दिवाली पर आतिशबाजी के धुएं ने हवा में घोला जहर, सांस लेने में दिक्कत, शहर की स्थिति बेहद गंभीर
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दिवाली के मौके पर मुजफ्फरनगर जिले में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा हुआ है। आतिशबाजी के धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी महसूस हुई। जनपद में एयर क्वालिटी इंडेक्स सामान्य से खराब स्तर (200 से 300 के बीच) पर रिकॉर्ड किया गया।
एनसीआर में शामिल मुजफ्फरनगर वायु प्रदूषण के मामले में आगे रहता है। उद्योगों से निकलने वाला धुआं तो वायु मंडल में जहर घोल ही रहा है लेकिन दिवाली पर प्रदूषण के स्तर में और ज्यादा बढ़ोतरी हो गई। आतिशबाजी का इतना जहर घुला कि मुजफ्फरनगर जिले की हवा प्रदूषित हो गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक सोमवार को जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 से 300 के बीच रहा है। यह सामान्य से खराब स्तर है। भोपा रोड पर प्रदूषण को कम करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पानी का भी छिड़काव कराया।
उधर, रविवार को दिवाली पर भारी आतिशबाजी के चलते श्वांस के रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक डीसी पांडेय का कहना है कि वायु प्रदूषण मापने के लिए यंत्र भोपा रोड स्थित एसडी कॉलेज पर लगा हुआ है। यंत्र में खराबी आ गई। इसके चलते मैनुअल जांच कराई गई। यंत्र खराब होने की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।
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खराब हुई मशीन, 428 तक बताया एक्यूआई
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल की अधिकारिक वेबसाइट और समीर एप पर जनपद में एयर क्वालिटी इंडेक्स 428 तक दर्शाया गया। यह प्रदूषण का बेहद खतरनाक स्तर होता है। देश के किसी भी शहर का एक्यूआई इतना ज्यादा नहीं है। इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि भोपा रोड पर एसडी कॉलेज में लगी वायु प्रदूषण मापने वाली मशीन खराब हो गई है। इसके चलते ऑनलाइन हाई रीडिंग दिख रही है। इस संबंध में कंट्रोल बोर्ड को सूचना दे दी गई है। मशीन को ठीक कराया जाएगा। फिलहाल वायु प्रदूषण का स्तर मापने के लिए रेलवे रोड कमल सिनेमा के पास और सदर तहसील के पास मैनुअल जांच की गई। जिसमें एयर क्वालिटी इंडेक्स सामान्य से खराब पाया गया।
नगर में प्रदूषण की स्थिति
पार्टिकल्स (माइक्रोग्राम/घन मीटर) कमल सिनेमा --- तहसील सदर
एसओ2 12.6 13.4
एनओ2 38.7 40.2
पीएम-10 149.3 196.6
पीएम2.5 76.3 86.2
नोट: हवा में एसओ2 और एनओ2 का मानक 80-80, पीएम10 का मानक 100 और पीएम2.5 का मानक 60 होता है।
हानिकारक वायु प्रदूषण का बढ़ना
वायु प्रदूषण वृद्धों, बच्चों एवं बीमारों को तेजी से प्रभावित करता है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉक्टर लोकेश गुप्ता बताते हैं कि वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से दमा और एलर्जी के मरीजों को परेशानी बढ़ जाती है। पटाखों में मौजूद छोटे कण सांस के साथ शरीर में जाते हैं जो बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। इनका असर फेफड़ों पर पड़ता है। प्रदूषण आंख, नाक और गले की समस्याएं का भी कारण बन सकता है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का मानक
एक्यूआई मानक
0-50 अच्छा
50-100 संतोषजनक
101-200 मध्यम
201-300 खराब
300-400 बहुत खराब
400 से ज्यादा गंभीर
सामान्य से डेढ़ गुना तक रहा ध्वनि प्रदूषण
दिवाली पर न केवल वायु प्रदूषण बढ़ा बल्कि ध्वनि प्रदूषण की स्थिति भी गंभीर रही। नगर के तीन स्थानों पर सामान्य से डेढ़ गुना तक शोर रिकॉर्ड किया गया। रविवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ने नगर में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति की जांच की। गांधी कॉलोनी, महावीर चौक और जिला अस्पताल पर मशीनें लगाई गईं थी। रात में गांधी कॉलोनी पर ध्वनि 71.3 डेसीबल, महावीर चौक पर 72.5 डेसीबल और जिला अस्पताल पर 71.5 डेसीबल रिकॉर्ड की गई। आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 डेसीबल की ध्वनि का मानक होता है। इससे ज्यादा आवाज ध्वनि प्रदूषण के अंतर्गत आती है।
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