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Meerut News: वास्तुकला का अनोखा संगम है जयदेवी नगर का गोल मंदिर
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40 दिन दीपक जलाने से मनोकामना पूरी होने की मान्यता, कल्पवृक्ष देता है भक्तों को आशीर्वाद
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जयदेवी नगर स्थित गोल मंदिर देवी शक्तिपीठ माना जाता है। इसकी अनूठी गोलाकार संरचना पश्चिम उत्तर प्रदेश में विख्यात है। मान्यता है कि यहां 40 दिनों तक दीपक जलाने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
यह मंदिर कमल पंखुड़ियों की आकृति पर आधारित है। वास्तुकला का यह अद्भुत नमूना है। मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध फिल्म प्रोड्यूसर स्वर्गीय देवीशरण शर्मा ने करवाया था। पूरे परिवार के अनुसार 1950 के दशक में जयदेवी नगर के विकास के दौरान यहां मंदिर निर्माण का संकल्प लिया। मंदिर समिति अध्यक्ष मनीषा गौड़ ने बताया कि 1965 में जगतगुरु श्रीकृष्ण बोध आश्रम जी महाराज ने मां दुर्गा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई। जिसके बाद इसे विधिवत रूप प्रदान किया गया। मंदिर का नाम गोल मंदिर इसके गोलाकार मुकुट जैसे आकार से पड़ा। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां मां अंबे दस भुजाओं वाली प्रतिमा में विराजमान हैं। मान्यता है भक्तों के समस्त कष्ट हरने वाली मानी जाती हैं। मंदिर में कल्पवृक्ष भी है। कल्पवृक्ष की उपस्थिति इस मंदिर की ख्याति और अधिक बढ़ा रही है। नवरात्र में यहां विशाल मेला लगता है। ट्रस्टी राजीव गौड़ ने बताया कि मंदिर में आकर सभी को शांति मिलती है।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जयदेवी नगर स्थित गोल मंदिर देवी शक्तिपीठ माना जाता है। इसकी अनूठी गोलाकार संरचना पश्चिम उत्तर प्रदेश में विख्यात है। मान्यता है कि यहां 40 दिनों तक दीपक जलाने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
यह मंदिर कमल पंखुड़ियों की आकृति पर आधारित है। वास्तुकला का यह अद्भुत नमूना है। मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध फिल्म प्रोड्यूसर स्वर्गीय देवीशरण शर्मा ने करवाया था। पूरे परिवार के अनुसार 1950 के दशक में जयदेवी नगर के विकास के दौरान यहां मंदिर निर्माण का संकल्प लिया। मंदिर समिति अध्यक्ष मनीषा गौड़ ने बताया कि 1965 में जगतगुरु श्रीकृष्ण बोध आश्रम जी महाराज ने मां दुर्गा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई। जिसके बाद इसे विधिवत रूप प्रदान किया गया। मंदिर का नाम गोल मंदिर इसके गोलाकार मुकुट जैसे आकार से पड़ा। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां मां अंबे दस भुजाओं वाली प्रतिमा में विराजमान हैं। मान्यता है भक्तों के समस्त कष्ट हरने वाली मानी जाती हैं। मंदिर में कल्पवृक्ष भी है। कल्पवृक्ष की उपस्थिति इस मंदिर की ख्याति और अधिक बढ़ा रही है। नवरात्र में यहां विशाल मेला लगता है। ट्रस्टी राजीव गौड़ ने बताया कि मंदिर में आकर सभी को शांति मिलती है।
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