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गंगा में शिकारियों ने मारी थी डॉल्फिन
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गंगा में शिकारियों ने मारी थी डॉल्फिन
हस्तिनापुर (मेरठ)। हस्तिनापुर क्षेत्र में गंगा किनारे मृत मिली डॉल्फिन के मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। डॉल्फिन की मौत शिकारियों के वार से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉल्फिन के शरीर पर दो बड़े घाव मिलने पर अंदेशा है कि उस पर किसी नुकीले हथियार से वार किया गया। माना जा रहा है कि अमरोहा क्षेत्र में शिकारियों ने मछलियों को पकड़ने के चक्कर में डॉल्फिन को मार डाला। डीएफओ ने जांच कमेटी टीम गठित कर दी है। गंगा में डॉल्फिन की संख्या बढ़ाने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। उनके संरक्षण के लिए अनेक उपाय भी किए जा रहे हैं। इस बीच मंगलवार शाम पेट्रोलिंग के दौरान वन विभाग को जलालपुर जोरा गांव के पास गंगा किनारे एक डॉल्फिन मृत अवस्था में मिली थी। 143 सेंटीमीटर लंबी व 23 किलो 750 ग्राम वजनी डॉल्फिन मछली का बुधवार सुबह लगभग 2 घंटे में पोस्टमार्टम हुआ। जो कानपुर चिड़ियाघर के डॉ. आरके सिंह के निर्देशन और डीएफओ अदिति शर्मा की निगरानी में राजकीय पशु चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्सक डॉ. राकेश कुमार व डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने किया। डीएफओ के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक डॉल्फिन की मौत शव मिलने से करीब 60 घंटे पहले हुई थी। शरीर पर दो बड़े घावों के अलावा दिल में क्लॉट मिला है।
घायल होकर बहकर आई?
डीएफओ ने बताया कि हस्तिनापुर रेंज में कहीं शिकार नहीं हो रहा है। ऐसे में यह भी आशंका है कि उसका कहीं दूसरी जगह शिकार तो नहीं हुआ। घायल होने के बाद मौत होने पर वह बहकर यहां आ गई हो। इन सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। डॉल्फिन के विसरा को जांच के लिए बरेली लैब में भेजा जा रहा है। डॉल्फिन के पेट में मछलियां मिली हैं। ऐसे में उसके भूख से मरने की आशंका भी खत्म हो गई है। डॉल्फिन के शेड्यूल वन में होने के कारण उसका हस्तिनापुर में अंतिम संस्कार किया गया।
मंडराया जान पर संकट
सेंक्चुरी क्षेत्र से होकर गुजरने वाली जलालपुर जोरा के समीप गंगा की धारा डॉल्फिन के लिए अनुकूल मानी जाती है। लेकिन अब यहा डॉल्फिन अभयारण्य क्षेत्र में डॉल्फिन की जिंदगी पर खतरा मंडराने लगा है। इन दिनों गंगा का जल स्तर काफी कम हो जाता है जिसके चलते सांस लेने और खाने की तलाश में डॉल्फिन ऊपर आती हैं तो वह शिकारियों का शिकार हो रही हैं, जिससे अब इनका जीवन संकट में पड़ता दिखाई दे रहा है। एक डॉल्फिन की मौत के बाद अब बिजनौर बैराज से नरोरा बैराज तक 32 डॉल्फिन रह गई हैं।
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डॉल्फिन के शिकार का अंदेशा
डीएफओ अदिति शर्मा का कहना है कि डॉल्फिन का पोस्टमार्टम कराया गया। पूरे मामले में शिकार की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। टीम का गठन कर जांच कराई जा रही है।
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हस्तिनापुर (मेरठ)। हस्तिनापुर क्षेत्र में गंगा किनारे मृत मिली डॉल्फिन के मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। डॉल्फिन की मौत शिकारियों के वार से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉल्फिन के शरीर पर दो बड़े घाव मिलने पर अंदेशा है कि उस पर किसी नुकीले हथियार से वार किया गया। माना जा रहा है कि अमरोहा क्षेत्र में शिकारियों ने मछलियों को पकड़ने के चक्कर में डॉल्फिन को मार डाला। डीएफओ ने जांच कमेटी टीम गठित कर दी है। गंगा में डॉल्फिन की संख्या बढ़ाने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। उनके संरक्षण के लिए अनेक उपाय भी किए जा रहे हैं। इस बीच मंगलवार शाम पेट्रोलिंग के दौरान वन विभाग को जलालपुर जोरा गांव के पास गंगा किनारे एक डॉल्फिन मृत अवस्था में मिली थी। 143 सेंटीमीटर लंबी व 23 किलो 750 ग्राम वजनी डॉल्फिन मछली का बुधवार सुबह लगभग 2 घंटे में पोस्टमार्टम हुआ। जो कानपुर चिड़ियाघर के डॉ. आरके सिंह के निर्देशन और डीएफओ अदिति शर्मा की निगरानी में राजकीय पशु चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्सक डॉ. राकेश कुमार व डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने किया। डीएफओ के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक डॉल्फिन की मौत शव मिलने से करीब 60 घंटे पहले हुई थी। शरीर पर दो बड़े घावों के अलावा दिल में क्लॉट मिला है।
घायल होकर बहकर आई?
डीएफओ ने बताया कि हस्तिनापुर रेंज में कहीं शिकार नहीं हो रहा है। ऐसे में यह भी आशंका है कि उसका कहीं दूसरी जगह शिकार तो नहीं हुआ। घायल होने के बाद मौत होने पर वह बहकर यहां आ गई हो। इन सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। डॉल्फिन के विसरा को जांच के लिए बरेली लैब में भेजा जा रहा है। डॉल्फिन के पेट में मछलियां मिली हैं। ऐसे में उसके भूख से मरने की आशंका भी खत्म हो गई है। डॉल्फिन के शेड्यूल वन में होने के कारण उसका हस्तिनापुर में अंतिम संस्कार किया गया।
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मंडराया जान पर संकट
सेंक्चुरी क्षेत्र से होकर गुजरने वाली जलालपुर जोरा के समीप गंगा की धारा डॉल्फिन के लिए अनुकूल मानी जाती है। लेकिन अब यहा डॉल्फिन अभयारण्य क्षेत्र में डॉल्फिन की जिंदगी पर खतरा मंडराने लगा है। इन दिनों गंगा का जल स्तर काफी कम हो जाता है जिसके चलते सांस लेने और खाने की तलाश में डॉल्फिन ऊपर आती हैं तो वह शिकारियों का शिकार हो रही हैं, जिससे अब इनका जीवन संकट में पड़ता दिखाई दे रहा है। एक डॉल्फिन की मौत के बाद अब बिजनौर बैराज से नरोरा बैराज तक 32 डॉल्फिन रह गई हैं।
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डॉल्फिन के शिकार का अंदेशा
डीएफओ अदिति शर्मा का कहना है कि डॉल्फिन का पोस्टमार्टम कराया गया। पूरे मामले में शिकार की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। टीम का गठन कर जांच कराई जा रही है।