फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Teenagers are entering in swamp of crime instead of education, shocking disclosure in police survey

शिक्षा का दामन छोड़ अपराध के दलदल में किशोर, सर्वे में चौंकाने वाले कई खुलासे

Wed, 01 May 2019 04:07 PM IST
Dimple Sirohi गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 01 May 2019 04:07 PM IST
सार

  • मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत सहित कई जिलों में हुआ सर्वे 
  • 14-17 की उम्र के किशोर सबसे ज्यादा कर रहे हैं अपराध
  • यूरोप की एक कंपनी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में अफसरों को दिए सुझाव 

विज्ञापन
Teenagers are entering in swamp of crime instead of education, shocking disclosure in police survey
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

किताबों को हाथों में थामने और करियर पर ध्यान देने की बजाय किशोर जरायम की दुनिया में कदम बढ़ा रहे हैं। वेस्ट यूपी में अपराध के आंकड़ों को देखें तो 14 से 17 साल की उम्र के अधिकतर किशोर तमंचे, पिस्टल के साथ दिमाग में अपराध की योजना बनाकर घूमते हैं। जेलों और संप्रेक्षण गृह में इसका सर्वे हुआ, जिसमें खुलासा हुआ कि वेस्ट यूपी में सबसे ज्यादा संगीन अपराध करने वाले किशोर हैं। 
विज्ञापन


अपराध करने वाला किशोर सुधरने की बजाय बड़ा अपराधी बन जाता है। उक्त अपराधियों पर शिकंजा लगाना भी बेहद मुश्किल होता है। बताया जाता कि वेस्ट यूपी में जमीनी रंजिश, आपसी विवाद, बुरी आदत व टशनबाजी या फिर झूठी शान के लिए हत्या हो जाना सबसे ज्यादा है। 
विज्ञापन


किशोरों द्वारा सबसे ज्यादा अपराध का खुलासा वेस्ट यूपी की जिलों से सर्वे के दौरान हुआ जिसके बाद पुलिस-प्रशासन भी गंभीर हो गया। इसको लेकर पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की कांफ्रेंस हुई है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

14-17 साल में ज्यादा अपराध 
किशोरावस्था में सोच व समझ परिपक्व नहीं होती। मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बागपत, बुलंदशहर, हापुड़, नोएडा व गाजियाबाद समेत वेस्ट यूपी में 14 से 17 साल की उम्र के ज्यादातर किशोर अपराध की लत पाल बैठते हैं। 

जिम्मेदार लोग पल्ला झाड़ देते हैं कि यह सामाजिक बुराई है, इसको खत्म नहीं किया जा सकता। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। अभिभावक और टीचरों को कई किशोरों में लक्षण दिखते हैं, लेकिन वह उसको इग्नोर कर देते हैं। बस इसको समझने की जरूरत है। शुरूआत में उसको कंट्रोल किया जा सकता है। 

यूरोप की जेलों में हुआ था सर्वे 
एसपी क्राइम डॉ. बीपी अशोक के मुताबिक हाल में पुलिस विभाग की ओर से वे यूरोप के एक सेमिनार में गए थे। वहां बताया गया कि यूरोप की जेलों में एक सर्वे हुआ जिसमें जेल में बंद 70 फीसदी बंदियों में एंटी सोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर (एएसपीडी) की बीमारी बताई गई। किशोरों में एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर) की बीमारी हो जाती है। बाद में किशोरों में यह बीमारी एएसपीडी में बदलती है। इससे वह गुस्से में अपराध करता है। 

अभिभावक और शिक्षक दें ध्यान  
यूरोप की सेमिनार में एएसपीडी की बीमारी से किशोर की एक्टिविटी स्कूल और घर में अलग-अलग दिखने लगती है, जैसे बेवजह किसी को मारना, धक्का देना। इस पर सबसे ज्यादा ध्यान किशोर के अभिभावक और टीचर को देने की जरूरत है। ऐसे किशोरों को काउंसिलिंग की जरूरत होती है।  

खत्म हो रही नाजुकता
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा का कहना है कि अब किशोर माता-पिता के साथ ज्यादा वक्त नहीं बिताते हैं। वह टीवी, मोबाइल और लैपटॉप पर ज्यादा वक्त बिताते हैं। अपराध करने वाले किशोरों से बातचीत करेंगे तो पता चलेगा कि उन्हें अपराध से संबंधित कार्यक्रम भाते हैं। अपराध करने वाले किशोर एंटी सोशल पर्सनालिटी के शिकार हो जाते हैं। 

बढ़ रही किशोरों की संख्या
किशोरावस्था में अपराध करने वालों की संख्या बढ़ रही है। पुलिस से ज्यादा किशोरों के परिजन और टीचरों को ध्यान देने की जरूरत है। पढ़ाई के दौरान किशोरों की कांउसिलिंग करना जरूरी है। जिससे उनका भविष्य भी सुधरेगा।  -प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन 

यह है मेरठ जोन का हाल
जिला  किशोरों की संख्या  अपराध
मेरठ   32  हत्या, लूट और चोरी
मुजफ्फरनगर 18  हत्या, लूट और चोरी
शामली   11  हत्या, लूट और चोरी
सहारनपुर 15  हत्या, लूट और चोरी
बागपत 14  हत्या, लूट और चोरी
बुलंदशहर   17  हत्या, लूट और चोरी
हापुड़     09  हत्या, रंगदारी व चोरी
नोएडा   22  हत्या, लूट और चोरी
गाजियाबाद 17  हत्या, लूट और चोरी

(किशोर संप्रेक्षण गृह में जनवरी 2016 से 31 मार्च 2019 तक किशोर भेजे गए हैं) 

नोट- इन खबरों के बारे अपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें


https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed