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अधिकारियों ने ही लिखी निगम को फटका लगाने की पटकथा
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अधिकारियों ने ही लिखी निगम को फटका लगाने की पटकथा
मेरठ। शासन ने भले ही अधिकारियों को विभाग के हित में काम करने की शपथ दिलाई हो, लेकिन अधिकारी निगम को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। ऐसा ही मामला नगर निगम में सामने आया है। निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली सेे निगम को कई लाख रुपये का फटका लगने वाला है। इसकी पटकथा नगर निगम के निर्माण विभाग में लिखी जा चुकी है।
नगर निगम बोर्ड फंड के लगभग 12 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों के लिए टेंडर निकाले गए थे। जिनके तहत ठेकेदारों ने 30 से 35 प्रतिशत कम दर पर काम करने के लिए टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग किया। इस प्रक्रिया से नगर निगम को 30 से 35 लाख रुपये का फायदा होने वाला था।
मुख्य अभियंता यशवंत कुमार ने शनिवार को सभी इंजीनियरों की बैठक बुलाई। जिसमें दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया। साथ ही मात्र 15 प्रतिशत कम रेट पर ही काम देने के निर्देश दिए। इस प्रक्रिया से नगर निगम को कम से कम 15 लाख रुपये का फटका लगने वाला है। इतना ही लाभ ठेकेदारों को पहुंचाने का प्रयास है।
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मुख्य अभियंता से बात की गई तो उन्होंने विकास कार्य की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह कदम बताया। साथ ही कहा कि शासनादेश के मुताबिक, 15 प्रतिशत से कम रेट पर काम नहीं दिया जा सकता।
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मेरठ। शासन ने भले ही अधिकारियों को विभाग के हित में काम करने की शपथ दिलाई हो, लेकिन अधिकारी निगम को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। ऐसा ही मामला नगर निगम में सामने आया है। निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली सेे निगम को कई लाख रुपये का फटका लगने वाला है। इसकी पटकथा नगर निगम के निर्माण विभाग में लिखी जा चुकी है।
नगर निगम बोर्ड फंड के लगभग 12 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों के लिए टेंडर निकाले गए थे। जिनके तहत ठेकेदारों ने 30 से 35 प्रतिशत कम दर पर काम करने के लिए टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग किया। इस प्रक्रिया से नगर निगम को 30 से 35 लाख रुपये का फायदा होने वाला था।
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मुख्य अभियंता यशवंत कुमार ने शनिवार को सभी इंजीनियरों की बैठक बुलाई। जिसमें दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया। साथ ही मात्र 15 प्रतिशत कम रेट पर ही काम देने के निर्देश दिए। इस प्रक्रिया से नगर निगम को कम से कम 15 लाख रुपये का फटका लगने वाला है। इतना ही लाभ ठेकेदारों को पहुंचाने का प्रयास है।
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मुख्य अभियंता से बात की गई तो उन्होंने विकास कार्य की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह कदम बताया। साथ ही कहा कि शासनादेश के मुताबिक, 15 प्रतिशत से कम रेट पर काम नहीं दिया जा सकता।