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Meerut News: पहले भी कई बार फेल हो चुका है खुफिया विभाग
Mon, 07 Oct 2024 02:40 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Mon, 07 Oct 2024 02:40 AM IST
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सहारनपुर। शहर से सटे गांव शेखपुरा में हुए बवाल में खुफिया विभाग पूरी तरह फेल नजर आया है। इससे पहले भी कई बार हुए बवाल में खुफिया विभाग की लापरवाही सामने आ चुकी है। खुफिया विभाग जानकारी होती तो शेखपुरा कदीम में बवाल होने से बच सकता था।
देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव शेखपुरा कदीम में भारी भीड़ एकत्र होने की जानकारी खुफिया विभाग को नहीं थी। इसी वजह से पुलिस ने कोई तैयारी नहीं की। भीड़ ने शेखपुरा चौकी पर पथराव कर दिया और पुलिस बेबस दिखी। इसी तरह खुफिया विभाग पहले भी कई बार फेल हो चुका है। जिले में कई बड़े बवाल और जातीय हिंसा की घटनाओं में खुफिया विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े होते रहे हैं।
जिले में पांच मई 2017 को बड़गांव के गांव शब्बीरपुर में जातीय हिंसा हुई थी। 40 से अधिक मकान फूंक दिए। इस जातीय हिंसा की आग शहर से सटे गांव रामनगर तक पहुंची थी। शब्बीरपुर की घटना के 25 दिन बाद ही गांव रामनगर में बवाल हो गया था। कई वाहनों को फूंक दिए थे। इसी मामले के बाद आसपा प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर सुर्खियों में आए थे।
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दूधली में रविदास जयंती के उपलक्ष्य में निकाली जा रही शोभायात्रा पर पथराव हुआ था। लोग छतों से पथराव कर रहे थे, लेकिन इन घटनाओं से पूर्व खुफिया विभाग को कोई इनपुट नहीं था। वहीं, देवबंद से कई बार एटीएस व एनआईए संदिग्धों को गिरफ्तार करके ले गई, लेकिन खुफिया विभाग यहां भी फेल ही दिखा। तीन वर्ष पूर्व नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जुमे की नमाज के बाद चौक फव्वारा स्थित जामा मजिस्द से निकली भीड़ ने घंटाघर घेर लिया। मार्ग में कई दुकानों में भी तोड़फोड़ की थी। इसकी भनक भी खुफिया विभाग को नहीं लग सकी थी।
हकीकतनगर में पाकिस्तानी जासूस इकबाल भट्टी कई वर्ष तक देवराज सहगल नाम से रह रहा था। उसने भारतीय नागरिकता भी प्राप्त कर ली थी। पटियाला पुलिस ने इकबाल को यहां से गिरफ्तार किया था। इस मामले में कई अधिकारी भी फंसे थे। इकबाल के यहां रहने की जानकारी भी खुफिया विभाग नहीं थी।
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देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव शेखपुरा कदीम में भारी भीड़ एकत्र होने की जानकारी खुफिया विभाग को नहीं थी। इसी वजह से पुलिस ने कोई तैयारी नहीं की। भीड़ ने शेखपुरा चौकी पर पथराव कर दिया और पुलिस बेबस दिखी। इसी तरह खुफिया विभाग पहले भी कई बार फेल हो चुका है। जिले में कई बड़े बवाल और जातीय हिंसा की घटनाओं में खुफिया विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े होते रहे हैं।
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जिले में पांच मई 2017 को बड़गांव के गांव शब्बीरपुर में जातीय हिंसा हुई थी। 40 से अधिक मकान फूंक दिए। इस जातीय हिंसा की आग शहर से सटे गांव रामनगर तक पहुंची थी। शब्बीरपुर की घटना के 25 दिन बाद ही गांव रामनगर में बवाल हो गया था। कई वाहनों को फूंक दिए थे। इसी मामले के बाद आसपा प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर सुर्खियों में आए थे।
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दूधली में रविदास जयंती के उपलक्ष्य में निकाली जा रही शोभायात्रा पर पथराव हुआ था। लोग छतों से पथराव कर रहे थे, लेकिन इन घटनाओं से पूर्व खुफिया विभाग को कोई इनपुट नहीं था। वहीं, देवबंद से कई बार एटीएस व एनआईए संदिग्धों को गिरफ्तार करके ले गई, लेकिन खुफिया विभाग यहां भी फेल ही दिखा। तीन वर्ष पूर्व नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जुमे की नमाज के बाद चौक फव्वारा स्थित जामा मजिस्द से निकली भीड़ ने घंटाघर घेर लिया। मार्ग में कई दुकानों में भी तोड़फोड़ की थी। इसकी भनक भी खुफिया विभाग को नहीं लग सकी थी।
हकीकतनगर में पाकिस्तानी जासूस इकबाल भट्टी कई वर्ष तक देवराज सहगल नाम से रह रहा था। उसने भारतीय नागरिकता भी प्राप्त कर ली थी। पटियाला पुलिस ने इकबाल को यहां से गिरफ्तार किया था। इस मामले में कई अधिकारी भी फंसे थे। इकबाल के यहां रहने की जानकारी भी खुफिया विभाग नहीं थी।