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जन औषधि केंद्रों की सच्चाई, नहीं हैं पूरी दवाई

Tue, 19 Mar 2019 03:31 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Tue, 19 Mar 2019 03:31 AM IST
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The truth of public drug centers, not the whole medicine
मेरठ - फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों को लेकर किए गए दवाओं के दावे और हकीकत में खासा फर्क है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में खुले जन औषधि केंद्रों के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर लगे हैं, जिन पर लिखा है कि यहां 600 तरह की दवाइयां और 154 तरह के सर्जिकल आइटम बेहद सस्ते दामों पर मिलते हैं। इन दोनों जन औषधि केंद्रों पर जाकर पड़ताल की गई, तो पता चला कि यह दावा गलत है। सच्चाई यह है कि अभी तक महज 250 तरह की दवाइयां ही उपलब्ध हैं। दावा 154 सर्जिकल आइटम का है, मगर सिर्फ चार से पांच प्रकार के उपलब्ध हैं।
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यह हालात तब हैं, जब जिला अस्पताल में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खुले हुए करीब आठ माह हो गए हैं। मेडिकल में तीन माह का समय हो गया है। दवाओं की किल्लत की वजह से ही जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र शुरू होने के एक माह बाद ही कुछ दिन के लिए बंद करना पड़ा था। इस संबंध में जन औषधि केंद्र संचालक शासन को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन हल नहीं निकल सका है। जिला अस्पताल में लिखी गईं दवाइयां जन औषधि केंद्र पर नहीं मिल रही हैं। इस कारण लोगों को सस्ती दवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं मेडिकल कॉलेज में जन औषधि केंद्र से जुड़े स्टाफ का कहना है कि चिकित्सक मरीजों को बाहर की दवाएं लिखते हैं, जबकि जन औषधि केंद्र की दवाइयां उनके मुकाबले सस्ती हैं।
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जेनेरिक दवाइयां
एक ही सॉल्ट की दवाइयों के दाम कंपनी या ब्रांड के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। जिस सॉल्ट की दवा 100 रुपये की मिलती है, किसी दूसरी कंपनी में वही दवा 20 रुपये की भी मिल सकती है। किसी भी दवा का जेनेरिक नाम पूरे विश्व में एक ही होता है। बीमारी के लिए डॉक्टर जो दवा लिखते हैं, उसी दवा के सॉल्ट वाली जेनेरिक दवाएं जन औषधि केंद्र पर मिल सकती हैं, बशर्ते वे उपलब्ध हों। ये जेनेरिक दवाएं उत्पादक से सीधे रिटेलर तक पहुंचती हैं। कीमत का यह अंतर पांच से दस गुना तक हो सकता है।
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दवाइयां बढ़ाने की कोशिश
अभी जन औषधि केंद्रों पर 250-300 तरह की दवाइयां हैं। सर्जिकल आइटम कम हैं। कोशिश की जा रही है कि ज्यादा से ज्यादा दवाइयां केंद्रों को मिल सकें।
- गौतम कपूर, नोडल अधिकारी, जन औषधि केंद्र

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