यूपी उपचुनाव: मनीष चौहान को भाजपा प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा से गर्माया सियासी माहौल
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सहारनपुर में गंगोह उपचुनाव में एमएलसी वीरेंद्र सिंह के बेटे मनीष चौहान को भाजपा प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा से सियासी माहौल गर्मा गया। सोमवार को दिन भर इसके मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल होते रहें। हालांकि अभी भाजपा ने प्रत्याशी की अधिकृत घोषणा नहीं की है।
गंगोह विस सीट पर भाजपा ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन सोमवार को एमएलसी वीरेंद्र सिंह के बेटे मनीष चौहान के नाम का शोर मचता रहा। पार्टी नेता भी एक दूसरे को फोन करते रहे। दरअसल, मई में हुए लोस चुनाव में पार्टी हाईकमान द्वारा टिकट की मजबूत दावेदार मानी जा रहीं मृगांका सिंह की बजाय गंगोह विधायक काटकर प्रदीप चौधरी को दिया था। इसके बाद मृगांका सिंह समर्थक गुर्जर वोटर नाराज हो गए थे। मृगांका सिंह के यहां उन्होंने पंचायत की थी। गुर्जर वोटरों की नाराजगी देख भाजपा हाईकमान कांधला क्षेत्र के गुर्जर नेता और सपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह को भाजपा में लाई थी और चुनाव में काफी सक्रिय रहे थे। अब चर्चा है कि पार्टी गंगोह विस सीट पर वीरेंद्र सिंह या उनके बेटे मनीष चौहान को पार्टी प्रत्याशी बना सकती है।
पार्टी हाईकमान के निर्णय का स्वागत करेंगे
इस संबंध में फोन पर मनीष चौहान ने बताया कि वे और उनके पिता लखनऊ में हैं। उन्होंने कहा कि टिकट के बारे में सोशल साइट्स पर उनका नाम चल रहा है, लेकिन इस संबंध में पार्टी स्तर से अभी कोई अधिकृत जानकारी नहीं मिली है। पार्टी हाईकमान जो निर्णय लेगी वह उसका स्वागत करेंगे।
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पिता से सीखे राजनीति के गुर
मनीष चौहान का परिवार पहले ही राजनीति में रहा है। उनके पिता वीरेंद्र सिंह छह बार कांधला विस सीट से विधायक रह चुके हैं। उनकी मजबूत राजनीति के चलते मनीष ने मुजफ्फरनगर के डीएवी कालेज में छात्र राजनीति की। 2010 में जिला पंचायत सदस्य चुने गए।
इसके बाद शामली अलग जिला बनने के बाद 2013 में वह जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए। उन्होंने चुनाव में बसपा के बिजेंद्र मलिक को हराया था। 2015 में भी मनीष चौहान ने जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ा। उन्होंने नाहिद हसन की बहन इकरा हसन को चुनाव हराया। 2017 के विस चुनाव में वह सपा के टिकट पर शामली विस सीट से चुनाव लड़े, लेकिन वह तीसरे स्थान पर रहे। 2019 में लोस चुनाव से पहले उनके पिता और मनीष दोनों भाजपा में शामिल हो गए थे।
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