फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   The female leopard is accompanied by her two children in the Kithore forest of Meerut

मेरठ में तेंदुए को लेकर सामने आई ये बड़ी बात, वन विभाग की टीम अभी तक खाली हाथ

Tue, 09 Feb 2021 02:03 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 09 Feb 2021 02:03 PM IST
विज्ञापन
The female leopard is accompanied by her two children in the Kithore forest of Meerut
तेंदुआ

मेरठ में किठौर के जंगल में मादा तेंदुए के साथ दिख रहे दोनों तेंदुए उसके बच्चे हैं। ये जंगली के साथ ही घरेलू हो गए हैं। सेही और नील गाय के बच्चों के अलावा दूसरे जानवरों का शिकार नहीं कर रहे हैं। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट का मानना है कि मादा तेंदुए ने इन दोनों को आसपास के जंगल में ही जन्म दिया है। इसके बाद से ये यहीं रह रहे हैं। अगर ये तेंदुए पिंजरे में फंसते हैं तो ठीक है, वरना वन विभाग की टीम को इनके खुद ही जाने का इंतजार करना होगा। इन पर कोई जबरदस्ती नहीं की जा सकती है।

विज्ञापन


पिंजरा लगाने के अलावा वन विभाग की टीम कुछ नहीं कर सकती है। जब तक तेंदुए हिंसक न हों या फिर उनकी जान को खतरा न हो तब तक इन पर ट्रैंकुलाइजर गन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट एवं पूर्व डीएफओ जीएस खुशारिया बताते हैं कि मादा तेंदुआ की उम्र छह साल और दोनों बच्चों की उम्र पौने दो साल के करीब है। 
विज्ञापन


बकरी, कुत्ता और मुर्गा नहीं हुआ
जीएस खुशारिया बताते हैं कि अभी तक तेंदुओं ने सेही का ही शिकार किया है। पिंजरे में उनको फंसाने के लिए बकरी, कुत्ता, मुर्गा और कलेजी को भी रखा गया लेकिन, मादा तेंदुए ने इन्हें छुआ तक नहीं है। इससे जाहिर हो रहा है कि बच्चों का जन्म यहीं पर हुआ है। वे सिर्फ सेही और नील गाय के बच्चे का ही शिकार कर रहे हैं। अगर वे जंगल से यहां पर आए होते तो बकरी, कुत्ता और मुर्गे का शिकार जरूर करते। माना जा रहा है कि बच्चों  के गर्भावस्था में होने के समय मादा तेंदुआ भटककर यहां आ गई। बच्चों के जन्म के बाद वो यहीं पर रहने लगी। वह बताते हैं कि आमतौर पर तेंदुआ आदमी से दूरी बनाकर रहता है। लेकिन ये इंसान को देखकर दूर नहीं जाते हैं। ये जंगली के साथ घरेलू हो गए हैं। दिन में सुबह से दोपहर तक ये आसपास मिट्टी के टीलों और सरसों के खेत में रहते हैं। शाम को साढ़े तीन बजे के करीब मादा तेंदुआ खेत से बाहर निकालकर आती है, शिकार मिलने पर भी वह बच्चों को भी बुला लेती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: यूपी: पंचायत चुनाव के लिए रालोद ने की बैठक, बनाया ये खास प्लान, तैयारी में जुटे कार्यकर्ता

टीम को नहीं दिखा तेंदुआ 
पहले फतेहपुर, फिर जडौदा-भडौली के जंगल में वन विभाग और वन्य जव संरक्षण टीम का संयुक्त सर्च ऑपरेशन दम तोड़ता नजर आ रहा है। सोमवार को जंगल में तंदुआ परिवार न दिखने पर टीम कहीं ओर चले जाने की संभावना जता रही है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की टीम तेंदुआ परिवार के खुद ही यहां से जाने का इंतजार करती रहीं।

यह भी पढ़ें: यूपी: पंचायत चुनाव में हिंसा फैलाई तो खैर नहीं, पुलिस करेगी ये बड़ी कार्रवाई, 1632 लोग चिह्नित

ट्रेंकुलाइजर गन का इस्तेमाल नहीं कर सकते
तीन पिंजरे लगाए गए हैं लेकिन तेंदुए अभी फंस नहीं रहे हैं। उन पर ट्रेंकुलाइजर गन आदि का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। ऐसे में या तो वे पिंजरे में फंसेंगे या फिर खुद ही यहां से दूर चले जाएंगे। - राजेश कुमार, डीएफओ

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed