किसानों ने समूह बनाकर शुरू की लेमन ग्रास की खेती, न खाद की जरूरत, न जानवरों का डर
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बागपत में छपरौली ब्लॉक के छह गांवों के 26 किसानों ने समूह बनाकर लेमन ग्रास की खेती शुरू की है। जिले के किसान 160 बीघा भूमि पर लेमन ग्रास की खेती कर रहे हैं। बासौली गांव में किसानों ने प्लांट लगाकर लेमन ग्रास से तेल निकालने का काम भी शुरू कर दिया है। यहीं से दिल्ली के व्यापारी तेल को खरीदकर ले जाते हैं। किसानों के अनुसार निरंतर तेल की मांग बढ़ रही है। बृहस्पतिवार को एडीओ (कृषि) ने गांव में फसल कटाई और प्लांट का निरीक्षण किया।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन योजना के लिए छपरौली ब्लॉक में चयनित आठ में छह गांवों के 26 किसानों ने अपना एक समूह बनाया। प्रशासन के सहयोग से इन गांवों के किसानों ने 160 बीघा भूमि पर लेमन ग्रास की खेती करने की पहल की। किसानों का कहना है कि फसल तैयार हुई और उत्पाद की मांग बढ़ी तो किसानों को यह फसल फायदे का सौदा साबित हुई है। किसान धर्मेंद्र के अनुसार लेमन ग्रास से निकालने वाले तेल की बाजार में बहुत ज्यादा मांग है। इससे आय में दोगुना नहीं, इससे भी ज्यादा हुई है।
उन्होंने बताया प्रारंभ में करीब सवा बीघा भूमि की लेमन ग्रास की फसल में 25 लीटर तेल मिला है। इसके बाद 50-60 लीटर फसल से तेल प्राप्त होगा। बाजार में लेमन ग्रास से निकाले गए तेल की कीमत 1250 रुपये प्रति लीटर है। किसान हर तीन माह में लेमन ग्रास से तेल निकाल सकेगा। कंपनी के लोग प्लांट से ही तेल लेकर चले जाते हैं और उनके खातों में धनराशि पहुंच जाती है। हमारे किसानों के समूह ने बासौली में प्लांट तैयार किया। यहीं पर सभी फसल को इकट्ठा करके तेल निकाला जाता है। किसानों में इसके लिए दिलचस्पी बढ़ी है अन्य किसान भी फसल की जानकारी लेने के लिए आते रहते हैं।
बृहस्पतिवार को एडीओ (कृषि) महेश कुमार खोखर ने बताया कि बासौली में कृषक ऋषि पाल सिंह के यहां पर लेमन ग्रास के फसल की कटाई देखी। उन्होंने कहा यदि किसान उक्त ग्रास की खेती करके तेल निकाले तो संबंधित किसान की आर्थिक स्थिति सुधर सकती है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में लेमन ग्रास का क्षेत्रफल बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं।
छह गांवों में होती है लेमन ग्रास की खेती
श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के तहत आठ गांवों का चयन किया। इसमें छह गांव मुकंदपुर, सिलाना, हलालपुर, चंदनहेड़ी, शेरपुर गांव में लेमन ग्रास की खेती कर रहे हैं। अन्य गांवों में भी क्षेत्रफल बढ़ाने का काम किया जा रहा है।
न खाद की जरूरत और न जानवरों का डर
किसान धर्मेंद्र और ऋषिपाल ने बताया कि लेमन ग्रास खेती में न तो खाद की जरूरत होती है और न ही जंगली जानवरों के फसल नष्ट करने की डर रहता है, इसलिए यह फसल फायदे का भी सौदा साबित हो रही है। एक बार फसल की बुवाई होने के बाद यह निरंतर पांच-छह साल तक चलती रहती है।
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