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220 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी की शीघ्र रखी जाएगी नींव
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एसटीपी निर्माण के लिए 29 को खोले जा सकते हैं टेंडर
मेरठ। काली नदी पर कमालपुर के जंगल में बनाए जाने वाले 220 एमएलडी क्षमता वाले सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की नींव शीघ्र रखी जा सकती है। टेंडर प्रक्रिया में कई कंपनियां आगे आई हैं। 29 अक्तूबर को टेंडर खोले जा सकते हैं। जल निगम ग्रामीण ने इस पर कार्रवाई शुरू कर दी है। शीघ्र ही एनएमसीजी (नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा) की वर्ल्ड बैंक के साथ बैठक होने जा रही है।
एनजीटी की फटकार के बाद सरकार के निर्देश पर जल निगम ने 2019 में कालीनदी पर एसटीपी का प्रस्ताव तैयार किया था। शहर के सभी नालों का गंदा पानी सीधे काली नदी में पहुंच रहा है। एनजीटी ने किसी भी कीमत पर काली नदी में नालों का गंदा पानी नहीं डालने की चेतावनी दी थी। उसके बाद ही भारत सरकार ने 220 एमएलडी क्षमता वाला सीवर ट्रीटमेंट प्लांट काली नदी पर कमालपुर के जंगल में बनाने का प्रस्ताव तैयार किया। केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने 20 फरवरी 2019 को मेरठ पहुंचकर एसटीपी का शिलान्यास भी किया था। उसके बाद से प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया।
एक सितंबर को सरकार ने एसटीपी को दी हरी झंडी
अगस्त माह में मेरठ आए नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन ने भले ही नगर निगम और जल निगम के अधिकारियों को 220 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी को भूलने की सलाह दी थी। साथ ही सरकार के पास धन की कमी होना भी बताया था। सितंबर माह में सरकार ने एसटीपी प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी। इतना ही नहीं एक सप्ताह के भीतर टेंडर प्रक्रिया भी शुरू करा दी। एसटीपी तैयार करने के लिए कई नामचीन कंपनियों ने टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग किया है। टेंडर खोलने की तिथि भी 29 अक्तूबर निर्धारित है।
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प्रक्रिया में हो सकते हैं बदलाव
टेंडर खोलने की तिथि 29 अक्तूबर ही है। एनएमसीजी की तरफ से वर्ल्ड बैंक को हाल ही में जवाब भेजे गए हैं। एनएमसीजी और वर्ल्ड बैंक की बैठक भी होनी है। जिसमें टेंडर प्रक्रिया में कुछ बदलाव भी हो सकते हैं। - अकांशु सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम ग्रामीण
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मेरठ। काली नदी पर कमालपुर के जंगल में बनाए जाने वाले 220 एमएलडी क्षमता वाले सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की नींव शीघ्र रखी जा सकती है। टेंडर प्रक्रिया में कई कंपनियां आगे आई हैं। 29 अक्तूबर को टेंडर खोले जा सकते हैं। जल निगम ग्रामीण ने इस पर कार्रवाई शुरू कर दी है। शीघ्र ही एनएमसीजी (नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा) की वर्ल्ड बैंक के साथ बैठक होने जा रही है।
एनजीटी की फटकार के बाद सरकार के निर्देश पर जल निगम ने 2019 में कालीनदी पर एसटीपी का प्रस्ताव तैयार किया था। शहर के सभी नालों का गंदा पानी सीधे काली नदी में पहुंच रहा है। एनजीटी ने किसी भी कीमत पर काली नदी में नालों का गंदा पानी नहीं डालने की चेतावनी दी थी। उसके बाद ही भारत सरकार ने 220 एमएलडी क्षमता वाला सीवर ट्रीटमेंट प्लांट काली नदी पर कमालपुर के जंगल में बनाने का प्रस्ताव तैयार किया। केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने 20 फरवरी 2019 को मेरठ पहुंचकर एसटीपी का शिलान्यास भी किया था। उसके बाद से प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया।
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एक सितंबर को सरकार ने एसटीपी को दी हरी झंडी
अगस्त माह में मेरठ आए नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन ने भले ही नगर निगम और जल निगम के अधिकारियों को 220 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी को भूलने की सलाह दी थी। साथ ही सरकार के पास धन की कमी होना भी बताया था। सितंबर माह में सरकार ने एसटीपी प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी। इतना ही नहीं एक सप्ताह के भीतर टेंडर प्रक्रिया भी शुरू करा दी। एसटीपी तैयार करने के लिए कई नामचीन कंपनियों ने टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग किया है। टेंडर खोलने की तिथि भी 29 अक्तूबर निर्धारित है।
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प्रक्रिया में हो सकते हैं बदलाव
टेंडर खोलने की तिथि 29 अक्तूबर ही है। एनएमसीजी की तरफ से वर्ल्ड बैंक को हाल ही में जवाब भेजे गए हैं। एनएमसीजी और वर्ल्ड बैंक की बैठक भी होनी है। जिसमें टेंडर प्रक्रिया में कुछ बदलाव भी हो सकते हैं। - अकांशु सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम ग्रामीण