बिजनौर: आपसी संघर्ष में बाघिन की मौत, जांच के लिए बरेली भेजा शव का बिसरा
बिजनौर में कार्बेट नेशनल पार्क के कालागढ़ उपखंड रेंज झिरना में दो बाघों के संघर्ष में एक बाघिन की मौत हो गई। बाघिन के शव का बिसरा आरबीआई बरेली व खाल का टुकड़ा डीएनए जांच के लिए देहरादून के भारतीय वन्य जीव संस्थान भेजा जा रहा है। निदेशक राहुल के अनुसार, बाघिन की मौत वन्य जीवन की सामान्य घटना है।
शुक्रवार सुबह गश्ती दलों ने कार्बेट नेशनल पार्क कालागढ़ उपखंड की झिरना रेंज के स्रोत कक्ष संख्या आठ में बाघिन का शव पड़ा होने की जानकारी वन अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही मौके पर कार्बेट पार्क की उपनिदेशक कल्याणी नेगी, उप प्रभागीय वनाधिकारी कुंदन सिंह खाती, रेंज अधिकारी प्रशांत हिदवान पहुंच गए। अधिकारियों ने बाघिन की मौत को दो बाघों के आपसी संघर्ष का परिणाम करार दिया है।
कालागढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी कुंदन सिंह खाती ने बताया कि बृहस्पतिवार को झिरना वन विश्रामगृह के निकट पहाड़ी पर एक घायल बाघिन को देखा गया था। देखकर लगता था कि वह भूखी है। इसलिए उसके पास बकरे का मीट रखा गया। उसने उसे नहीं खाया। शाम को मुर्गे का मांस रखा गया। बाघिन ने उसे भी नहीं खाया था।
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मौके पर कार्बेट पार्क के पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत शर्मा व डॉ. आयुष उनियाल की टीम भी पहुंच गई। चिकित्सकों के अनुसार बाघिन की आयु लगभग नौ वर्ष रही होगी। उसके शरीर पर चोट व खरोंच के निशान मिले हैं। जिससे लगता है कि उसका किसी अन्य बाघ से संघर्ष हुआ है। जिसमें वह जख्मी हुई है। उसके घाव में कीड़े पड़े हैं। संघर्ष लगभग चार दिन पुराना लगता है। पोस्टमार्टम कर उसके शव को वन अधिनियमों के अनुसार जला दिया गया।
बाघ की निगरानी शुरू
कार्बेट नेशनल पार्क के निदेशक राहुल के अनुसार बाघिन की मौत के बाद अब वन विभाग ने दूसरे बाघ की निगरानी शुरू कर दी है। उसे भी कोई चोट लगी होने से उसके जीवन को भी खतरा हो सकता है। गश्ती दलों को सतर्क कर दिया गया है।
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