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बारिश के चलते नो केन रही किनौनी मिल
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रोहटा। बारिश के चलते गन्ना छिलाई न हो पाने से मिल में आवक कम हो गई है। वहीं क्रय केंद्रों पर तौल भी प्रभावित रही। जिसके चलते किनौनी मिल शनिवार को नो कैन रही।
किसान गन्ना काटकर मिल को आपूर्ति कर गेहूं की बुवाई करने में जुटे थे। जिसके चलते बारिश से इस पर विराम लग गया है वहीं, बजाज शुगर मिल किनौनी में गन्ने की आवक जहां रोजाना सवा लाख थी। वह घटकर मात्र 28 हजार क्विंटल पहुंच गई है। शुक्रवार या शनिवार की रात में मिलने मात्र 28 हजार क्विंटल ही गन्ना पेराई किया है। क्रय केंद्रों पर 75 हजार क्विंटल की जगह मात्र 25 हजार क्विंटल गन्ना खरीद हुई। मिल गेट पर भी 30 हजार क्विंटल गन्ना देर शाम तक पहुंच सका। जिसके चलते किनौनी मिल नो केन रही। किसान राजपाल, राजकुमार करनावल, संजय सिंह, नीरज, सुरेशपाल, बेगराज सिंह किनौनी आदि का कहना है कि किसान की हालत दिन प्रतिदिन बेकार हो रहे हैं। पिछला गन्ना भुगतान मिलों ने नहीं किया है। वहीं, अब गेहूं बुआई की तैयारी थी पर बारिश के चलते सब चौपट हो गया है। अब एक हफ्ते तक इंतजार करना पड़ेगा। ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील की टीम गांवों में कुछ ग्रामीणों से मिलीभगत कर पत्ती जलाने वालों की लिस्ट में जबरन नाम जोड़ रही है।
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किसान गन्ना काटकर मिल को आपूर्ति कर गेहूं की बुवाई करने में जुटे थे। जिसके चलते बारिश से इस पर विराम लग गया है वहीं, बजाज शुगर मिल किनौनी में गन्ने की आवक जहां रोजाना सवा लाख थी। वह घटकर मात्र 28 हजार क्विंटल पहुंच गई है। शुक्रवार या शनिवार की रात में मिलने मात्र 28 हजार क्विंटल ही गन्ना पेराई किया है। क्रय केंद्रों पर 75 हजार क्विंटल की जगह मात्र 25 हजार क्विंटल गन्ना खरीद हुई। मिल गेट पर भी 30 हजार क्विंटल गन्ना देर शाम तक पहुंच सका। जिसके चलते किनौनी मिल नो केन रही। किसान राजपाल, राजकुमार करनावल, संजय सिंह, नीरज, सुरेशपाल, बेगराज सिंह किनौनी आदि का कहना है कि किसान की हालत दिन प्रतिदिन बेकार हो रहे हैं। पिछला गन्ना भुगतान मिलों ने नहीं किया है। वहीं, अब गेहूं बुआई की तैयारी थी पर बारिश के चलते सब चौपट हो गया है। अब एक हफ्ते तक इंतजार करना पड़ेगा। ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील की टीम गांवों में कुछ ग्रामीणों से मिलीभगत कर पत्ती जलाने वालों की लिस्ट में जबरन नाम जोड़ रही है।
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