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प्रधानमंत्री के 'मन की बात' कार्यक्रम में छाए मेरठ के मूक योद्धा, पीएम मोदी ने लिया इनका नाम
Mon, 31 Aug 2020 03:12 PM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2020 03:12 PM IST
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पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम में मेरठ के मूक योद्धा (सेना के श्वान) छाए रहे। इनमें प्रधानमंत्री ने कई श्वानों की बहादुरी के बारे में बात की, जिनको मेरठ के आरवीसी सेंटर एंड कॉलेज में प्रशिक्षित किया गया था। यहां तैयार किए गए सेना के तमाम श्वान जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की खोजबीन से लेकर सरहद की रखवाली तक का जिम्मा संभाल रहे हैं। प्रधानमंत्री नेे देश की सुरक्षा में इनकी भूमिका के बारे में बताया। साथ ही लोगों से ये भी कहा कि अगर वह कुत्ते पालने की सोचें तो भारतीय नस्ल के मुधोल हाउंड, हिमाचली हाउंड, राजपलायम, कन्नी और चिप्पीपराई जैसे बहादुर कुत्तों को लाएं।
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मेरठ के आरवीसी ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षित किए गए ये श्वान 30 फीट बर्फ में दबे हुए सेना के जवानों को भी खोजने की क्षमता रखते हैं। चीते जैसी फुर्ती वाले इस वक्त देश में 1000 से ज्यादा प्रशिक्षित श्वान हैं। जमीन के भीतर कई फीट नीचे बिछे विस्फोटक को ये चंद सेकेंडों में सूंघ लेते हैं। आरवीसी में पहले जर्मन शेफर्ड, लेब्राडोर जैसी नस्लों को प्रशिक्षित किया जाता था। अब भारतीय नस्ल के देशी श्वान मुधोल को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। छह से नौ माह उम्र के श्वान को कठोर प्रशिक्षण दिया जाता है। इनकी दिनचर्या सुबह चार बजे से शुरू हो जाती है। जिसमें व्यायाम, खाना-पीना और एक गहन प्रशिक्षण शामिल होता है। उन्हें संदिग्ध चीजों की पहचान कराने के लिए टॉय-गन, टॉय-रोबोट, बॉल्स व डॉल्स आदि का प्रयोग किया जाता है। उनके प्रशिक्षण सेंटर में स्पेशल थिएटर भी होता है। यहां उन्हें चीजों को समझाने के लिए कार्टून फिल्में भी दिखाई जाती हैं। स्पेशल ट्रेनिंग के बाद उनकी परीक्षा होती है। जो इसमें फेल हो जाते हैं, उनको दोबारा कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
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प्रधानमंत्री ने इनका लिया नाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 15 अगस्त को पता चला कि आर्मी के दो जांबाज श्वान सोफी और विदा को चीफ ऑफ आर्मी के स्टाफ कमेंडेशन से सम्मानित किया गया है। इन्होंने देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। हमारी सेनाओं में हमारे सुरक्षा बलों के पास ऐसे कितने ही बहादुर स्वान हैं, जो देश के लिए जीते हैं, देश के लिए मरते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले पूरे देश की सुुरक्षा में इनकी भूमिका के बारे में सुनने को मिला। एक श्वान बलराम ने 2006 में अमरनाथ यात्रा के रास्ते में गोला बारूद पकड़ा। 2002 में श्वान भावना ने विस्फोटक ढूंढ निकाला, इसमें वह शहीद हो गई।
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शहीद श्वानों की लंबी सूची
आरवीसी में जन्मे, प्रशिक्षित हुए और सीमाओं पर शहीद सेना के श्वानों की सूची बहुत लंबी है। इनकी याद में भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने डॉग मेमोरियल बनाया हुआ है। ऑपरेशनों में सेवाएं देने वाली दीप्ति, बिंबो, चेबल्स, हेमा, हरिता, बवारी, बिट्टू, बैंडी, बेकर, डच आदि के नाम के पत्थर इस मेमोरियल में लगाए गए हैं। अगस्त 2015 में जम्मू-कश्मीर में एक ऑपरेशन में श्वान मानसी ने आतंकियों के छिपने का स्थान ढूंढकर सेना की मदद की, लेकिन हमले में वो शहीद हो गई। उसकी याद में आरवीसी में डॉग ट्रेनिंग फैकल्टी के मुख्य गेट का नाम मानसी द्वार रखा।
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