इस शहर का कबाब कभी भूलकर भी मत खा लेना, क्योंकि यहां के कबाब की सच्चाई जानकर आप चौंक जाएंगे। आप तस्वीरों में साफ देख सकते हैं कि क्या हाल है इस शहर का। कमेला रोड के पास कुछ दिनों पहले झुग्गी झोपड़ियों में मृत पशुओं का कटान देख अधिकारियों को होश उड़ गए थे। इससे भी ज्यादा अफसोस तो तब हुआ जब अधिकारियों को यह पता चला कि शहर में बिक रहा कबाब इसी से बनाया जाता है। पुलिस अधिकारियों ने आरोपी को पकड़ लिया था। लेकिन सवाल है कि शहर में अभी भी कई जगहों पर इस तरह का धंधा चल रहा है।
लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में कमेला रोड से सटे नाले पर कंजर वाले पुल के पास पिछले कुछ दिनों से दूसरे समुदाय के लोग लगातार पुलिस से शिकायत कर रहे थे। इनका कहना था कि झुग्गी झोपड़ियों में कुछ लोग अवैध तरीके से पशुओं का कटान कर रहे हैं। सूचना मिलने पर अधिकारी पहुंचे तो वहां भारी संख्या में पशुओं के अवशेष थे। मौके से दो महिला समेत दस लोग फरार हो गए।
इसके बाद जमकर हंगामा हुआ और एएसपी कोतवाली रणविजय सिंह वहां पहुंच गये। उन्होंने भीड़ को शांत कराया। एएसपी के अनुसार झोपड़ी से करीब 150-200 पशुओं के अवशेष मिले थे। जिनके पशु चिकित्सक बुलाकर सैंपल भरवाने के बाद जमीन में दबवा दिया गया। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि कई माह से दिल्ली रोड और शहर के बड़े होटलों में मृत पशुओं का कबाब के लिए मीट सप्लाई कर रहे थे। इसमें वह गोवंश का भी कटान करते थे।
सीओ कोतवाली के सामने भड़की भीड़ ने लिसाड़ी गेट पुलिस की मिलीभगत से अवैध कटान का आरोप लगाकर एसओ के खिलाफ नारेबाजी कर दी। समझाने की कोशिश पर भीड़ ने सीओ से कहा कि एक माह से लगातार पुलिस से शिकायत करने के बावजूद लोगों को टरका दिया जाता था।
आरोप लगाया कि एसओ लिसाड़ी गेट की मिलीभगत से यहां के लोगों का जीना दुश्वार हो रहा है। सीओ ने कहा मामले में जांच करा रहे हैं। इससे दूसरे लोगों को भी सबक मिलेगा। वे भी इस तरह का काम करने से बचेंगे। पड़ोस में रहने वाले सलीम, जावेद, चांद मोहम्मद, मोहम्मद इरफान आदि ने सीओ को बताया कि रात को आसपास के लोगों के सो जाने पर आरोपी छोटे पशुओं के अलावा भैंस, भैंसा लाते थे। इनमें एक आरोपी पर मृत पशुओं का ठेका भी बताया गया।