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नई शिक्षा नीति कृषि में नए आयाम स्थापित करेगी : प्रो. केके सिंह
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मोदीपुरम (मेरठ)। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सोमवार को नई शिक्षा नीति लागू करने वाला विश्वविद्यालय बन गया है। कुलपति प्रोफेसर केके सिंह के नेतृत्व में विवि ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की छठी डीन कमेटी की सिफारिश को लागू किया है। इसके साथ ही सभी कॉलेजों में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ-2024 कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। कुलपति ने कहा कि नई शिक्षा नीति कृषि में नए आयाम स्थापित करेगी।
निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट प्रोफेसर आरएस सेंगर ने कहा कि नई नीति का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक समस्याओं से सामना करने के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षार्थियों को कभी भी तनाव में नहीं रहना चाहिए बल्कि आनंद के साथ अपनी शिक्षा को ग्रहण करना चाहिए। अधिष्ठाता बायोटेक्नोलॉजी प्रोफेसर रविंद्र कुमार ने महाविद्यालय द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कोर्सों और परीक्षाओं के बारे में बताया।
डॉ. मुकेश कुमार ने भारतीय कृषि में एग्रीकल्चर बायोटेक्नोलॉजी की संभावनाओं और विकास के बारे में जानकारी दी। डॉ. नीलेश कपूर ने बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में फिंगरप्रिंट की आवश्यकता और उसकी उपयोगिता के बारे में बताया। डॉ. शालिनी गुप्ता ने मॉलीक्यूलर बायोलॉजी से उन्नतशील प्रजातियों के विकास की संभावनाओं पर चर्चा की। डॉ. रेखा दीक्षित ने प्रदूषण के फसलों पर प्रभाव के बारे में बताया। प्रोफेसर पुरुषोत्तम ने भी छात्र-छात्राओं को नई शिक्षा नीति के बारे में काफी जानकारियां दीं।
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निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट प्रोफेसर आरएस सेंगर ने कहा कि नई नीति का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक समस्याओं से सामना करने के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षार्थियों को कभी भी तनाव में नहीं रहना चाहिए बल्कि आनंद के साथ अपनी शिक्षा को ग्रहण करना चाहिए। अधिष्ठाता बायोटेक्नोलॉजी प्रोफेसर रविंद्र कुमार ने महाविद्यालय द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कोर्सों और परीक्षाओं के बारे में बताया।
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डॉ. मुकेश कुमार ने भारतीय कृषि में एग्रीकल्चर बायोटेक्नोलॉजी की संभावनाओं और विकास के बारे में जानकारी दी। डॉ. नीलेश कपूर ने बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में फिंगरप्रिंट की आवश्यकता और उसकी उपयोगिता के बारे में बताया। डॉ. शालिनी गुप्ता ने मॉलीक्यूलर बायोलॉजी से उन्नतशील प्रजातियों के विकास की संभावनाओं पर चर्चा की। डॉ. रेखा दीक्षित ने प्रदूषण के फसलों पर प्रभाव के बारे में बताया। प्रोफेसर पुरुषोत्तम ने भी छात्र-छात्राओं को नई शिक्षा नीति के बारे में काफी जानकारियां दीं।
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