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Meerut News: 25 साल बाद फिर से मिलने का हुआ असर...जमकर थिरके डॉक्टर
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25 साल बाद फिर से मिलने का हुआ असर...जमकर थिरके डॉक्टर
मेरठ। सफेद एप्रिन पहनकर मरीजों की सेवा करने वाले डॉक्टरों का अंदाज शनिवार को बिल्कुल जुदा था। होता भी क्यों नहीं, 25 साल पुरानी यादें जो ताजा हो रही थीं। सालों बाद साथ पढ़ने वाले साथी साथ थे। ‘तेरे जैसा यार कहां...कहां ऐसा याराना।’ और ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे...तोड़ेंगे सब मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे’ आदि फिल्मी गानों पर जमकर थिरके।
मौका था एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के 1997 बैच की सिल्वर जुबली समारोह का। लंबे समय बाद मेडिकल के पुराने स्टूडेंट्स फिर से मिले तो कॉलेज की यादें ताजा हो गईं। छात्रावास और कलास रूम की पुरानी बातें याद कर खूब ठहाके लगाए गए। मेडिकल कॉलेज की ओल्ड स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ओएसए) की तरफ से मेडिकल कॉलेज के स्पोर्ट्स स्टेडियम में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो सुबह करीब 11 बजे से शाम पांच बजे तक चला। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कानपुर, मेरठ के अलावा आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अमेरिका में रहने वाले 1997 बैच के चिकित्सकों समेत करीब 150 चिकित्सक व उनके परिवारवालों ने शिरकत की। प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता मुख्य अतिथि रहे। रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए और रविवार (25 दिसंबर) को एक होटल में सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। शिक्षकों को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट किए जाएंगे। 1998 बैच के छात्रों को अगले साल के ओएसए की जिम्मेदारी के लिए मशाल दी जाएगी। मेडिकल कॉलेज में साल 1981 से प्रत्येक वर्ष 25 दिसंबर को यह जयंती मनाई जा रही है। इस बार दो दिन कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इस बैच के अध्यक्ष डॉ. सुमित उपाध्याय, सचिव डॉ. अमित त्यागी, डॉ. अभिषेक, डॉ. संजीव, डॉ. मनीषा, डॉ. विभूति, पारुल सिंह और डॉ. गजराज आदि मौजूद रहे।
देश में सुविधाएं अच्छी, और बेहतर करने की जरूरत
मेरठ। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड से आए चिकित्सकों ने बताया कि हमारे देश भारत में चिकित्सा सुविधाएं अच्छी हैं। इन्हें और बेहतर करने की जरूरत है। इसी वजह से ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशों में बीमारी की शुरुआती स्टेज में ही उसे पकड़ लिया जाता है, जबकि हमारे यहां यह ज्यादातर आखिरी स्टेज में पकड़ में आती हैं। वैसे, कोविड के दौरान भारत का मेडिकल प्रबंधन बाकी देशों के मुकाबले काफी बेहतर रहा। विदेश में इतना प्यार नहीं मिलता, जितना भारत में मिलता है।
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पढ़ाई में प्रैक्टिकल पर देना होगा जोर
अमेरिका से आईं डॉ. सुरुचि तनेजा ने बताया कि वह दिल्ली की रहने वाली हैं। अमेरिका में मेडिकल रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) मेडिसिन में प्रैक्टिस करती हैं। एमबीबीएस किया है। मेडिकल में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान जो सीखा वह बहुत मदद कर रहा है। हालांकि मेडिकल की पढ़ाई के दौरान यहां प्रैक्टिकल पर ज्यादा जोर देना चाहिए। इससे और बेहतर चिकित्सक निकलेंगे।
ऐसा लग रहा, जैसे कल की बात हो
