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Meerut News: पांडवकालीन आस्था का प्रतीक है सरधना का पांडेश्वर महादेव मंदिर
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- हस्तिनापुर से बरनावा लाक्षागृह जाते समय पांडवों ने की थी शिवलिंग की स्थापना
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। सावन माह में सरधना नगर स्थित ऐतिहासिक पांडेश्वर महादेव मंदिर शिवभक्तों की विशेष आस्था का केंद्र बन जाता है। सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि हस्तिनापुर से बरनावा स्थित लाक्षागृह जाते समय पांडवों ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया था। तभी से यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
मंदिर में वर्षभर विभिन्न धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आकर्षक सजावट की जाती है, जबकि महाशिवरात्रि और सावन में विशेष पूजन, जलाभिषेक तथा भंडारे का आयोजन किया जाता है। मंदिर परिसर में शिवलिंग के अलावा हनुमानजी, शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण, संतोषी माता, भगवान विश्वकर्मा और शनिदेव के मंदिर भी स्थापित हैं।
मंदिर के मुख्य प्रतिनिधि वीरेंद्र शास्त्री तथा समिति के पदाधिकारी नीरज जैन, महिपाल वाल्मीकि, मंगत पाल सिंह और महेशचंद गुप्ता ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर ने धर्मयुद्ध से पूर्व यहां भगवान शिव की आराधना कर विजय का आशीर्वाद मांगा था। कहा जाता है कि पांडव द्रौपदी के साथ यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना करने आते थे। इसी कारण इस मंदिर को पांडेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, हस्तिनापुर से बरनावा के लाक्षागृह की ओर जाते समय माता कुंती अपने पुत्रों के साथ इस क्षेत्र के घने जंगल में विश्राम के लिए रुकी थीं।
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सरधना। सावन माह में सरधना नगर स्थित ऐतिहासिक पांडेश्वर महादेव मंदिर शिवभक्तों की विशेष आस्था का केंद्र बन जाता है। सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि हस्तिनापुर से बरनावा स्थित लाक्षागृह जाते समय पांडवों ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया था। तभी से यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
मंदिर में वर्षभर विभिन्न धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आकर्षक सजावट की जाती है, जबकि महाशिवरात्रि और सावन में विशेष पूजन, जलाभिषेक तथा भंडारे का आयोजन किया जाता है। मंदिर परिसर में शिवलिंग के अलावा हनुमानजी, शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण, संतोषी माता, भगवान विश्वकर्मा और शनिदेव के मंदिर भी स्थापित हैं।
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मंदिर के मुख्य प्रतिनिधि वीरेंद्र शास्त्री तथा समिति के पदाधिकारी नीरज जैन, महिपाल वाल्मीकि, मंगत पाल सिंह और महेशचंद गुप्ता ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर ने धर्मयुद्ध से पूर्व यहां भगवान शिव की आराधना कर विजय का आशीर्वाद मांगा था। कहा जाता है कि पांडव द्रौपदी के साथ यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना करने आते थे। इसी कारण इस मंदिर को पांडेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, हस्तिनापुर से बरनावा के लाक्षागृह की ओर जाते समय माता कुंती अपने पुत्रों के साथ इस क्षेत्र के घने जंगल में विश्राम के लिए रुकी थीं।
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