मेरठ के हस्तिनापुर में पांडव टीले से मिले दो हजार साल पुराने मृदभांड
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महाभारत कालीन नगरी में स्थित पांडव टीले को वर्तमान में उल्टा खेड़ा नाम से भी जाना जाता है। नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती ने बताया कि लगातार बारिश से मिट्टी का कटान हो रहा है। जिसके चलते सोमवार को टीेले पर तीन पॉट (मृदभांड) भूमि के ऊपर पड़े मिले। वहीं, इनके पास प्राचीन दीवार के अवेशष भी मिले हैं।
बताया कि इन तीनों बर्तनों के मुंह को नीचे की ओर करके एक दीवार के सहारे रखा गया था। बताया कि कुछ कच्चे बर्तन भी मौके से मिले हैं। शायद यह रसोई का हिस्सा हो। बताया कि इन बर्तनों की तली नहीं है। वहीं, इसी स्थल से 20 मी. दक्षिण में जमीन में धसे हुए छह मिट्टी के कटोरे जैसी आकृति भी मिली हैं। जिनके मुंह की ओर रेत व चिकनी मिट्टी मिली। यह पूर्ण रूप से भट्टी में पके हुए हैं।
बताया कि यह सब महल की चार दीवारी के अंदर स्थित है। असि. प्रो. प्रियंक के मुताबिक सभी पॉट का व्यास 10-11 सेमी. और लंबाई 18 से 20 सेमी. की है। मिले तथ्यों के अनुसार यह कुषाण काल के प्रतीत होते है जो कि आज से लगभग 2000 साल प्राचीन है।
पहले स्थान से मिले पॉट कच्चे जबकि दूसरे स्थान के पके हुए हैं। बताया कि सभी मृतभांडों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के हस्तिनापुर में नियुक्त कर्मचारी अरविंद राणा के सुपुर्द कर दिए गया है। अरविंद राणा के मुताबिक पूरे मामले की जानकारी से विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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