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पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी की मीट फैक्ट्री को सील करने पहुंची एमडीए टीम, इसके बाद जो हुआ

Thu, 18 May 2017 02:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Thu, 18 May 2017 02:47 AM IST
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Team returned to seize Yakub's factory sealing
याकूब कुरैशी की मीट फैक्ट्री में छापा

हापुड़ रोड स्थित पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी की मीट फैक्ट्री को सील करने पहुंची एमडीए और पुलिस-प्रशासन की टीमों को बुधवार को बैरंग लौटना पड़ा। फैक्ट्री का मानचित्र स्वीकृत नहीं है और कार्रवाई एमडीए को करनी थी। फैक्ट्री की लेबर विरोध में अफसरों के सामने आ गई। फोर्स के पुख्ता इंतजाम न होने पर टीम को वापस लौटना पडा। 

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एमडीए के एक्सईएन अजित कुमार त्यागी, नायब तहसीलदार प्रभा सिंह, सीओ किठौर विनोद कुमार सिरोही तथा खरखौदा थाना पुलिस हाजी याकूब की अल फहीम मीटेक्स प्राइवेट लिमिटेड को सील करने पहुंची थी। अफसरों ने फैक्ट्री में मिले हाजी याकूब के पुत्र से फैक्ट्री के कागजों की मांग की। फैक्ट्री संचालक ने कागजात दिखाने में आनाकानी की तो टीम ने फैक्ट्री को सील करने की चेतावनी दी। संचालक ने विरोध करते हुए कहा कि उनके पास संचालन से संबंधित सभी कागजात हैं। जब पूरे कागजात है तो फैक्ट्री को कैसे सील किया जा सहता है। 

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हमें नक्शा जारी नहीं किया

Team returned to seize Yakub's factory sealing
पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी

एमडीए अधिकारियों ने कहा है कि फैक्ट्री का मानचित्र स्वीकृत नहीं है। इस पर फैक्ट्री में काम कर रहे काफी मजदूर भी विरोध में खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि नई सरकार कह रही है कि वैध फैक्ट्रियां संचालित रहेंगी। लेकिन अधिकारी काम ही नहीं करने दे रहे हैं। भीड़ बढ़ी तो और फोर्स मांगी गई। लेकिन मामला और गंभीर होता गया। ऐसे में टीम यहां से बैरंग लौट आई। हालांकि फैक्ट्री संचालकों ने कहा है कि वह अपने पूरे दस्तावेज ब़हस्पतिवार को पेश करेंगे। यदि कोई कमी है तो बताई जाए। लेकिन इस तरह का शोषण सही नहीं है। उधर, एमडीए अधिकारियों का कहना है कि यदि यहां सील लगानी है तो पीएसी तथा अतिरिक्त फोर्स देना होगा। तभी काम चलेगा।

चेयरमैन अल फहीम मीटेक्स हाजी याकूब कुरैशी ने कहा कि जब हमने फैक्ट्री बनाई थी तब यहां गांव था और यह क्षेत्र एमडीए में नहीं था। बावजूद इसके हमने बाद में नक्शा डाल दिया। एमडीए ने जांच की। लेकिन नक्शा जारी नहीं किया। आज तक यह पेंडिंग पड़ा है। हम हाईकोर्ट चले गए। कोर्ट ने भी पांच में से हमारे चार बिंदु सही माने। आज टीम आई तो हमने कहा कि हल क्या है? हम शमन शुल्क भी देने को तैयार हैं। कल हमने उनसे सारे दस्तावेज देने को समय मांगा है। हमारा काम अवैध कतई नहीं है।

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