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पैसों का तगादा करने गए बैंक मैनेजर लापता
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Mon, 04 Jul 2016 02:09 AM IST
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बैंक मैनेजर के लापता होने के बाद घर पर बैठे परेशान परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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कचहरी स्थित जिला सहकारी बैंक के कनिष्ठ प्रबंधक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए। वह शनिवार शाम एक फैक्ट्री मालिक से अपने साढे़ नौ लाख रुपये का तगादा करने गए गए थे, लेकिन घर नहीं लौटे। परिजनों ने अपहरण की आशंका जताते हुए तहरीर दी है। वहीं पुलिस ने उनकी गुमशुदगी दर्ज की है।
शास्त्रीनगर के एल ब्लॉक के निकट काजीपुर निवासी प्रताप सिंह पुत्र अतर सिंह जिला सहकारी बैंक की कचहरी स्थित ब्रांच में कनिष्ठ प्रबंधक हैं। परिजनों के अनुसार प्रताप ने कांशीराम कॉलोनी निवासी राजकुमार को साढे़ नौ लाख रुपये उधार दिए थे। शनिवार शाम प्रताप आनंद अस्पताल के सामने राजकुमार की गारमेंट्स की फैक्ट्री में उससे पैसों का तगादा करने गए थे। जब वह रात तक लौटे नहीं तो प्रताप की बेटी प्रीति ने उन्हें फोन किया, लेकिन रिसीव नहीं हुआ। रात करीब 9:30 बजे एक व्यक्ति ने फोन रिसीव किया। उसने अपना नाम जावेद बताते हुए कहा कि मोबाइल दिल्ली रोड पर चार्जिंग पर लगा है। इसके बाद मोबाइल बंद हो गया। रविवार सुबह मैनेजर के बेटे पवन ने अपहरण की आशंका जताते हुए तहरीर दी।
मामला अपहरण का नहीं है। प्रताप अपनी उधार दी गई रकम का तकादा करने राजकुमार के यहां गए थे। उसके बाद से वह लापता है। गुमशुदगी में दर्ज कर ली गई है। - रविंद्र वशिष्ठ, एसओ मेडिकल
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राजकुमार से लिए थे 1500 रुपये
प्रताप सिंह के बेटे पवन कुमार ने बताया कि उसने रात में ही राजकुमार को फोन कर बुलाया था। वह और उनकी पत्नी दोनों आए थे। राजकुमार ने बताया कि उसके पापा शाम करीब सवा छह बजे आए थे। उसने उन्हें 1500 रुपये भी दिए। इसके बाद वे घर के लिए चले गए थे। परिजनों ने राजकुमार पर शक जताया है।
फैक्ट्री में मिली घड़ी
प्रताप के पुत्र के अनुसार एक बैंक कर्मचारी ने बताया उसके पापा शनिवार शाम करीब सवा पांच बजे उनके साथ बाइक से हापुड़ अड्डे गए थे। जहां से उन्होंने एक घड़ी खरादी थी। इसके बाद उन्होंने प्रताप को तेजगढ़ी की ओर जाने वाले ऑटो में बैठा दिया था। वह घड़ी राजकुमार की फैक्ट्री में मिली। राजकुमार ने बताया कि प्रताप घड़ी को फैक्ट्री पर भूल गए थे।
गलत बताई लोकेशन
परिजनों के अनुसार पुलिस ने उन्हें बताया कि शनिवार रात करीब 9:30 बजे के आसपास प्रताप के मोबाइल की लोकेशन सोमदत्त सिटी पर थी। लेकिन रात 9:30 बजे फोन रिसीव करने वाले जावेद ने बताया कि मोबाइल दिल्ली रोड पर है। ऐसे में सवाल उठता है कि जावेद ने झूठ क्यों बोला। वहीं जब परिजनों ने जावेद से प्रताप से बात कराने को कहा तो वह झल्ला गया। उसने कहा कि वे यहां नहीं है। अब फोन मत करना। इसके बाद मोबाइल बंद हो गया।
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शास्त्रीनगर के एल ब्लॉक के निकट काजीपुर निवासी प्रताप सिंह पुत्र अतर सिंह जिला सहकारी बैंक की कचहरी स्थित ब्रांच में कनिष्ठ प्रबंधक हैं। परिजनों के अनुसार प्रताप ने कांशीराम कॉलोनी निवासी राजकुमार को साढे़ नौ लाख रुपये उधार दिए थे। शनिवार शाम प्रताप आनंद अस्पताल के सामने राजकुमार की गारमेंट्स की फैक्ट्री में उससे पैसों का तगादा करने गए थे। जब वह रात तक लौटे नहीं तो प्रताप की बेटी प्रीति ने उन्हें फोन किया, लेकिन रिसीव नहीं हुआ। रात करीब 9:30 बजे एक व्यक्ति ने फोन रिसीव किया। उसने अपना नाम जावेद बताते हुए कहा कि मोबाइल दिल्ली रोड पर चार्जिंग पर लगा है। इसके बाद मोबाइल बंद हो गया। रविवार सुबह मैनेजर के बेटे पवन ने अपहरण की आशंका जताते हुए तहरीर दी।
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मामला अपहरण का नहीं है। प्रताप अपनी उधार दी गई रकम का तकादा करने राजकुमार के यहां गए थे। उसके बाद से वह लापता है। गुमशुदगी में दर्ज कर ली गई है। - रविंद्र वशिष्ठ, एसओ मेडिकल
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राजकुमार से लिए थे 1500 रुपये
प्रताप सिंह के बेटे पवन कुमार ने बताया कि उसने रात में ही राजकुमार को फोन कर बुलाया था। वह और उनकी पत्नी दोनों आए थे। राजकुमार ने बताया कि उसके पापा शाम करीब सवा छह बजे आए थे। उसने उन्हें 1500 रुपये भी दिए। इसके बाद वे घर के लिए चले गए थे। परिजनों ने राजकुमार पर शक जताया है।
फैक्ट्री में मिली घड़ी
प्रताप के पुत्र के अनुसार एक बैंक कर्मचारी ने बताया उसके पापा शनिवार शाम करीब सवा पांच बजे उनके साथ बाइक से हापुड़ अड्डे गए थे। जहां से उन्होंने एक घड़ी खरादी थी। इसके बाद उन्होंने प्रताप को तेजगढ़ी की ओर जाने वाले ऑटो में बैठा दिया था। वह घड़ी राजकुमार की फैक्ट्री में मिली। राजकुमार ने बताया कि प्रताप घड़ी को फैक्ट्री पर भूल गए थे।
गलत बताई लोकेशन
परिजनों के अनुसार पुलिस ने उन्हें बताया कि शनिवार रात करीब 9:30 बजे के आसपास प्रताप के मोबाइल की लोकेशन सोमदत्त सिटी पर थी। लेकिन रात 9:30 बजे फोन रिसीव करने वाले जावेद ने बताया कि मोबाइल दिल्ली रोड पर है। ऐसे में सवाल उठता है कि जावेद ने झूठ क्यों बोला। वहीं जब परिजनों ने जावेद से प्रताप से बात कराने को कहा तो वह झल्ला गया। उसने कहा कि वे यहां नहीं है। अब फोन मत करना। इसके बाद मोबाइल बंद हो गया।