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Meerut News: टीबी का वार... हर रोज कर रहा 35 को बीमार

Fri, 24 Mar 2023 03:16 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 24 Mar 2023 03:16 AM IST
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TB attack... making 35 sick everyday
मेरठ। जिले में हर रोज करीब 35 टीबी के नए मरीज मिल रहे हैं। इससे साल 2025 तक टीबी मुक्त भारत मुहिम को झटका लग रहा है। पिछले साल एक जनवरी से 31 दिसंबर तक 365 दिन में टीबी के 12870 मरीज मिले। इनमें 9195 मरीज क्षय रोग विभाग की टीम तक पहुंचे हैं, जबकि 3675 रोगियों की जानकारी निजी चिकित्सकों के माध्यम से मिली है। लोगों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ी है, लेकिन अभी और जागरूक होने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से हर साल 24 मार्च को विषय क्षय (टीबी) रोग दिवस मनाया जाता है।
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पिछले साल मिले इन टीबी रोगियों में 30 से 50 साल की उम्र वाले सबसे ज्यादा हैं। 60 प्रतिशत पुरुष और 40 फीसदी महिलाएं हैं। टीबी के इलाज के लिए मेरठ में 18 ट्रीटमेंट यूनिट हैं। एक हजार से ज्यादा डॉट सेंटर हैं और 600 से ज्यादा स्टाफ लगा हुआ है। जिले में पिछले पांच साल में 33 हजार से ज्यादा मरीजों को टीबी की पुष्टि हो चुकी है।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. गुलशन राय ने बताया कि टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ने का कारण अपर्याप्त और कम पौष्टिक भोजन, स्वच्छता का अभाव, कम जगह में ज्यादा लोगों का रहना, टीबी के मरीज के संपर्क में रहना व उसकी चीजों को इस्तेमाल करना है। इसके अलावा टीबी के मरीजों के कहीं भी थूकने, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने और बीच में ही दवाओं को छोड़ने से भी टीबी रोगी बढ़ रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।
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एक बीमार 10-12 लोगों को बनाता है शिकार
टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) का अगर एक मरीज इलाज नहीं कराता है तो वह 10 से 12 मरीजों को टीबी का शिकार बना सकता है। यदि व्यक्ति को टीबी हो और उसे इसका पता न हो तो उसकी वजह से और भी लोग टीबी के मरीज हो सकते हैं।

ये लक्षण दिखें तो जांच कराएं
- दो हफ्ते से लगातार खांसी होना
- बुखार और भूख न लगना
- रात में पसीना आना
- वजन में लगातार गिरावट

यह है टीबी
टीबी एक गंभीर, संक्रामक और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है और जानलेवा हो सकती है। डॉट्स सेंटरों पर इसकी दवाएं मुफ्त मिलती हैं। जिला अस्पताल में इसका केंद्र है।


घबराएं नहीं, इलाज कराएं
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि रोग को न छिपाएं, यह लाइलाज नहीं है। समय पर उपचार से छुटकारा मिल सकता है। दवाओं के साथ पौष्टिक आहार भी जरूरी है। शरीर में पोषक तत्व सेहत को मजबूत करते हैं।
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