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बिजनौर: आसमान में फैला दिल्ली का स्मॉग, अभी कुछ दिनों तक रहेगा असर, बरतें ये सावधानी

Mon, 28 Oct 2019 07:26 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: कपिल kapil Updated Mon, 28 Oct 2019 07:26 PM IST
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Delhi's smog is spread in the sky of Bijnor district
आतिशबाजी के बाद स्मॉग का असर दिखा - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली की स्मॉग (धुंध) बिजनौर जिले में भी छाने लगी है। धूंध के कारण दिनभर ऐसा वातावरण रहा जैसे बादल छाए हों। दीपावली पर आतिशबाजी के कारण स्मॉग का असर दिखा। जानकारों के अनुसार अभी जिले में कुछ और दिन स्मॉग रहने की बात कही जा रही है।

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दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में इस समय स्मॉग से बुरा हाल है। प्रदूषण से हवा में हर समय धूल और धुएं के कण उड़ते रहते हैं। वहां धरती के पास के वातावरण को साफ करने के लिए पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है। दिल्ली का स्मॉग हवा के साथ बहकर जिले के आसमान में भी छा गया है। पूरे जिले में हर कहीं आसमान में स्मॉग ही दिखाई दे रहा है। स्मॉग आने से जिले में वातावरण बहुत अजीब सा हो गया है। स्मॉग के असर से पूरे दिन सूरज की धूप भी पूरी तरह से खुलकर नीचे नहीं आ पा रही है। ऐसा लगता रहता है जैसे आसमान में हल्के बादल छाए हों। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की हवा की शुद्धता जांच की रिपोर्ट के अनुसार जिले के वायुमंडल में औसतन 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर धुएं व धूल के कण होते हैं। 26 अक्तूबर को जिले में प्रति घन मीटर वायुमंडल में धुएं व धूल के कण 88 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थे। दीपावली पर आतिशबाजी ने इसमें और इजाफा किया होगा।
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ऐसे बनता है स्मॉग
अनेक कारणों से हवा में धुएं व धूल के कण आ जाते हैं। धुएं में भी कई तरह के कण होते हैं। सर्दी की शुरुआत होने की वजह से इस समय वातावरण में नमी ज्यादा है। वातावरण की नमी को धुल के कण सोख लेते हैं। इससे कण भी थोड़े से मोटे हो जाते हैं। धुल के कणों के बार बार नमी सोखने से ये वातावरण में एक मोटी परत के रूप में जमा हो जाते हैं और धूप को नीचे आने से रोकते हैं।

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बरतें सावधानी
स्मॉग में धुल के कण के साथ साथ सल्फर डाई ऑक्साइड जैसी नुकसानदायक गैस भी होती हैं। इनके असर से पर्यावरण में ऑक्सीजन कम हो जाती है। यह गैसें सांस के जरिये शरीर में जाकर नुकसान पहुंचाती हैं और इनसे अस्थमा अटैक भी आ सकता है। सांस रोगियों को ऐसे वातावरण में घर से बाहन निकलने से परहेज करना चाहिए। साथ ही अगर स्मॉग के रहते बारिश होती है तो इससे भी हानिकारक गैस पानी के साथ नीचे आएंगी। इस बारिश में नहीं भीगना चाहिए।

ऐसे आया स्मॉग
सिद्धांत के अनुसार हवा हमेशा गर्म क्षेत्र से ठंडे क्षेत्र की ओर बहती है। दिल्ली व आसपास के क्षेत्रों के मुकाबले बिजनौर ठंडा इलाका है। सिद्धांत के अनुसार स्मॉग वाली गरम हवा वातावरण में ऊपर उठकर बहते हुए जिले में आसमान में फैल जाती है।

प्राकृतिक रूप से साफ होगा स्मॉग
धूल के कण बारिश होने से जल्दी साफ होते हैं। इसके अलावा कणों के बार-बार नमी सोखने से भारी होकर भी नीचे बैठ जाते हैं। केवल प्राकृतिक रूप से ही ये नीचे बैठते हैं।

धीरे-धीरे कम होगा स्मॉग
उत्तराखंड विज्ञान एवं औद्योगिक परिषद में शोध में कार्यरत जिले के रहने वाले मयंक मलिक के अनुसार स्मॉग का असर धीरे-धीरे अपने आप कम होगा। स्मॉग का असर ज्यादा दिनों तक नहीं रहता है। श्वास के मरीज इस समय सावधानी बरतें।

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