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तब्लीगी जमात को सुलझाने के लिए 23 जनवरी को पाक-बांग्लादेश के उलमा पहुंचेंगे भारत

Tue, 22 Jan 2019 12:55 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवबंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवबंद Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 22 Jan 2019 12:55 AM IST
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To solve Tablighi Jamat Pak-Bangladesh ulama will reach indian on January 23
darul uloom - फोटो : फाइल फोटो

तब्लीगी जमात को लेकर देश में चल रहे विवाद की गूंज दूसरे मुल्कों तक पहुंच गई है। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और बांग्लादेश के उलमा इसको लेकर कितना फिक्रमंद हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दोनों मुल्कों के प्रमुख उलमा विवाद का निपटारा कराने के लिए 23 जनवरी को भारत पहुंचेंगे। 

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दो गुटों में बंटे हजरत निजामुद्दीन में स्थित तब्लीगी जमात के मरकज और इसके अमीर मौलाना साद कांधलवी को लेकर चल रहे विवाद की गूंज पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान
में पहुंची तो वहां के उलमा इसको लेकर फिक्रमंद हो उठे। कुछ दिनों पूर्व दारुल उलूम कराची में उलमा की बैठक भी हुई थी। जिसमें विवाद को समाप्त कराने के लिए कई
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महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। 

तब्लीगी जमात के बढ़ते विवाद और दारुल उलूम के सख्त रुख को देखते हुए इस विवाद को खत्म कराने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश के उलमा इतना गंभीर हो गए हैं कि उन्होंने भारत आकर विवाद को समाप्त कराने का मन बना लिया। 23 जनवरी को दोनों मुल्कों के उलमा भारत पहुंचेंगे। जो दारुल उलूम देवबंद और दिल्ली में जमात के मरकज में पहुंचकर उलमा से वार्ता करेंगे। विदेशी उलमा के भारत आने की पुष्टि दारुल उलूम के एक पदाधिकारी ने की है। हालांकि अधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है। 
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बता दें कि तब्लीगी जमात के मरकज और इसके अमीर मौलाना साद कांधलवी को लेकर देश के अंदर पिछले करीब छह वर्षों से विवाद चल रहा है। 18 मार्च 2014 को तब्लीगी जमात के अमीर मौलाना जुबैर के इंतकाल के बाद इस विवाद की शुरुआत हो गई थी। क्योंकि मौलाना साद ने बिना मैनेजमेंट की अनुमति खुद को जमात का अमीर घोषित कर दिया था। इसको लेकर पूरे देश के अंदर जमात के दो गुट बने हुए हैं। लेकिन इसको बढ़ावा उस समय मिला जब मौलाना साद कांधलवी पर आरोप लगे कि वह आयोजित होने वाले इजतमा में दीन इस्लाम की गलत व्याख्या कर रहे हैं। इसको लेकर दारुल उलूम में लोग शिकायतें लेकर पहुंचने लगे। जिसके चलते दारुल उलूम की ओर से मौलाना साद को समझाने का प्रयास भी किया गया। लेकिन वह नहीं माने। जिसके बाद दारुल उलूम ने बयान जारी कर कहा था कि मौलाना साद भरोसे के लायक नहीं है। इतना ही नहीं पिछले दिनों दारुल उलूम ने एक अन्य बयान जारी कर तब्लीगी जमात के दोनों गुटों से किसी भी प्रकार का ताल्लुक होने से इंकार करते हुए संस्था के भीतर जमात की गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी थी। यही नहीं जमात के दो गुटों में बंटे होने के कारण पिछले वर्ष बांग्लादेश में मौलाना साद के कार्यक्रम में दूसरे गुट के लोगों ने खासा हंगामा भी कर दिया था।

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