इंग्लैंड के बर्मिंघम में मनोचिकित्सक डॉ. पारितोष शर्मा बिजनौर निवासी हैं। उन्होंने बताया कि जहां यह कार्यक्रम है, इसी मैदान में क्रिकेट खेला करते थे। सब याद आ रहा है। ऐसा लग रहा है कल की ही तो बात है। भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक रोग बढ़ रहे हैं।
आ सकती है कोरोना की लहर, न बरतें लापरवाही
अमेरिका के बोस्टन में बच्चों की चिकित्सक डॉ. रुचि अरोरा ने बताया कि वह 17 साल से अमेरिका में हैं। अमेरिका में कोरोना की लहर चल रही है। भारत में भी कोरोना की लहर आ सकती है, लिहाजा लोगों को लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, सावधान रहना चाहिए।
नियंत्रित किया हुआ है कोरोना
ऑस्टेलिया के सिडनी से आईं डॉ. नीलम सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की बहुत यादें हैं। आज आए तो सब फिर से याद आ गया। आस्ट्रेलिया में कोरोना है, लेकिन लोग सावधानी बरत रहे हैं और इलाज की बेहतर व्यवस्था है, इसलिए ज्यादा फैल नहीं रहा है।
नाक से दी जानी वाली वैक्सीन भी है कारगर
मुंबई से आए डॉ. यशपाल चुंग ने बताया कि वह वैक्सीनेशन की पूरी व्यवस्था देखते हैं। नाक से दी जाने वाली कोरोना की वैक्सीन भी कारगर है। लोगों को वैक्सीनेशन कराना चाहिए, कोरोना में यह बहुत कारगर है।
धूम्रपान से बढ़ रहा कैंसर
गुरुग्राम से आए चिकित्सक डॉ. पीयूष अग्रवाल ने बताया कि वह कैंसर सर्जन हैं। कैंसर के रोगी बढ़ने का बड़ा कारण धूम्रपान है। लोगों से इससे दूरी बनानी चाहिए। मेडिकल कॉलेज शानदार कॉलेज है। यहां से पढ़े चिकित्सक अच्छा कार्य कर रहे हैं।
ड्रेस कोड में थे चिकित्सक, खूब लीं सेल्फी
1997 बैच के सभी चिकित्सक ड्रेस कोड में थे। नीली जींस या ट्राउजर और पीली स्वेट शर्ट। डॉक्टर और उनके परिवारवाले सेल्फी ले रहे थे। ड्रोन से फोटो और वीडियोग्राफी हो रही थी। गेट से ही स्वागत के लिए बैंड बजाया जा रहा था और स्कूलों की लड़कियां डांस कर रही थी।
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मेरठ। सफेद एप्रिन पहनकर मरीजों की सेवा करने वाले डॉक्टरों का अंदाज शनिवार को बिल्कुल जुदा था। होता भी क्यों नहीं, 25 साल पुरानी यादें जो ताजा हो रही थीं। सालों बाद साथ पढ़ने वाले साथी साथ थे। ‘तेरे जैसा यार कहां...कहां ऐसा याराना।’ और ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे...तोड़ेंगे सब मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे’ आदि फिल्मी गानों पर जमकर थिरके।
मौका था एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के 1997 बैच की सिल्वर जुबली समारोह का। लंबे समय बाद मेडिकल के पुराने स्टूडेंट्स फिर से मिले तो कॉलेज की यादें ताजा हो गईं। छात्रावास और कलास रूम की पुरानी बातें याद कर खूब ठहाके लगाए गए। मेडिकल कॉलेज की ओल्ड स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ओएसए) की तरफ से मेडिकल कॉलेज के स्पोर्ट्स स्टेडियम में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो सुबह करीब 11 बजे से शाम पांच बजे तक चला। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कानपुर, मेरठ के अलावा आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अमेरिका में रहने वाले 1997 बैच के चिकित्सकों समेत करीब 150 चिकित्सक व उनके परिवारवालों ने शिरकत की। प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता मुख्य अतिथि रहे। रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए और रविवार (25 दिसंबर) को एक होटल में सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। शिक्षकों को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट किए जाएंगे। 1998 बैच के छात्रों को अगले साल के ओएसए की जिम्मेदारी के लिए मशाल दी जाएगी। मेडिकल कॉलेज में साल 1981 से प्रत्येक वर्ष 25 दिसंबर को यह जयंती मनाई जा रही है। इस बार दो दिन कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इस बैच के अध्यक्ष डॉ. सुमित उपाध्याय, सचिव डॉ. अमित त्यागी, डॉ. अभिषेक, डॉ. संजीव, डॉ. मनीषा, डॉ. विभूति, पारुल सिंह और डॉ. गजराज आदि मौजूद रहे।
