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अब शासनादेश के मुताबिक ही होगा राशन और मिटटी के तेल का वितरण
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प्रशासन फंसा तो याद आया शासनादेश
मेरठ। जिला प्रशासन ने सरकारी खाद्यान्न और मिट्टी के तेल उठान से लेकर वितरण तक पूरी निगरानी करने के शासन के आदेश को लागू करने की बात कही है। शासनादेश के मुताबिक अब तक न तो गोदाम से खाद्यान्न और डिपो से मिट्टी का तेल उठान हो रहा था और न सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से वितरण हो रहा था। जिले में पेट्रोल-डीजल के बाद केरोसिन में भी खेल उजागर होने के बाद अब विभाग फंसने लगा है, तो शासनादेश याद आ रहा है।
शासनादेश के मुताबिक, सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से खाद्यान्न और मिट्टी के तेल का वितरण साथ-साथ कराया जाना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को बार-बार चक्कर न काटने पड़ें। मिट्टी का तेल उठान और वितरण की चरणबद्ध व्यवस्था होनी चाहिए। इसके तहत ऑयल कंपनी नियमित रूप से टैंकर के प्रस्थान की सूचना डिपो के माध्यम से डीएसओ को देंगी, उसी दिन सत्यापन होगा। थोक विक्रेता डिपो से उठाए तेल को भंडारण परिसर में भूमिगत टैंक में एकत्र करेगा। सत्यापन अधिकारी मौजूद रहेंगे। यहां से पूर्ति निरीक्षक की निगरानी में सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता को तेल दिया जाएगा।
तृतीय चरण में डीएसओ अथवा एसडीएम संबंधित लेखपाल और ग्राम पंचायत अधिकारी को वितरण की जिम्मेदारी सौंपेंगे। शहरी क्षेत्र में मिट्टी के तेल का वितरण क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक के सामने होगा। लापरवाही पर डीएसओ जिम्मेदार होंगे। प्रतिदिन थोक विक्रेता के यहां कितना मिट्टी का तेल आया और कितना उचित दर विक्रेताओं को दिया, उसका रिकार्ड डीएसओ को रोज दिया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की जांच समय समय पर अधिकारी करेंगे। थोक विक्रेता द्वारा उचित दर पर विक्रेता को एक बार में अधिकतम 2400 लीटर तेल दिया जाएगा। गोलमाल होने पर जिलाधिकारी जिम्मेदार होंगे। बता दें कि रतिराम खूबचंद फर्म के पास 70 हजार लीटर ऐसा केरोसिन पाया गया था, जिसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
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मेरठ। जिला प्रशासन ने सरकारी खाद्यान्न और मिट्टी के तेल उठान से लेकर वितरण तक पूरी निगरानी करने के शासन के आदेश को लागू करने की बात कही है। शासनादेश के मुताबिक अब तक न तो गोदाम से खाद्यान्न और डिपो से मिट्टी का तेल उठान हो रहा था और न सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से वितरण हो रहा था। जिले में पेट्रोल-डीजल के बाद केरोसिन में भी खेल उजागर होने के बाद अब विभाग फंसने लगा है, तो शासनादेश याद आ रहा है।
शासनादेश के मुताबिक, सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से खाद्यान्न और मिट्टी के तेल का वितरण साथ-साथ कराया जाना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को बार-बार चक्कर न काटने पड़ें। मिट्टी का तेल उठान और वितरण की चरणबद्ध व्यवस्था होनी चाहिए। इसके तहत ऑयल कंपनी नियमित रूप से टैंकर के प्रस्थान की सूचना डिपो के माध्यम से डीएसओ को देंगी, उसी दिन सत्यापन होगा। थोक विक्रेता डिपो से उठाए तेल को भंडारण परिसर में भूमिगत टैंक में एकत्र करेगा। सत्यापन अधिकारी मौजूद रहेंगे। यहां से पूर्ति निरीक्षक की निगरानी में सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता को तेल दिया जाएगा।
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तृतीय चरण में डीएसओ अथवा एसडीएम संबंधित लेखपाल और ग्राम पंचायत अधिकारी को वितरण की जिम्मेदारी सौंपेंगे। शहरी क्षेत्र में मिट्टी के तेल का वितरण क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक के सामने होगा। लापरवाही पर डीएसओ जिम्मेदार होंगे। प्रतिदिन थोक विक्रेता के यहां कितना मिट्टी का तेल आया और कितना उचित दर विक्रेताओं को दिया, उसका रिकार्ड डीएसओ को रोज दिया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की जांच समय समय पर अधिकारी करेंगे। थोक विक्रेता द्वारा उचित दर पर विक्रेता को एक बार में अधिकतम 2400 लीटर तेल दिया जाएगा। गोलमाल होने पर जिलाधिकारी जिम्मेदार होंगे। बता दें कि रतिराम खूबचंद फर्म के पास 70 हजार लीटर ऐसा केरोसिन पाया गया था, जिसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
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