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Meerut News: सीबीएसई की कार्यशाला में शिक्षकों ने सीखे प्रश्न निर्माण के गुर
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- छावनी स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल में हुआ आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। आर्मी पब्लिक स्कूल मेरठ छावनी में सीबीएसई दक्षता-आधारित मूल्यांकन विषय पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें मेरठ, गाजियाबाद और आसपास के विद्यालयों के करीब 60 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान बेहतर प्रश्न निर्माण के गुर सिखाए गए।
विशेषज्ञों ने शिक्षकों को विद्यार्थियों की समझ, अनुप्रयोग, आलोचनात्मक चिंतन और समस्या समाधान क्षमता के आकलन की तकनीक समझाई। कार्यशाला का संचालन सुनीता सिंह और मीनाक्षी सरकार ने किया। पहले दिन प्रभावी मूल्यांकन की भूमिका और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में उसके महत्व पर मंथन किया गया। शिक्षकों को दक्षता-आधारित मूल्यांकन के प्रमुख सिद्धांतों से परिचित कराया गया। बहुविकल्पीय प्रश्नों के सत्र में ऐसे प्रश्न तैयार करने पर जोर दिया गया, जिनसे विद्यार्थियों के उच्च स्तरीय चिंतन का आकलन हो सके।
प्रश्न-निर्माण गतिविधि में शिक्षकों ने स्वयं दक्षता आधारित प्रश्न तैयार किए। प्रश्नों की संरचना, उद्देश्य और उपयोगिता पर चर्चा हुई। स्पष्टता, प्रासंगिकता, उपयुक्त संज्ञानात्मक स्तर, अस्पष्टता से बचाव और अधिगम परिणामों के अनुरूप प्रश्न तैयार करने के तरीके बताए गए। प्रश्न बनाकर प्रतिक्रिया के आधार पर उनमें सुधार किया गया।
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अंतिम सत्र में अच्छे समीक्षक के गुणों पर चर्चा हुई। शिक्षकों ने स्पष्ट मानदंड, निरंतरता, वस्तुनिष्ठता और रचनात्मक प्रतिक्रिया के महत्व को समझा। कार्यशाला के समापन पर प्रधानाचार्य डॉ. रीटा गुप्ता और विद्यालय नेतृत्व ने कार्यशाला संचालकों के प्रति आभार जताया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। आर्मी पब्लिक स्कूल मेरठ छावनी में सीबीएसई दक्षता-आधारित मूल्यांकन विषय पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें मेरठ, गाजियाबाद और आसपास के विद्यालयों के करीब 60 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान बेहतर प्रश्न निर्माण के गुर सिखाए गए।
विशेषज्ञों ने शिक्षकों को विद्यार्थियों की समझ, अनुप्रयोग, आलोचनात्मक चिंतन और समस्या समाधान क्षमता के आकलन की तकनीक समझाई। कार्यशाला का संचालन सुनीता सिंह और मीनाक्षी सरकार ने किया। पहले दिन प्रभावी मूल्यांकन की भूमिका और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में उसके महत्व पर मंथन किया गया। शिक्षकों को दक्षता-आधारित मूल्यांकन के प्रमुख सिद्धांतों से परिचित कराया गया। बहुविकल्पीय प्रश्नों के सत्र में ऐसे प्रश्न तैयार करने पर जोर दिया गया, जिनसे विद्यार्थियों के उच्च स्तरीय चिंतन का आकलन हो सके।
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प्रश्न-निर्माण गतिविधि में शिक्षकों ने स्वयं दक्षता आधारित प्रश्न तैयार किए। प्रश्नों की संरचना, उद्देश्य और उपयोगिता पर चर्चा हुई। स्पष्टता, प्रासंगिकता, उपयुक्त संज्ञानात्मक स्तर, अस्पष्टता से बचाव और अधिगम परिणामों के अनुरूप प्रश्न तैयार करने के तरीके बताए गए। प्रश्न बनाकर प्रतिक्रिया के आधार पर उनमें सुधार किया गया।
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अंतिम सत्र में अच्छे समीक्षक के गुणों पर चर्चा हुई। शिक्षकों ने स्पष्ट मानदंड, निरंतरता, वस्तुनिष्ठता और रचनात्मक प्रतिक्रिया के महत्व को समझा। कार्यशाला के समापन पर प्रधानाचार्य डॉ. रीटा गुप्ता और विद्यालय नेतृत्व ने कार्यशाला संचालकों के प्रति आभार जताया।