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Meerut News: डेयरी पशुओं में लगातार बढ़ रहा थिलेरिओसिस का खतरा
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मोदीपुरम - पशु चिकित्सा शिविर में पशु पालकों को जानकारी देते चिकित्सक।
- बाह्य परजीवी जनित घातक रोग में तेज बुखार, लसीका ग्रंथियों में सूजन की आती है समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
मोदीपुरम। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में डेयरी पशुओं पर थिलेरिओसिस रोग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। यह बाह्य परजीवी जनित घातक रोग है। इसमें पशुओं को तेज बुखार, लसीका ग्रंथियों में सूजन, खून की कमी, भूख न लगना और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। जांच में हर दूसरे पशु में संक्रमण मिलने से डेयरी सेक्टर के लिए गंभीर चेतावनी सामने आई है।
यह जानकारी सोमवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय व पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में माछरा ब्लॉक के गांव एत्मादपुर में आयोजित विशेष पशु बांझपन उपचार शिविर में दी गई। कार्यक्रम का मार्गदर्शन विवि के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पवित्रजीत सिंह ने किया। शिविर के माध्यम से पशुओं में रोगों की पहचान, उपचार, कृमिनाशन, बांझपन निवारण और स्वास्थ्य परामर्श देकर पशुधन की उत्पादकता बढ़ाई जा रही है।
प्रो. अमित वर्मा ने बताया कि विभिन्न शिविरों में जांच किए गए 1023 पशुओं में से करीब 50 प्रतिशत थिलेरिओसिस से संक्रमित पाए गए हैं। इससे दुग्ध उत्पादन में 30 से 70 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर पशु की मौत भी हो सकती है। उन्होंने पशुपालकों से जूं व किलनी नियंत्रण, नियमित जांच और शुरुआती लक्षण दिखते ही पशु चिकित्सक से संपर्क करने की अपील की। शिविर में डॉ. अफरोज, डॉ. तरुण कुमार, डॉ. शुभमदीप, डॉ. आशुतोष राय, डॉ. इशीता, डॉ. विकास यादव की टीम ने 87 पशुओं की जांच कर निशुल्क दवाएं वितरित कीं। शिविर में डॉ. अमरदीप, रिंकू आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोदीपुरम। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में डेयरी पशुओं पर थिलेरिओसिस रोग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। यह बाह्य परजीवी जनित घातक रोग है। इसमें पशुओं को तेज बुखार, लसीका ग्रंथियों में सूजन, खून की कमी, भूख न लगना और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। जांच में हर दूसरे पशु में संक्रमण मिलने से डेयरी सेक्टर के लिए गंभीर चेतावनी सामने आई है।
यह जानकारी सोमवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय व पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में माछरा ब्लॉक के गांव एत्मादपुर में आयोजित विशेष पशु बांझपन उपचार शिविर में दी गई। कार्यक्रम का मार्गदर्शन विवि के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पवित्रजीत सिंह ने किया। शिविर के माध्यम से पशुओं में रोगों की पहचान, उपचार, कृमिनाशन, बांझपन निवारण और स्वास्थ्य परामर्श देकर पशुधन की उत्पादकता बढ़ाई जा रही है।
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प्रो. अमित वर्मा ने बताया कि विभिन्न शिविरों में जांच किए गए 1023 पशुओं में से करीब 50 प्रतिशत थिलेरिओसिस से संक्रमित पाए गए हैं। इससे दुग्ध उत्पादन में 30 से 70 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर पशु की मौत भी हो सकती है। उन्होंने पशुपालकों से जूं व किलनी नियंत्रण, नियमित जांच और शुरुआती लक्षण दिखते ही पशु चिकित्सक से संपर्क करने की अपील की। शिविर में डॉ. अफरोज, डॉ. तरुण कुमार, डॉ. शुभमदीप, डॉ. आशुतोष राय, डॉ. इशीता, डॉ. विकास यादव की टीम ने 87 पशुओं की जांच कर निशुल्क दवाएं वितरित कीं। शिविर में डॉ. अमरदीप, रिंकू आदि मौजूद रहे।
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