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विवादों में फंस गई टेंडर प्रक्रिया, नियमों को नहीं किया जा रहा फॉलो
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Updated Wed, 11 Jan 2017 11:16 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल में आईसीसीयू शुरू होने से पहले ही सामान खरीद से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया विवादों में फंस गई है। टेंडर जारी करने से पहले उन नियमों को फॉलो नहीं किया जा रहा है, जिनकी सबसे ज्यादा बेसिक जरूरत है। बल्कि कुछ सामान निर्धारित कीमतों से ज्यादा पर खरीदा जा रहा है। ऐसी स्थिति में वित्त एवं लेखाधिकारी ने टेंडर से जुड़ी फाइल में कई खामियों का हवाला देकर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया है, जिसको लेकर विवाद छिड़ गया है।
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जिला अस्पताल में इंटेंसिव क्रिटिकल केयर यूनिट (आईसीसीयू) वार्ड के लिए 4 फोल्ड बेड विद एपोक्सी कोटिंग, सेंट्रल ऑक्सीजन मैनीफोल्ड विद इंटरकनेक्टेड, सेंट्रल पीएसए ऑक्सीजन जनरेटर सिस्टम, सेंट्रल एयर सेक्शन आदि को लगाया जाना है। जिसके लिए सरकार ने करीब 8.84 करोड़ रुपये का बजट विगत दो दिसंबर को जारी किया था। उसके बाद से शुरू हुई टेंडर प्रक्रिया में तीन कंपनियों ने हिस्सा लिया। ऐसे में टेंडर उस कंपनी को देने पर सहमति बनी, जिसने सारा सामान न्यूनतम धनराशि में देने का टेंडर डाला था।
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अब खेल करने की तैयारी
अब इसमें बड़ी तकनीकी खामी कर खेल करने की तैयारी की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि जिस कंपनी को टेंडर देने के लिए सहमति बनी थी, उसने औसत टेंडर जरूर कम कीमत का डाला। लेकिन वो करीब दर्जन भर आइटम बाकी दूसरी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा कीमत पर उपलब्ध करा रही है। जबकि टेंडर प्रक्रिया में हर तकनीकी पहलू को ध्यान में रखना होता है। अगर कोई कंपनी 10 आइटम सस्ते में दे रही है और 15 आइटम टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली कंपनियों द्वारा लगाई गई कीमत में ज्यादा देती है तो उसे टेंडर जारी नहीं किया जा सकता है।
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फिर होगा क्या
नियम कहता है कि पहले उस कंपनी से वार्ता की जाए कि बाकी कंपनियां अन्य आइटम सस्ते दे रही है। अगर आप सबसे निचले वाली दर पर आइटम उपलब्ध कराते हैं तो कंप्लीट टेंडर आपको जारी किया जाएगा। अगर कंपनी आइटम देेने के लिए तैयार नहीं होती हैै तो ऐसी स्थिति में दूसरी कंपनी से बाकी आइटम की खरीद की जा सकती है।
40 से 60 लाख का होगा नुकसान
बताया जा रहा है कि कंप्लीट टेंडर को न्यूनतम दर पर डालने वाले कंपनी को पूरा काम सौंपा है तो उससे 40 से 60 लाख रुपये का नुकसान होगा। क्योंकि दूसरी कंपनियां जिन आइटमों को सस्ता दे रही है, उन्हें आइटम पर यह फर्म करीब 60 लाख से अधिक ले रही है। ऐसे में लेखाधिकारी की आपत्ति में दम दिखाई दे रहा है।
दबाव में हुए हस्ताक्षर
बताया जाता है कि टेंडर कमेटी में शामिल कुछ अन्य सदस्यों ने भी आपत्ति जताई थी। लेकिन सीनियर अधिकारियों के दबाव के बीच हस्ताक्षर कर दिए थे। लेकिन अब लेखाधिकारी हस्ताक्षर करने से पहले कंपनी के साथ कीमतों को लेकर वार्ता करने की शर्तों पर अड़े हैं।
गड़बड़ी नहीं होगी
कमेटी के दोनों सदस्य अगर लिखित तौर पर आपत्ति दर्ज कराते हैं तो कंपनी के साथ वार्ता की जाएगी। किसी स्थिति में गड़बड़ी नहीं की जाएगी। अगर कंपनी बाकी आइटम न्यूनतम दरों पर नहीं देती है तो उसे टेंडर जारी नहीं किया जाएगा। सारा काम पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ होगा।- डॉ. पीके बंसल, सीएमएस जिला अस्पताल
पहले वार्ता होनी चाहिए
शनिवार को हस्ताक्षर करने के लिए फाइल मेरे पास आई थी। उसमें कुछ तकनीकी खामियां हैं। मेरा कहना था कि कम से कम कंपनी के साथ अन्य आइटम के रेट को लेकर वार्ता होनी चाहिए। हालांकि फाइल मुझे पढ़ने के लिए नहीं दी गई है। - मुन्ना लाल शुक्ला, वित्त एवं लेखाधिकारी स्वास्थ्य विभाग