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तकनीक आधारित शिक्षण समय की जरूरत : प्रो. राव

Wed, 12 Aug 2026 08:29 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ Updated Wed, 12 Aug 2026 08:29 PM IST
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Technology-based education is the need of the hour: Prof. Tagaram
-- सीसीएसयू में शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण शुरू
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सीसीएसयू के शिक्षा विभाग और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी (सीआईईटी), एनसीईआरटी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को तीन दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम शुरू हुआ।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), संवर्धित वास्तविकता (एआर), आभासी वास्तविकता (वीआर) और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीकों से परिचित कराना है। कार्यक्रम के लिए 140 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीसीएसयू के कुलसचिव प्रो. भूपेंद्र सिंह और विशिष्ट अतिथि शोध निदेशालय के निदेशक प्रो. बीरपाल सिंह रहे। कार्यक्रम में सीआईईटी-एनसीईआरटी के कार्यक्रम समन्वयक प्रो. शिरीष पाल सिंह, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार शर्मा, प्रो. अरुण कुमार, डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल और डॉ. वैभव शर्मा सहित कई शिक्षाविद मौजूद रहे।
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पहले सत्र में सीआईईटी-एनसीईआरटी के प्रो. टागरम कोंडाला राव ने शिक्षा के क्षेत्र में चल रही राष्ट्रीय डिजिटल पहलों और नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षण अब समय की जरूरत है। शिक्षकों को डिजिटल संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करना चाहिए।
प्रो. शिरीष पाल सिंह ने ई-सामग्री तैयार करने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि डिजिटल सामग्री के विकास, संग्रहण, वितरण, पहुंच और मूल्यांकन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने विषयवस्तु, शिक्षण विधि और तकनीक के बेहतर समन्वय को प्रभावी शिक्षण के लिए जरूरी बताया।
डॉ. रुचि द्विवेदी ने एआई और संवर्धित बुद्धिमत्ता के बीच अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि एआई शिक्षकों का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उनके काम को अधिक प्रभावी और आसान बनाने में सहयोगी है। उन्होंने शिक्षा में एआई के जिम्मेदार और रचनात्मक इस्तेमाल पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल ने अतिथियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों को नई तकनीकों से जोड़ने और उनकी व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने में मददगार हैं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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