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बिल्डरों को रास नहीं आई रेंटल हाउसिंग योजना
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बिल्डरों को रास नहीं आई रेंटल हाउसिंग योजना
मेरठ। किफायती दाम पर प्रवासी श्रमिकों को घर देने के लिए केंद्र सरकार ने अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम की शुुरुआत की थी, लेकिन योजना शुरू होने से पहले ही डगमगा गई। एमडीए ने इसके लिए बिल्डरों से सुझाव मांगे थे। जिसमें बिल्डरों ने इस योजना में मकान बनाने से साफ इंकार कर दिया। उनका कहना है कि अगर एमडीए हमें जमीन मुहैया कराए तो इस पर विचार किया जा सकता है।
हाल ही में कोरोना के चलते श्रमिक अपने घरों की तरफ जाना शुरू कर दिया था। जिसके बाद सरकार ने किफायती दामों पर उनके कार्य के पास ही घर देने का प्लान तैयार कराया। जिससे उन्हें कम दामों पर सरकार की योजनाओं में ही आवास मिल जाएं। इसमें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में भी मकानों को बनाया जाना था, लेकिन अभी इस पर संकट के बादल उमड़ने लगे हैं। इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए अब खुद एमडीए को अपनी योजनाओं में इस तरह के मकानों को तैयार करना होगा। जिससे सरकार के इस प्लान को सफल किया जा सके।
लोहियानगर, शताब्दी नगर में आवास खाली
एमडीए अपनी योजनाओं के खाली आवासों को भी इस योजना में शामिल कर लाभ कमा सकता है। इसके लिए स्टडी की जा रही है कि क्या वाकई में यहां प्रवासी श्रमिकों की मदद से इन मकानों का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए प्रशासन से भी सूची मांगी जाएगी। हाल ही में प्रवासी श्रमिकों की एक सूची तैयार की गई थी। जितने प्रवासी श्रमिक मेरठ से अन्य राज्यों की तरफ रवाना हुए थे। उनसे भी फीडबैक लेकर आगे कार्य किया जाएगा। काफी संख्या में लोहिया नगर, शताब्दी नगर में ईडब्ल्यूएस के मकान खाली हैं। इन मकानों का उपयोग इस योजना के लिए किया जा सकता है।
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बिल्डरों ने नहीं दिखाई रूचि
रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन के महासचिव कमल ठाकुर का कहना है कि रेंटल हाउसिंग में अभी किसी बिल्डर ने कोई रुचि नहीं दिखाई है। हमने एमडीए से कहा था कि आप जमीन दे दीजिए तो कोशिश की जा सकती है।
हम खुद कोशिश करेंगे
एमडीए के मुख्य नगर नियोजक इश्तियाक अहमद का कहना है कि बिल्डरों ने साफ मना कर दिया है कि रेंटल हाउसिंग में हम सहयोग नहीं कर सकते। वह हमसे ही जमीन मांग रहे हैं। हम खुद ही इस योजना को आगे ले जाने की कोशिश करेंगे, जिससे सरकार की उम्मीदों को पूरा किया जा सके।
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मेरठ। किफायती दाम पर प्रवासी श्रमिकों को घर देने के लिए केंद्र सरकार ने अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम की शुुरुआत की थी, लेकिन योजना शुरू होने से पहले ही डगमगा गई। एमडीए ने इसके लिए बिल्डरों से सुझाव मांगे थे। जिसमें बिल्डरों ने इस योजना में मकान बनाने से साफ इंकार कर दिया। उनका कहना है कि अगर एमडीए हमें जमीन मुहैया कराए तो इस पर विचार किया जा सकता है।
हाल ही में कोरोना के चलते श्रमिक अपने घरों की तरफ जाना शुरू कर दिया था। जिसके बाद सरकार ने किफायती दामों पर उनके कार्य के पास ही घर देने का प्लान तैयार कराया। जिससे उन्हें कम दामों पर सरकार की योजनाओं में ही आवास मिल जाएं। इसमें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में भी मकानों को बनाया जाना था, लेकिन अभी इस पर संकट के बादल उमड़ने लगे हैं। इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए अब खुद एमडीए को अपनी योजनाओं में इस तरह के मकानों को तैयार करना होगा। जिससे सरकार के इस प्लान को सफल किया जा सके।
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लोहियानगर, शताब्दी नगर में आवास खाली
एमडीए अपनी योजनाओं के खाली आवासों को भी इस योजना में शामिल कर लाभ कमा सकता है। इसके लिए स्टडी की जा रही है कि क्या वाकई में यहां प्रवासी श्रमिकों की मदद से इन मकानों का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए प्रशासन से भी सूची मांगी जाएगी। हाल ही में प्रवासी श्रमिकों की एक सूची तैयार की गई थी। जितने प्रवासी श्रमिक मेरठ से अन्य राज्यों की तरफ रवाना हुए थे। उनसे भी फीडबैक लेकर आगे कार्य किया जाएगा। काफी संख्या में लोहिया नगर, शताब्दी नगर में ईडब्ल्यूएस के मकान खाली हैं। इन मकानों का उपयोग इस योजना के लिए किया जा सकता है।
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बिल्डरों ने नहीं दिखाई रूचि
रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन के महासचिव कमल ठाकुर का कहना है कि रेंटल हाउसिंग में अभी किसी बिल्डर ने कोई रुचि नहीं दिखाई है। हमने एमडीए से कहा था कि आप जमीन दे दीजिए तो कोशिश की जा सकती है।
हम खुद कोशिश करेंगे
एमडीए के मुख्य नगर नियोजक इश्तियाक अहमद का कहना है कि बिल्डरों ने साफ मना कर दिया है कि रेंटल हाउसिंग में हम सहयोग नहीं कर सकते। वह हमसे ही जमीन मांग रहे हैं। हम खुद ही इस योजना को आगे ले जाने की कोशिश करेंगे, जिससे सरकार की उम्मीदों को पूरा किया जा सके।