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देश में सुविधाएं अच्छी, और बेहतर करने की जरूरत
मेरठ। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड से आए चिकित्सकों ने बताया कि हमारे देश भारत में चिकित्सा सुविधाएं अच्छी हैं। इन्हें और बेहतर करने की जरूरत है। इसी वजह से ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशों में बीमारी की शुरुआती स्टेज में ही उसे पकड़ लिया जाता है, जबकि हमारे यहां यह ज्यादातर आखिरी स्टेज में पकड़ में आती हैं। वैसे, कोविड के दौरान भारत का मेडिकल प्रबंधन बाकी देशों के मुकाबले काफी बेहतर रहा। विदेश में इतना प्यार नहीं मिलता, जितना भारत में मिलता है।
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पढ़ाई में प्रैक्टिकल पर देना होगा जोर
अमेरिका से आईं डॉ. सुरुचि तनेजा ने बताया कि वह दिल्ली की रहने वाली हैं। अमेरिका में मेडिकल रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) मेडिसिन में प्रैक्टिस करती हैं। एमबीबीएस किया है। मेडिकल में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान जो सीखा वह बहुत मदद कर रहा है। हालांकि मेडिकल की पढ़ाई के दौरान यहां प्रैक्टिकल पर ज्यादा जोर देना चाहिए। इससे और बेहतर चिकित्सक निकलेंगे।
ऐसा लग रहा, जैसे कल की बात हो
इंग्लैंड के बर्मिंघम में मनोचिकित्सक डॉ. पारितोष शर्मा बिजनौर निवासी हैं। उन्होंने बताया कि जहां यह कार्यक्रम है, इसी मैदान में क्रिकेट खेला करते थे। सब याद आ रहा है। ऐसा लग रहा है कल की ही तो बात है। भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक रोग बढ़ रहे हैं।
आ सकती है कोरोना की लहर, न बरतें लापरवाही
अमेरिका के बोस्टन में बच्चों की चिकित्सक डॉ. रुचि अरोरा ने बताया कि वह 17 साल से अमेरिका में हैं। अमेरिका में कोरोना की लहर चल रही है। भारत में भी कोरोना की लहर आ सकती है, लिहाजा लोगों को लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, सावधान रहना चाहिए।
नियंत्रित किया हुआ है कोरोना
ऑस्टेलिया के सिडनी से आईं डॉ. नीलम सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की बहुत यादें हैं। आज आए तो सब फिर से याद आ गया। आस्ट्रेलिया में कोरोना है, लेकिन लोग सावधानी बरत रहे हैं और इलाज की बेहतर व्यवस्था है, इसलिए ज्यादा फैल नहीं रहा है।
नाक से दी जानी वाली वैक्सीन भी है कारगर
मुंबई से आए डॉ. यशपाल चुंग ने बताया कि वह वैक्सीनेशन की पूरी व्यवस्था देखते हैं। नाक से दी जाने वाली कोरोना की वैक्सीन भी कारगर है। लोगों को वैक्सीनेशन कराना चाहिए, कोरोना में यह बहुत कारगर है।
धूम्रपान से बढ़ रहा कैंसर
गुरुग्राम से आए चिकित्सक डॉ. पीयूष अग्रवाल ने बताया कि वह कैंसर सर्जन हैं। कैंसर के रोगी बढ़ने का बड़ा कारण धूम्रपान है। लोगों से इससे दूरी बनानी चाहिए। मेडिकल कॉलेज शानदार कॉलेज है। यहां से पढ़े चिकित्सक अच्छा कार्य कर रहे हैं।
ड्रेस कोड में थे चिकित्सक, खूब लीं सेल्फी
1997 बैच के सभी चिकित्सक ड्रेस कोड में थे। नीली जींस या ट्राउजर और पीली स्वेट शर्ट। डॉक्टर और उनके परिवारवाले सेल्फी ले रहे थे। ड्रोन से फोटो और वीडियोग्राफी हो रही थी। गेट से ही स्वागत के लिए बैंड बजाया जा रहा था और स्कूलों की लड़कियां डांस कर रही थी।