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Tokyo Olympics : रवि दहिया को दांवपेच सिखाकर कोच जगमेंद्र व राजीव ने पूरा किया पदक का सपना

Thu, 05 Aug 2021 04:35 PM IST
Dimple Sirohi अंकित चौहान, अमर उजाला, मेरठ
अंकित चौहान, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 05 Aug 2021 04:35 PM IST
सार

जगमेंद्र सिंह वर्ष 2004 से नेशनल कोच हैं, तो राजीव तोमर भी करीब छह साल से नेशनल कोच हैं और यह दोनों देश के लिए मेडल जीतने को पहलवानों को दांवपेच सिखा रहे हैैं।

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Tokyo Olympics: Coach Jagmendra and Rajeev fulfilled their dream of medals by teaching tricks to Ravi Dahiya
कोच जगमेंद्र (बाएं) और राजीव तोमर (दाए) के साथ भारतीय पहलवान रवि दहिया। - फोटो : Amar Ujala Meerut

विस्तार

टोक्यो ओलंपिक में कुश्ती के फाइनल में पहुंचकर देश के लिए रजत पदक दिलाने वाले रवि दहिया ने जहां खुद खूब मेहनत की। वहीं रवि की इस जीत में मुजफ्फरनगर के रहने वाले चीफ कोच जगमेंद्र सिंह व बागपत के रहने वाले कोच राजीव तोमर का योगदान भी कम नहीं है। ओलंपिक में पहलवानों के साथ गए दोनों कोच खुद ओलंपियन रह चुके हैं और ओलंपिक के उस अनुभव के साथ ही पहलवानों को पदक जीतने के लिए हर बेहतर दांवपेच सिखाया है।
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ओलंपिक तक पहुंचने के बाद भी कोच जगमेंद्र सिंह व राजीव तोमर का पदक जीतने का जो सपना अधूरा रह गया था, उसे अब रवि को दांवपेच सिखाकर उन्होंने पूरा किया है। पहलवान रवि दहिया खुद भी मानते हैं कि ओलंपिक से ठीक पहले कोच ने जहां उसको दांवपेच सिखाए हैं, वहीं उनको मानसिक रूप से मजबूत भी किया है, जो उसे फाइनल तक पहुंचने में मददगार रहे।
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मुजफ्फरनगर के रहने वाले जगमेंद्र सिंह ने वर्ष 1984 के ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, वहीं बागपत के मलकपुर गांव के रहने वाले राजीव तोमर वर्ष 2008 में बीजिंग ओलंपिक में देश के लिए खेलने उतरे थे। यह दोनों ही देश के लिए मेडल जीतने का सपना लेकर खेलने गए थे, लेकिन उनका वह सपना अधूरा रह गया था। जिसके बाद दोनों ने देश को ओलंपिक में मेडल दिलाने का सपना पूरा करने के लिए कोच बनकर पहलवानों को दांवपेच सिखाने शुरू किए।
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जगमेंद्र सिंह वर्ष 2004 से नेशनल कोच हैं, तो राजीव तोमर भी करीब छह साल से नेशनल कोच हैं और यह दोनों देश के लिए मेडल जीतने को पहलवानों को दांवपेच सिखा रहे हैं। इनका अधूरा सपना अब लंबे समय बाद पहलवान रवि दहिया ने 57 किलो के फाइनल में जगह बनाकर देश कको रजत पदक दिलाकर करके पूरा किया है।
 
कोच ने प्रैक्टिस कराई तो मानसिक रूप से मजबूत बनाया: रवि दहिया
कुश्ती के फाइनल में पहुंचकर पहलवान रवि दहिया ने देश को रजत पदक दिलाया है। लेकिन रवि दहिया ने फोन पर हुई बातचीत में कहा कि उनकी इस जीत में कोच का उतना ही सहयोग है, जितना उसके परिवार व अखाड़े के कोच का सहयोग है।

रवि के अनुसार ओलंपिक से पहले रूस में लगे कैंप में कोच जगमेंद्र व राजीव तोमर ने उसकी सभी कमजोरियों को दूर कराया तो उसे मानसिक रूप से मजबूत भी बनाया। उसे समझाया गया कि जिन देशों के पहलवानों से उसे लड़ना है, उन देशों के पहलवानों को वह पहले हरा चुका है। इसलिए उसकी जगह विपक्षी पहलवानों पर मानसिक रूप से दबाव रहेगा और वह खुलकर अपना खेल खेले।  

देश को मेडल दिलवाने का सपना लेकर आए थे टोक्यो: राजीव तोमर
भारतीय कुश्ती टीम के ओलंपिक में कोच राजीव तोमर ने कहा कि वह खुद भी ओलंपिक खेल चुके हैं, लेकिन देश को मेडल दिलाने का सपना पूरा नहीं हो सका था। वह सपना अब पहलवान रवि दहिया के सहारे पूरा हो रहा है।

हमें उम्मीद थी कि हमारी ट्रेनिंग खराब नहीं जाएगी और पहलवान देश के लिए मेडल जीतेंगे। अभी केवल रवि ने पदक जीत है, अभी बजरंग पूनिया भी पदक के बड़े दावेदार हैं। वह भी देश के लिए मेडल जीतेगा।

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