के बीच का मामला है। जनप्रतिनिधियों से ग्रामीणो से बात करनी चाहिए। तभी किसी बात का निदान हो सकता है।
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