UP: दिसंबर के मौसम ने चौंकाया, तेज हवा से कंप-कंपाने लगे लोग, अभी और बढ़ेगी मुश्किल, इन फसलों पर पड़ेगा असर
UP News : दिसंबर के मौसम ने सभी को चौंका दिया है। वहीं तेज हवा चलने से लोग कंप-कंपाने लगे है। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में लोगों को पाला देखने को मिल सकता है, जिसका असर फसलों पर भी पड़ेगा।
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दो दिन से दिसंबर में फरवरी जैसा मौसम है। सहारनपुर में बुधवार को दिन भर 25.8 किलोमीटर प्रति की रफ्तार से हवा चलती रही। वहीं मौसम विज्ञानियों का कहना है कि आने वाले दिनों में पाला पड़ सकता है। उधर, मुजफ्फरनगर में भी कंप-कंपा देने वाली ठंड का असर देखने को मिला।
ऐसे में आगामी दिनों पाला पड़ने की संभावना है। सहारनपुर में बुधवार को न्यूनतम तापमान 7.2 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहा। तेज हवा से वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार हुआ है। एक्यूआई, जो चार दिन पहले तक 240 तक था वह बुधवार को 80 पर आ गया।
मौसम वेधशाला के प्रभारी अमीर आलम का कहना है कि दिसंबर में ऐसी तेज हवा कम ही चलती है। इन दिनों जो तेज हवा चल रही है, जिनके बाद पाला पड़ने की संभावना है, ठंड और बढ़ सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा का कहना है कि तेज हवा चलने के बाद पाला पड़ने की उम्मीद बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि पाला उन फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिनमें नमी नहीं होती है।
मुजफ्फरनगर में छह डिग्री तापमान, फसलों की पहरेदारी कर रहे किसान
मुजफ्फरनगर में ठंड लोगों को कंपकंपाने लगी है। न्यूनतम तापमान छह डिग्री नीचे तक गिर गया है। मगर, किसानों के सामने इस ठंड में भी अपनी फसलों को निराश्रित पशुओं से बचाने की जद्दोजहद चल रही है। हालात यह है कि फसल बचाने के लिए किसान रात में खेतों पर पहरा देने को मजबूर है। कई किसानों ने तो मचान तक बना रखी है। कहना है कि पशु एक साथ बड़ी संख्या में खेतों में घुसकर उनकी फसल को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे निजात दिलाई जाए।
शाम ढलते ही आवारा पशु किसानों की गेहूं, सरसों, ईंख और चारे की फसलों को चट करने के लिए पहुंच जाते हैं। ठंड के बावजूद किसान रातभर जागकर फसलों की पहरेदारी करने को मजबूर हैं। फसलों को बचाने के लिए किसान समूह में एकत्र होकर लाठी-डंडे लेकर खेतों में पहुंचते हैं। रात के समय अलाव जलाकर ठंड से बचने के प्रयास किए जाते हैं। इस दौरान बीच-बीच में पशुओं को भगाने के लिए शोर-शराबा करने की मजबूरी भी किसानों के सामने हैं।
सरकार अपनी जिम्मेदारी समझें
किसान संदीप सोम का कहना है कि सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। किसानों की क्या खता है। पशु आधी से ज्यादा फसल को चौपट कर देते हैं। ऐसे में किसान क्या करें।
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घट गई है किसानों की आय
किसान कृष्णपाल सिंह का कहना है कि किसानों की आय घट रही है। फसलों में नुकसान बढ़ गया है। प्रशासन अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पशुओं का गोशाला में ले जाने का इंतजाम करें।
आधी फसल भी नहीं पहुंच रही घर
किसान सुभाष सोम का कहना है कि आधी फसल भी घर नहीं पहुंच रही है। आवारा पशु किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गए हैं। किसानों की कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।
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दोराहे पर खड़े हैं किसान
किसान श्रीओम का कहना है कि किसान दोराहे पर खड़े हुए हैं। प्रशासन हमारी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। आवारा पशु मुसीबत बन गए हैं।