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ऋषियों ने आत्म साधना से दिखाया ईश्वर प्राप्ति का मार्ग : सेठी
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आर्य समाज का कार्यक्रम।
- फोटो : meerut
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर में रविवारीय सत्संग में उपनिषदों का संदेश विषय पर प्रवचन हुआ। प्रधान राजेश सेठी ने कहा कि हमारे धर्म ग्रंथ में वेद, ब्राह्मण और उपनिषद का प्रमुख स्थान है। वेदों में समस्त मानव उपयोगी लौकिक और पारलौकिक ज्ञान है। उपनिषद में ऋषियों ने आत्म साधना से ईश्वर प्राप्ति का मार्ग दिखाया है।
राजेश सेठी ने कहा कि उपनिषद वैदिक ऋषियों का अनुभूत ज्ञान है। वैसे तो अनेक उपनिषद हैं। शंकराचार्य ने 10 उपनिषदों को ही प्रमाणित मानते हुए इनका भाष्य किया। महर्षि स्वामी दयानंद ने भी 11 उपनिषदों को प्रमाणित बताया। इनमें सर्वप्रथम ईशोपनिषद यजुर्वेद का 40वां अध्याय है। समस्त उपनिषद ज्ञान का सार और आधार हैं। अन्य उपनिषदों में भी इसे आधार मानते हुए इसका विस्तृत आख्यान किया गया है। ईशोपनिषद में ईश्वर को सर्वव्यापक माना गया। उसकी सत्ता का अनुभव करते हुए निर्लेप भाव से कर्म करने का संदेश दिया गया है।
राजेश सेठी ने बताया कि कठोपनिषद में आत्मा की अमरता का वर्णन किया गया। इसमें परमात्मा को ही परम लक्ष्य बताया गया। हमें आत्मा के उत्थान के लिए निरंतर ज्ञान अर्जन करना चाहिए। सदैव उसे परम सत्ता को जानने का प्रयास करना चाहिए। परमात्मा के निज नाम ओम का स्मरण करते हुए उससे आत्मबल, शक्ति प्राप्त कर लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। उपनिषद हमें परम सत्य से जोड़ते हैं। ऋषियों ने ज्ञान तप, त्याग और समाधि अवस्था में प्राप्त किया।
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कार्यक्रम में प्रीति सेठी, चांद ग्रोवर, सुनीता, सुमन आनंद, सुभाष मल्होत्रा, धर्मवीर सिंह सहित अन्य ने सुंदर भजन प्रस्तुत किए। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान उदित चांदना, कमलेश चांदना, नंद चांदना और विदिशा जिंदल रहीं। इस अवसर पर आनंद वर्धन झा, करुणा सागर बाली, धर्मवीर, मुकेश, कृष्ण कुमार वर्मा, राकेश ओबराय, विजय बंसल, लोकेंद्र सिंह रहे।
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राजेश सेठी ने कहा कि उपनिषद वैदिक ऋषियों का अनुभूत ज्ञान है। वैसे तो अनेक उपनिषद हैं। शंकराचार्य ने 10 उपनिषदों को ही प्रमाणित मानते हुए इनका भाष्य किया। महर्षि स्वामी दयानंद ने भी 11 उपनिषदों को प्रमाणित बताया। इनमें सर्वप्रथम ईशोपनिषद यजुर्वेद का 40वां अध्याय है। समस्त उपनिषद ज्ञान का सार और आधार हैं। अन्य उपनिषदों में भी इसे आधार मानते हुए इसका विस्तृत आख्यान किया गया है। ईशोपनिषद में ईश्वर को सर्वव्यापक माना गया। उसकी सत्ता का अनुभव करते हुए निर्लेप भाव से कर्म करने का संदेश दिया गया है।
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राजेश सेठी ने बताया कि कठोपनिषद में आत्मा की अमरता का वर्णन किया गया। इसमें परमात्मा को ही परम लक्ष्य बताया गया। हमें आत्मा के उत्थान के लिए निरंतर ज्ञान अर्जन करना चाहिए। सदैव उसे परम सत्ता को जानने का प्रयास करना चाहिए। परमात्मा के निज नाम ओम का स्मरण करते हुए उससे आत्मबल, शक्ति प्राप्त कर लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। उपनिषद हमें परम सत्य से जोड़ते हैं। ऋषियों ने ज्ञान तप, त्याग और समाधि अवस्था में प्राप्त किया।
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कार्यक्रम में प्रीति सेठी, चांद ग्रोवर, सुनीता, सुमन आनंद, सुभाष मल्होत्रा, धर्मवीर सिंह सहित अन्य ने सुंदर भजन प्रस्तुत किए। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान उदित चांदना, कमलेश चांदना, नंद चांदना और विदिशा जिंदल रहीं। इस अवसर पर आनंद वर्धन झा, करुणा सागर बाली, धर्मवीर, मुकेश, कृष्ण कुमार वर्मा, राकेश ओबराय, विजय बंसल, लोकेंद्र सिंह रहे।